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उत्तराखंड के लिए विजन डॉक्यूमेंट

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:36 PM IST

आर्थिक मंदी की मार बड़ी इकाइयों की तुलना में छोटी इकाइयों पर अधिक पड़ी है। चाहे बात लाभ, ऋण उपलब्धता या लंबे भुगतान चक्रों की हो, छोटी इकाइयां मंदी से ज्यादा प्रभावित हुई हैं।
यह बात भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा मौजूदा आर्थिक संकट के असर को लेकर उत्तरी क्षेत्र में कराए गए एक सर्वेक्षण से सामने आई है। आर्थिक मंदी ने नए रोजगारों के सृजन को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है।
सीआईआई ने नया डॉक्यूमेंट ‘विजन 2022 उत्तराखंड’ तैयार किया है। इस दस्तावेज में पहाड़ी राज्य में लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के अलावा कई अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। उत्तराखंड का यह विजन डॉक्यूमेंट सीआईआई की पहल ‘इंडियाऐट75: द एमर्जिंग एजेंडा’ का परिणाम है और इसकी प्रेरणा प्रबंधन गुरू सीके प्रहलाद से मिली है।
लोगों की महत्वाकांक्षाओं का पता लगाने के लिए सीआईआई ने समाज के विभिन्न तबकों के लगभग 250 से अधिक लोगों से संपर्क किया और कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की।
सीआईआई द्वारा उत्तराखंडऐट विजन डॉक्यूमेंट के लिए बनाई गई संस्था उत्तराखंड टास्क फोर्स के चेयरमैन राकेश ओबेराय ने कहा, ‘उत्तराखंड में जो साझा आकांक्षाएं देखी जा रही हैं, उनमें विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च, वैश्विक सुख-सुविधाओं की पहुंच, जीवन की गुणवत्ता में सुधार, ठोस विकास, स्वच्छ ऊर्जा आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।’
इस विजन डॉक्यूमेंट का खासियत यह है कि इसमें उद्योगों पर कम और बुनियादी ढांचा, पर्यटन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इसमें कहा गया है कि उत्तराखंड उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है जिनमें वह प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए हुए है।
प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त वाले इन क्षेत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, पर्यटन और पनबिजली प्रमुख रूप से शामिल हैं। सीआईआई ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य को 100 फीसदी अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट संशोधन और रीसाइक्लिंग को अपनाना चाहिए। इसने कहा है कि 50 फीसदी उद्योगों को अपशिष्ट प्रबंधन और संरक्षण के लिए पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना चाहिए।
सीआईआई ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए जाने के लिए राज्य में पर्यावरण अनुकूल उद्योगों की स्थापना का भी आह्वान किया है। परिसंघ ने सुझाव दिया है कि आईटी, कृषि, पर्यटन और पनबिजली जैसे पर्यावरण अनुकूल क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना के लिए एक रूपरेखा बनाई जानी चाहिए।
यह विशेष रूप से पनबिजली जैसे क्षेत्र में बेहद जरूरी है। यह राज्य अन्य राज्यों के लिए बिजली का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन सकता है और 100 फीसदी विद्युतीकरण सुनिश्चित कर सकता है। यह पहाड़ी राज्य अपनी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और एडवेंचर टूरिज्म की क्षमताओं की बदौलत एक वैश्विक पर्यटन ठिकाना भी बन सकता है।
कृषि क्षेत्र में एक कोल्ड चेन सप्लाई इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर बाजार संपर्क को मजबूत बनाया जाना चाहिए। नई प्रौद्योगिकी की जानकारी के जरिये कृषि उत्पादों की उपज और गुणवत्ता में सुधार लाना होगा। अक्षय ऊर्जा विकल्पों की खोज में भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
जैव प्रौद्योगिकी, हर्बल दवाओं और प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक अभियान शुरू किया जाना चाहिए। सरकार को सभी प्रमुख पर्यटन ठिकानों पर कला एवं सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना करनी चाहिए। इसके अलावा राज्य की कला एवं संस्कृति के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना चाहिए।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र के विकास के लिए सीआईआई ने कहा है कि सभी गांवों को सड़कों से जोड़ा जाना चाहिए और सभी प्रमुख शहरों को मल्टी-लेन हाईवे से जोड़ा जाना चाहिए। इसके अलावा उच्च शिक्षा वाले संस्थानों की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि शोध कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

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First Published - March 12, 2009 | 1:03 PM IST

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