सरकार एयर कंडिशनर्स (एसी) और लाइट इमिटिंग डायोड्स (एलईडी) के उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी है, वहीं विनिर्माताओं ने नई विनिर्माण योजना में दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी है।
यह योजना 1 अप्रैल से लागू होनी है। योजना के संभावित लाभार्थिर्यों में टेलीविजन विनिर्माता शामिल होंगे, जो उद्योग के लिए पीएलआई की वकालत कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि करीब आधे दर्जन एसी विनिर्माताओं ने पहले ही इस क्षेत्र के लिए पीएलआई में दिलचस्पी दिखाई है, जिससे भारत के विनिर्माताओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रमुख उपभोक्ता वस्तु विनिर्माता जैसे ब्लूस्टार, दाइकिन, पैनासोनिक, सैमसंग और हैवल्स (लॉयड) विस्तृत योजना की घोषणा होते ही जल्द से जल्द आवेदन करने की योजना बना रही हैं।
उद्योग के अधिकारी कहते हैं कि पीएलआई को लेकर उत्साह नाहक नहीं है। उनका कहना है कि अगले 5 साल में बढ़े हुए उत्पादन पर प्रोत्साहन दिया गया है, जिसकी वजह से इस योजना में देश के विनिर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव कर देने की क्षमता है।
ब्लूस्टार के प्रबंध निदेशक बी त्यागराजन के मुताबिक प्रस्तावित योजना की रूपरेखा बहुत आकर्षक है और ब्लूस्टार ने एसी के लिए पीएलआई का लाभ लेने का फैसला किया है। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘निवेश की संभावित सीमा और प्रोत्साहन की प्रस्तावित पेशकश एक बेहतर अवसर है। तैयार एसी की क्षमता बढ़ाने के साथ इससे कलपुर्जों के विनिर्माण को भी बल मिलेगा।’ ब्लूस्टार इस समय योजना के अंतिम दस्तावेजों का इंतजार कर रही है।
पैनासोनिक इंडिया के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्याधिकारी मनीष शर्मा ने कहा, ‘इससे निश्चित रूप से कंपोनेंट इकोसिस्टम बढ़ाने व रोजगार के सृजन में मदद मिलेगी। यह योजना उद्योग का ध्यान 3 तरफ से बढ़ाएगी- विनिर्माण मांग की संभावना की तलाश, मांग बढ़ाने के लिए निर्यात में बढ़ोतरी, और आपूर्ति शृंखला मजबूत करना।’ उनके मुताबिक फर्म पहले से ही एसी का निर्यात कर रही है। आगे पैनासोनिक अब कल पुर्जा विनिर्माताओं खासकर मोटर, कंप्रेसर और एल्युमीनियम कॉयल विनिर्माताओं से तालमेल बिठा रही है, जिससे ज्यादा मूल्यवर्धन हो सके।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंंड अप्लायंसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और गोदरेज ऐंड बॉयस के वाइस प्रेसीडेंट कमल नंदी ने कहा कि भारत और चीन के विनिर्माताओं के उत्पादन लागत में अंतर बड़ी कठिनाई है और पीएलआई योजना से इसमें उल्लेखनीय कमी आएगी।
सालाना 65 लाख एसी का स्थानीय बाजार है, जबकि इसकी तुलना में चीन में साल में 5 करोड़ से ज्यादा एसी का विनिर्माण होता है। परिवारोंं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों में एसी की पहुंच सबसे कम (6 प्रतिशत) है, जबकि वाशिंग मशीन (11 प्रतिशत), रेफ्रिजरेटर (35 प्रतिशत) और टीवी (85 प्रतिशत) की परिवारों तक पहुंच ज्यादा है।
पीएलआई के तहत सरकार ने तैयार एसी के लिए 3,000 करोड़ रुपये, कंप्रेसर जैसे कंपोनेंट के लिए 2,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की योजना बनाई है। शर्मा को उम्मीद है कि कंप्रेसर के विनिर्माण, जिसकी एसी की कुल लागत की आधी लागत है, बड़े पैमाने पर होने से 2024 तक इसकी मात्रा तेजी से बढ़ेगी।
एलईडी सेक्टर के लिए 1,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की योजना बनाई गई है।
गोल्डमेडल इलेक्ट्रिकल्स के निदेशक किशन जैन ने कहा, ‘इससे हमारे जैसी देसी कंपनियों को बड़ा मौका मिलेगा, जिससे एलईडी लाइटिंग उत्पादों की विनिर्माण क्षमता बढ़ाई जा सके। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।’