टाटा समूह की कंपनियां चालू वित्त वर्ष के दौरान अपने कारोबार के विस्तार पर 60,000 करोड़ रुपये खर्च करेंगी। वे अपनी पूंजीगत खर्च योजना के लिए रकम जुटाने के लिए प्रमुख बैंकों और इक्विटी निवेशकों के साथ बातचीत कर रही हैं। टाटा मोटर्स के नेतृत्व में टाटा पावर और टाटा स्टील सहित समूह की कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहन एवं अक्षय ऊर्जा में निवेश करने की योजना बना रही हैं।
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, टाटा मोटर्स आने वाले वर्षों में मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों की एक श्रृंखला शुरू करने के लिए 32,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की तैयारी कर रही है। इसमें से 26,000 करोड़ रुपये ब्रिटेन की सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर द्वारा खर्च किए जाएंगे जबकि शेष रकम मूल कंपनी में निवेश किया जाएगा।
वित्त वर्ष 2022 में टाटा मोटर्स ने अपने यात्री कार कारोबार को पूर्ण स्वामित्व वाली दो सहायक कंपनियों- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (टीएमपीवीएल) और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी- के तहत पुनर्गठित किया था।
बैंकरों का कहना है कि टीपीजी राइज फंड अगले 12 महीनों के दौरान इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी में 11 से 15 फीसदी हिस्सेदारी के लिए करीब 1 अरब डॉलर का निवेश कर सकता है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन श्रेणी में अधिकांश निवेश इक्विटी फंडेड होगा जिससे बाहरी उधारी पर निर्भरता कम
हो जाएगी।
टाटा समह अबू धाबी के फंड मुबाडला कैपिटल और ब्लैकरॉक रियल ऐसेट्स के सहयोग से अक्षय ऊर्जा में भी निवेश कर रहा है। दोनों निवेशकों ने टाटा पावर रिन्यूएबल में 10.5 फीसदी हिस्सेदारी ली है जो 6,000 करोड़ रुपये का राइट्स इश्यू लेकर आ रही है। टाटा पावर 14,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च कर रही है। इसमें से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश उसकी अक्षय ऊर्जा सहायक कंपनी करेगी। अगले पांच वर्षों के दौरान टाटा पावर ने केवल अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 75,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है।
टाटा स्टील वित्त वर्ष 2023 में अपना ऋण बोझ करीब एक अरब डॉलर कम करने की योजना बना रही है। वह 12,000 करोड़ रुपये का पू्ंजीगत निवेश करने जा रही है और इसमें से 8,500 करोड़ रुपये भारत में जबकि शेष यूरोप में खर्च किए जाएंगे।
कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी टीवी नरेंद्रन ने कहा, ‘भारत में हम कलिंगनगर परियोजना, जीविका एवं खनन गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यूरोप में पूंजीगत खर्च के लिए जीविका, उत्पाद मेल को बेहतर करने और पर्यावरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।’ इसके अलावा टाटा स्टील भारत में नीलाचल इस्पात के अधिग्रहण पर 12,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करेगी।
मूडीज के विश्लेषकों का कहना है कि मार्च 2022 के अंत तक टाटा स्टील के 3.1 अरब डॉलर के निवेश और अगले 18 महीनों में सितंबर 2023 तक 6.5 से 7 अरब डॉलर के अनुमानित परिचालन नकदी प्रवाह उसके 9 अरब डॉलर के पूंजीगत व्यय, घोषित अधिग्रहण, लाभांश एवं ऋण अदायगी (लघु अवधि के ऋण) जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।
समूह की अन्य कंपनियों में टाटा केमिकल्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने चालू वित्त वर्ष के दौरान क्रमश: 2,000 करोड़ रुपये और 361 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च की योजना बनाई है।