5 साल में 20 अरब डॉलर निवेश करेगी वेदांत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:03 PM IST

बीएस बातचीत
30 अरब डॉलर का वेदांत समूह आक्रामक वृद्धि योजना की तैयारी कर रहा है, जिससे इसके सेमीकंडक्टर फैब और एक डिस्प्ले संयंत्र की स्थापना जैसे उच्च तकनीक वाले नए क्षेत्रों में प्रवेश करने से भी समूह के राजस्व में इजाफा होगा। सुरजीत दास गुप्ता को दिए साक्षात्कार में समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने अपनी योजनाओं, कर्ज घटाने और चुनौतियों के बारे में बातचीत की। मुख्य अंश…
आप हाल में उच्च तकनीकी क्षेत्र में मजबूती के साथ उतरे हैं। आपने सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण संयंत्र और शुरुआत में एलसीडी के लिए एक डिस्पले संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। आपकी आगामी कुछ वर्षों को लेकर वृद्धि की क्या योजना है, खास तौर इसलिए क्योंकि आप नए क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं?
हमारी आगामी 4-5 साल की योजना बहुत स्पष्ट है। हम 20 अरब डॉलर का निवेश करेंगे और यह आवंटित किया जा रहा है। हम तेल एवं गैस में 5 लाख बैरल के उत्पादन पर पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं जिसमें हम 4 अरब डॉलर का निवेश करेंगे। हमने तकनीक में डिस्पले एवं सेमीकंडक्टर संयंत्र पर 2-3 अरब निवेश करने की योजना बनाई है। इसके अलावा एल्युमीनियम और जस्ते में 2-2 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा। हम अपने कारोबार से संबंधित अधिग्रहण के अवसरों पर भी विचार करेंगे। हम उम्मीद करते हैं कि इस योजना से हम मौजूदा 30 अरब डॉलर की कंपनी से 75 से 80 अरब डॉलर की कंपनी बन जाएंगे।

आप इस निवेश के लिए धन का इंतजाम कैसे करेंगे?
हमारा सालाना मुनाफा 10 अरब डॉलर से अधिक है, इसलिए हमारे पास अपनी योजनाओं पर निवेश के लिए पर्याप्त नकदी है। अगर जरूरत पड़ी तो हम कुछ कर्ज भी जुटा सकते हैं।

डिस्पले और सेमीकंडक्टर संयंत्र पर अभी कितनी प्रगति हुई है?
इन परियोजनाओं के लिए तीन चरणों में कुल 20 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी, लेकिन हमें पहले चरण में 2 से 3 अरब डॉलर की जरूरत होगी। हमारा अनुमान है कि पहले चरण के निवेश से 4-5 अरब डॉलर का राजस्व सृजित होगा। हमारा अनुमान है कि वाणिज्यिक उत्पादन दो साल में शुरू होगा। सेमीकंडक्टर में हमारी साझेदार फोक्सकॉन है और हम वरिष्ठ साझेदार होंगे। डिस्पले से संबंधित कारोबार में हम पहले से हैं क्योंकि हम ताइवान और दक्षिण कोरिया स्थित अपनी फैक्टरियों में मदर बोर्ड बनाते हैं और जापान में हमारा एक शोध एवं विकास केंद्र है। हमने अभी यह फैसला नहीं किया है कि हम पहले चरण में वित्तीय साझेदारी करेंगे या महज तकनीक ज्ञान हासिल करेंगे।

क्या आप इन परियोजनाओं के लिए सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं क्योंकि सरकार इनके लिए भारी वित्तीय प्रोत्साहन मुहैया करा रही है?
हां, हम मंजूरियां हासिल करने के लिए सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं। हमने संयंत्र की स्थापना के लिए जगह भी तय कर ली है। दो संयंत्रों में वाणिज्यिक उत्पादन दो साल में शुरू हो जाएगा। मैंने राज्य सरकारों से कहा है कि केवल फैब संयंत्र की स्थापना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें इस बारे में विचार करना चाहिए कि वे कैसे सिलिकॉन वैली या ताइवान जैसा इलेक्ट्रॉनिक्स हब बना सकते हैं, जो आज से 25 साल पहले बंजर भूमि थे।

स्टरलाइट टेक्नोलॉजिज महज एक ऑप्टिक फाइबर कंपनी से तकनीकी कंपनी की तरफ बढ़ रही है और 5जी कंपनियों को सिस्टम एकीकरण की सेवा दे रही है। क्या आप अपने लिए 5जी में बड़े अवसर देखते हैं?
हम दूरसंचार कारोबार को बैंकऐंड सेवाएं दे रहे हैं। हम अन्य के लिए 5जी नेटवर्क भी बना सकते हैं। सरकार ने हर साल 5 करोड़ किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाने की योजना बनाई है और हम इस कारोबार में सबसे बड़े खिलाड़ी हैं। हम दूरसंचार सॉफ्टवेयर और सिस्टम एकीकरण की सेवाएं भी मुहैया करा रहे हैं।

आपने अपना कुल कर्ज 4 अरब डॉलर घटाने की योजना की घोषणा की है? आपने किस तरह ऐसा करने की योजना बनाई है?
हमारी मूल कंपनी पर कर्ज 9 अरब डॉलर और भारतीय कंपनी पर 3.5 अरब डॉलर का कर्ज है और यह कर्ज कम है। हमने मूल कंपनी का कर्ज तीन साल में 4 अरब डॉलर तक घटाने की योजना बनाई है। ऐसा लाभांश के जरिये किया जाएगा। हमारी इक्विटी का तीन गुना लाभांश के रूप में लौटाया गया है।

आपका स्टार्टअप द्वारा किए जा रहे कार्य को लेकर सकारात्मक रुख है और आपने अपने कारोबारी क्षेत्रों में उनमें से कुछ के साथ काम किया है। क्या आप कोई स्टार्टअप फंड की योजना बना रहे हैं?
हम उन कारोबारों में स्टार्टअप के लिए एक कोष बनाना पसंद करेंगे, जो हमारी कंपनी से संबंधित नहीं है। हालांकि हमने इस फंड की धनराशि के बारे में कोई फैसला नहीं लिया है। हम युवा पेशेवरों पर एक दांव लगाएंगे।

आपकी बीपीसीएल के विनिवेश और उन अन्य पीएसयू कंपनियों पर नजर है, जिनमें सरकार नियंत्रण देने के बारे में विचार कर रही है? आपकी इनमें क्या योजनाएं हैं?
बीपीसीएल के विनिवेश को सरकार ने फिलहाल टाल दिया है। हम उन विभिन्न परिसंपत्तियों का मूल्यांकन और उनमें भागीदारी करते हैं, जो आईबीसी की प्रक्रिया के जरिये आती हैं। मेरा मानना है कि सरकार की सूचबद्ध कंपनियों का कॉरपोरेटाइजेशन या निजीकरण कर दिया जाए तो उनके बाजार मूल्यांकन में पांच गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है। मेरा मानना है कि उनमें से 20 फीसदी का निजीकरण होना चाहिए और 80 फीसदी का कॉरपोरेटाइजेशन। आज भारतीय म्युचुअल फंड, भारती और निजी इक्विटी फंड, एचएनआई आसानी से शेयर खरीद सकते हैं। मेरा मानना है कि उनकी उत्पादकता दो से तीन गुना बढ़ जाएगी। इसमें यह बंदिश लगाई जा सकती है कि कोई भी 5 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकता।

क्या आप नवीकरणीय क्षेत्र और हाइड्रोजन जैसी पूरी मूल्य शृंखला के बारे में विचार कर रहे हैं?
हम ईएसजी को लेकर प्रतिबद्ध हैं। हम 500 मेगावाट की इकाई जल्द शुरू करेंगे। हमारी बिजली क्षमता 2,000 मेगावाट में से 25 फीसदी अगले तीन साल में नवीकरणीय में तब्दील की जाएगी।

बहुत से लोगों का कहना है कि आपने अपना कार्बन फुटप्रिंट घटाने की बात कही है, लेकिन आप कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों में निवेश कर रहे हैं। कोयले के इस्तेमाल के खिलाफ और नवीकरणीय के समर्थन में तगड़ी मुहिम चल रही है। इस मुद्दे पर आपका क्या कहना है?
दुनिया उपदेश देती है, लेकिन खुद अमल नहीं करती है। वे अपने उपदेश भारत पर थोपना चाहते हैं। कोयले, तेल एवं गैस के बिना कुछ नहीं हो सकता। यह एक प्रक्रिया है और इसे सीमित अवधि में नहीं बदला जा सकता है। नवीकरणीय का समानांतर विकास करना होगा और इसमें समय लगेगा। इसके अलावा नई स्क्रबिंग तकनीक से आप कोयले से भी उत्सर्जन घटा सकते हैं।

First Published : May 11, 2022 | 11:48 PM IST