विक्रम सोलर की बढ़ेगी चमक

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 1:46 AM IST

पिछले महीने के अंत में, कोलकाता की कंपनी विक्रम सोलर ने घोषणा की कि वह तमिलनाडु के ओरगडम के इंडोस्पेस इंडस्ट्रियल पार्कमें 1.3 गीगावॉट के सौर पीवी मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए संयंत्र लगाएगी। इसके साथ ही विक्रम सोलर की कुल पीवी मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता 2.5 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी जिसकी वजह से यह भारत में इस मॉड्यूल का सबसे बड़ा संयंत्र हो जाएगा। यह साल 2006 से शुरू की गई एक लंबी यात्रा है जब ज्ञानेश चौधरी ने कोलकाता के प्रमुख विक्रम समूह के नेतृत्व में सौर क्षेत्र में उतरने का फैसला किया गया।
ऐसा करने वाले वह एकमात्र दूसरी पीढ़ी के कारोबारी नहीं थे। पिछले एक दशक में, नवीकरणीय ऊर्जा ने भारत में कई कारोबारी घरानों को आकर्षित किया जिनमें भुजिया निर्माता से लेकर स्टील, सीमेंट, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे की बड़ी कंपनियां आदि तक शामिल हैं। लेकिन विक्रम सोलर ने अलग ही जगह बनाई। जहां ज्यादातर कंपनियां अक्षय परियोजना के विकास में उतरी, वहीं चौधरी ने सौर क्षेत्र में कंपनी की विनिर्माण विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने का फैसला किया। कंपनी ने पश्चिम बंगाल के फाल्टा में पहला सोलर मॉड्यूल विनिर्माण संयंत्र (इसकी दो इकाइयां) लगाया।

विक्रम सोलर के प्रबंध निदेशक चौधरी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘समूह स्तर पर हम लंबे समय से इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल से जुड़े हुए थे। मुझे यह समझने और फैसला करने में एक साल लग गया कि हम आपूर्ति शृंखला के किस हिस्से में प्रवेश करना चाहते हैं। हमारा डीएनए विनिर्माण से जुड़ा है और यह हमारे लिए स्वाभाविक भी है। हमने 2008 में मामूली क्षमता के साथ शुरुआत की थी। उस समय कोई नीति नहीं थी और जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन तब अस्तित्व में नहीं था। इसलिए हमने अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए निर्माण करने का फैसला किया क्योंकि भारत में तब इसका बाजार भी नहीं था।’
मॉड्यूल विनिर्माण के अलावा विक्रम सोलर पूरी तरह से एकीकृत सौर इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) कांट्रैक्टर भी है। कंपनी की कुल ईपीसी क्षमता पोर्टफोलियो, भारत में 1.4 गीगावॉट है। अमेरिका, यूरोप और चीन में कार्यालय के साथ, विक्रम सोलर ने वैश्विक स्तर पर सौर मॉड्यूल की 30 लाख इकाइयां भेजी हैं। वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2019-20 तक कंपनी की सालाना चक्रवृद्धि दर 20.49 फीसदी रही। भारत के सौर मिशन की घोषणा 2010-11 में की गई थी और इससे घरेलू मांग बढ़ गई थी। निर्यात केंद्रित होने की वजह से विक्रम सोलर को मदद मिली क्योंकि शुरुआती मांग अन्य देशों से आई थी।

उन्होंने कहा, ‘हालांकि कोई भी उद्योग एक स्वभाविक प्रगति का अनुसरण करता है लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत में चीन ने जो कुछ किया था उसके विपरीत भारत में विनिर्माण का दायरा बढ़ाने और निर्माण का पूरा तंत्र ही गायब था। हमें अभी भी देर नहीं हुई है। हमारे पास 10 फीसदी अक्षय ऊर्जा क्षमता है और हम 450 गीगावॉट का लक्ष्य रखकर चल रहे हैं।’ भारत के घरेलू सौर विनिर्माण पर चीन के हमले उस दिन से शुरू हुए जब से भारत ने अपना सौर मिशन शुरू किया था। साल 2010 के बाद से सस्ती चीनी बैटरियां और मॉड्यूल की भारतीय सौर बाजार में बाढ़ आ गई है। भारतीय सौर मॉड्यूल की लागत चीन के उत्पादन की तुलना में 8-10 प्रतिशत अधिक है। 
हालांकि इस डंपिंग के कारण पिछले कुछ वर्षों में सौर शुल्क में कमी आई लेकिन यह भारतीय सौर विनिर्माण उद्योग के विकास के लिए हानिकारक था। इसके चलते निर्माताओं, नीति निर्माताओं और परियोजना डेवलपरों के बीच कई चरण की तकरार हुई। पिछले दशक में दो बार भारतीय सौर विनिर्माण उद्योग नेए विशेष तौर पर चीन से होने वाली आयात से राहत पाने की कोशिश की। 2014 में, वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका और चीन से आयातित सौर सेल और मॉड्यूल पर 0.48 डॉलर प्रति यूनिट से 0.81 डॉलर प्रति यूनिट एंटी डंपिंग शुल्क का फैसला किया।

लेकिन वित्त मंत्रालय ने इसे लागू नहीं किया। हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ  ट्रेड रेमेडीज (डीजीटीआर) ने दो घरेलू कंपनियों की शिकायत पर चीन, वियतनाम और ताइवान से आने वाले सौर आयात की डंपिंग की जांच शुरू कर दी। चौधरी का कहना है, ‘डंपिंग के खिलाफ  कोई भी पहल महत्त्वपूर्ण है, खासकर जब यह घरेलू उद्योग की कीमत पर हो। डब्ल्यूटीओ अनुपालन नियमों और अन्य कारणों की वजह से आयात डंपिंग से निपटने की पहले की कोशिशों में कमी आई। हालांकिए हाल के दिनों में हमने सरकार की ओर से ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत अभूतपूर्व पहल देखी है।’
केंद्र सरकार पहले ही 1 अप्रैल, 2022 से 40 फीसदी सीमा शुल्क सौर सेल और मॉड्यूल पर 25 प्रतिशत शुल्क लागू करने की घोषणा कर चुकी है। यह सौर आयात पर दो साल की अवधि वाले सुरक्षा शुल्क के बाद आता है। सौर विनिर्माण के लिए 4,500 करोड़ रुपये की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की भी घोषणा की गई।

First Published : August 20, 2021 | 1:01 AM IST