नकदी की किल्लत के चलते विशाल रिटेल की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसकी वजह से कंपनी को अपने कुछ स्टोरों को बंद करना पड़ सकता है।
साथ ही कंपनी करोड़ों रुपये के कर्ज से जूझ रही है। विश्लेषकों और कंपनी अधिकारियों का कहना है कि विशाल रिटेल को कारोबार से बहुत ज्यादा फायदा नहीं हो रहा है। साथ ही बिक्री कम होने की वजह से कंपनी को दैनिक खर्चे चलाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
विशाल रिटेल के मुख्य कार्यकारी मनमनोहन अग्रवाल ने बताया कि चालू तिमाही के पहले दो महीनों में कंपनी में नकदी का प्रवाह बहुत कम रहा है। इससे कंपनी को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारों का कहना है कि अगर कंपनी की बिक्री में आगे भी गिरावट जारी रही, तो आने वाली दो तिमाहियों में उसे और भी संकट का सामना करना पड़ सकता है। मुंबई स्थित एक विश्लेषक ने कहा कि अगर कंपनी को अगली दो तिमाहियों तक खुद का संभालना है, तो उसे कुछ स्टोरों को बंद करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि कंपनी बिक्री घटने की वजह से कंपनी के पास करीब 15-20 फीसदी विंटर स्टॉक बचा हुआ है, जिसमें कंपनी की काफी रकम फंसी हुई है। उल्लेखनीय है कि विशाल रिटेल की कुल कमाई का करीब 50 फीसदी उत्तर भारत से प्राप्त होता है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी के मुनाफे में करीब 86 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं सीएआरई रेटिंग ने विशाल रिटेल के शॉर्ट टर्म लोन की रेटिंग भी घटा दी है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि विशाल का कारोबार अच्छा नहीं चल रहा है, ऐसे में उसे कर्ज देना जोखिम भरा हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि मुंबई के कुछ स्टोरों में बहुत ज्यादा स्टॉक नहीं है, ऐसे में उसे बंद किया जा सकता है।
अग्रवाल का कहना है कि कंपनी घाटे में चल रहे कुछ स्टोरों को बंद कर सकती है। हालांकि अभी इसके बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले भी कंपनी ने घाटे में चल रहे स्टोरों को बंद कर दिया था। इसके साथ ही कंपनी ने अगली दो तिमाहियों तक अपनी विस्तार योजनाओं को टाल दिया है।