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इस साल की थैली रह सकती है छोटी

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:36 PM IST

इक्विटी यानी शेयर बाजार के निवेशकों के लिए साल 2008-09 अच्छा नहीं रहा है और अब डिविडेंड यानी लाभांश के मामले में भी यह साल निवेशकों के हक में नहीं लग रहा है।
कंपनियों की कमाई में आई गिरावट की वजह से कई कंपनियां, जिन्होंने 2007-08 में डिविडेंड दिया था, 2008-09 में या तो डिविडेंड घटा रही हैं या फिर बिलकुल ही नहीं दे रही हैं। लेकिन खासकर सार्वजनिक क्षेत्र, आईटी और एफएमसीजी सेक्टर की कुछ कंपनियां 2008-09 में अपना डिविडेंड बढ़ा सकती हैं।
पिछले साल की तुलना में इस साल कंपनियों का कुल डिविडेंड कुछ कम हो सकता है। पिछले साल कुल 52,150 करोड़ का डिविडेंड दिया गया था जबकि इस साल 51,500 करोड़ का डिविडेंड दिया जाना है। पहले नौ महीनों के लिए करीब 95 कंपनियां अब तक 11,326 करोड़ का अंतरिम लाभांश दे चुकी हैं। बाकी के 40,174 करोड़ साल के आखिर में दिए जाने हैं।
यह राहत मूलत: सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से आनी है जिनमें राष्ट्रीयकृत बैंक, तेल और गैस और इंजीनियरिंग कंपनियां शामिल हैं। इस सार्वजनिक उपक्रमों का डिविडेंड पिछले साल के 22,116 करोड़ के मुकाबले इस कारोबारी साल में 24,201 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। अभी तक ओएनजीसी, एनटीपीसी और सेल जैसे 11 सार्वजनिक उपक्रम 8429 करोड़ रुपये का अंतरिम लाभांश दे चुके हैं।
निजी क्षेत्र की कंपनियों को अपने शेयरधारकों को मनाना खासा मुश्किल होगा। वार्षिक आधार पर मौजूदा कारोबारी साल का मुनाफा 10-15 फीसदी कम होने की संभावना के साथ इस साल इनका कुल डिविडेंड घटकर 27,299 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है जो पिछले साल 30,000 करोड़ रुपए था।
निजी क्षेत्र की कुल 1256 कंपनियों में से करीब 158 कंपनियां इस साल डिविडेंड नहीं दे सकती हैं जबकि 627 अपना लाभांश कम कर सकती हैं। साल 2008-09 के लिए बैंक अपना लाभांश पिछले साल की तुलना में करीब 1000 करोड़ से बढ़ा सकते हैं, पिछले साल इन्होने कुल 6500 करोड़ का डिविडेंड दिया था।
हालांकि इस साल के पहले नौ महीनों में कार्पोरेट जगत के शुध्द मुनाफे में कमी आई है लेकिन ट्रेजरी लाभ के चलते बैंकों के शुध्द मुनाफे में 20 फीसदी की इजाफा देखा गया। सॉफ्टवेयर सेवा वाली कंपनियां मार्क टु मार्केट नुकसान का प्रावधान करने के बावजूद इस साल ज्यादा डिविडेंड दे सकती हैं।
दूसरे सेक्टरों को देखें तो फर्टिलाइजर, केमिकल्स, खाद्य सामग्री, एफएमसीजी और फार्मा सेक्टरों का लाभांश ज्यादा रह सकता है। जबकि रियल्टी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, ऑटो पुर्जा, मीडिया और कई और छोटे और मझोले सेक्टरों की कंपनियों को इस बार लाभांश या तो कम करना होगा या फिर वे दे ही नहीं पाएंगीं।
पिछले साल (2007-08) में लाभांश देने वाली कुल 1320 कंपनियों पर किए बिजनेस स्टैंडर्ड रिसर्च ब्यूरो के अध्ययन के मुताबिक दिसंबर 2008 को खत्म हुए नौ महीनों में 158 कंपनियों को शुध्द नुकसान हुआ है और हो सकता है कि वे इस बार लाभांश नहीं दें जबकि 653 कंपनियां अपना लाभांश कम कर सकती हैं। केवल 502 कंपनियां ऐसी हो सकती हैं जो इस साल अपना लाभांश बढ़ा सकती हैं।
अध्ययन निम्नलिखित आधार पर किया गया है। पहले हमने वो 1320 कंपनियां चुनीं जिनका साल 31 मार्च को खत्म होता है और उन्होंने 31 मार्च 2008 को खत्म हुए साल में लाभांश दिया है। यह अनुमान है कि जिन कंपनियों को इस साल के पहले नौ महीनों में शुध्द नुकसान हुआ है वो इस बार डिविडेंड देने से बच सकती हैं, साल 2007-08 में केवल पांच कंपनियां ऐसी थी जिन्होंने अपने रिजर्व और सरप्लस से लाभांश बांटा।
जिन कंपनियों को 2008-09 के पहले नौ महीनों में शुध्द मुनाफा हुआ है, वे कंपनियां साल 2007-08 की तरह ही लाभांश दे सकती हैं। अगर वे ऐसा करती हैं तो 653 कंपनियां वार्षिक आधार पर नौ महीनों के 97, 667 करोड़ के शुध्द मुनाफे के साथ 2008-09 में करीब 18,252 करोड़ का लाभांश बांट सकती हैं।
इन कंपनियों ने साल 2007-08 में 126,711 करोड़ के शुध्द मुनाफे पर कुल 23,043 करोड़ रुपए का लाभांश दिया था। शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था की हालत को देखते हुए यह बहुत संभव लगता है कि पिछली बार की तुलना में इस बार ज्यादा कंपनियां लाभांश घटाएंगी या फिर देने से बचेंगीं।
इस साल के पहले नौ महीनों में मजबूत प्रदर्शन करने वाली 502 कंपनियां अपने शेयरधारकों को कुल 33,252 करोड़ का डिविडेंड दे सकती हैं और इसमें से ये कंपनियां 8654 करोड़ का अंतरिम लाभांश पहले ही दे चुकी हैं। इन कंपनियों ने पिछले साल यानी 2007-08 में कुल 97,930 करोड़ के शुध्द मुनाफेपर 27,115 करोड़ का लाभांश दिया था। इनमें से ज्यादातर कंपनियां कंज्यूमर सामान, हेल्थकेयर बैंकिंग क्षेत्र से हैं।
कार्पोरेट कमाई में गिरावट ने कुल डिविडेंड को प्रभावित किया है, और पहले नौ महीनों में केवल 95 फर्मों ने अंतरिम लाभांश का ऐलान किया जबकि पिछले साल इस दौरान कुल 144 कंपनियों ने अंतरिम लाभांश का ऐलान किया था। पहली अप्रैल 2008 से 6 मार्च 2009 के बीच कुल 60 कंपनियों ने अंतरिम लाभांश का ऐलान किया है।
इसमे से 35 ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने पिछले साल भी अंतरिम लाभांश दिया था जबकि 84 उन कंपनियों ने इस साल कोई अंतरिम लाभांश नहीं दिया जिन्होने पिछले साल दिया था। जो कंपनियां अंतरिम लाभांश से दूर रही हैं उनमें रियल एस्टेट, नॉन बैंकिंग फाइनेंस और फार्मा सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं।
डीएलएफ, विप्रो, एल ऐंड टी, सेसा गोवा, गुजरात फ्लूरोकेमिकल्स और मनुगढ़ इंडिया ऐसी कंपनियां रही जिन्होंने साल 2007-08 में सौ फीसदी लाभांश दिया लेकिन इस बार फिलहाल नहीं दे रही हैं। कंपनियों पर कर्ज का भार अभी कई साल रहने की संभावना के बीच इक्विटी निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि अंतरिम राहत पैकेज मिलने से कंपनियों की कमाई 2009-10 में सुधरेगी।
इस माहौल में हालांकि कुछ कंपनियां अपने लाभांश बढ़ा सकती हैं। हमने पिछले नौ महीनों के प्रदर्शन के आधार पर यह सूची बनाई है और हमारा मानना है कि इस साल यह कंपनियां पिछले साल के बराबर लाभांश देने में कामयाब रहेंगीं। हमने उन शेयरों को इस सूची से निकाल दिया है जिनका लंबी अवधि का कर्ज उनके कुल कैपिटलाइजेशन के पचास फीसदी से ज्यादा है।
इस साल अब तक सूची की इन कंपनियों ने पिछले दो सालों में या तो लाभांश बरकरार रखा है या बढ़ाया है। ओएनजीसी, इन्फोसिस, स्टेट बैंक, पीएनबी, हीरो होंडा, मोसैन्टो इंडिया, कोलगेट पामोलिव, आईसीआई, कोरोमंडल फर्टिलाजर्स, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस समेत कई छोटी और मझोली कंपनियां उम्मीद हैं इस बार लाभांश बढ़ाएंगीं।
जो कंपनियां लाभ कम होने के चलते अपना लाभांश कम कर सकती हैं उनमें रिलायंस इंड., एल ऐंड टी, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स, बजाज ऑटो, सेसा गोवा, ग्रासिम इंड, टाटा पावर, टाटा केमिकल्स, इंडिया बुल्स, डीएलएफ, महिन्द्रा ऐंड महिन्द्रा और कई और कंपनियां शामिल हैं।
जो कंपनियां इस बार लाभांश देने से बच सकती हैं उनमें आशापुरा माइनकेम, बीपीसीएल, बोंगईगांव रिफाइनरी, चेन्नई पेट्रोलियम, फिनोलेक्स केबल्स, एचपीसीएल, इंडिया ग्लाइकोल्स, जेएसएल ऑर्गैनिक्स, ऑर्किड केमिकल्स और सुजलॉन एनर्जी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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First Published - March 12, 2009 | 12:48 PM IST

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