केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के जरिये 15,000 करोड़ रुपये तक के निवेश के वोडाफोन आइडिया के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। गृह, विदेश, वित्त और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालयों के अधिकारियों के एक शीर्ष स्तर के समूह ने प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
एफडीआई की मंजूरी से वित्तीय मुश्किलों से गुजर रही इस कंपनी को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) से जुड़े बकायों का भुगतान करने, कर्ज घटाने और परिचालन खर्च में इस्तेमाल के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। यह मंजूरी ऐसे समय दी गई है, जब कंपनी ने कुछ बकाये के भुगतान में राहत की मांग को लेकर सरकार से संपर्क किया है। दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार नहीं चाहती कि वोडाफोन आइडिया डूबे।
कंपनी ने सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन उसने पिछले साल सितंबर में एक बयान में कहा था कि कंपनी के निदेशक मंडल ने विभिन्न साधनों से कंपनी को 15,000 करोड़ रुपये जुटाने को मंजूरी दी है।
वोडाफोन आइडिया पर 1.8 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं, इसलिए कंपनी ने अप्रैल 2022 में भुगतान की जाने वाली 8,200 करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम किस्त चुकाने के लिए सरकार से एक साल की मोहलत मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान कंपनी ने हाल ही में कहा था कि सकल समायोजित राजस्व (एजीआर) का भारी-भरकम भुगतान और संचयी बकाये से कंपनी भुगतान नहीं कर पा रही है। कंपनी ने यह भी कहा था कि कम शुल्क दर और दूरसंचार क्षेत्र की खस्ता हालत के कारण निवेशकों से पूंजी जुटाने में उसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दूरसंचार नियामक ट्राई ने अभी तक वॉयस और डेटा के लिए न्यूनतम मूल्य तय नहीं किया है। नियामक ने संकेत दिए हैं कि वह इस बारे में हितधारकों से परामर्श करेगा।
वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में वोडा आइडिया का घाटा साल भर पहले के मुकाबले 39.5 फीसदी कम होकर 7,022 करोड़ रुपये रहा। परिचालन और अन्य खर्चों में कटौती से कंपनी ने घाटा कम किया है। इससे पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी को 11,643 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में कंपनी की आय 18.2 फीसदी घटकर 9,607 करोड़ रुपये रही, जो इससे पहले के वित्त वर्ष की समान तिमाही में 11,754 करोड़ रुपये थी।