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टाटा स्टील: ऋण कम, राजस्व अधिक

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Last Updated- December 12, 2022 | 3:43 AM IST

करीब एक दशक तक भारी ऋण बोझ और स्थिर राजस्व के साथ संघर्ष करने के बाद वित्त वर्ष 2021 में टाटा स्टील ने आश्चर्यजनक प्रदर्शन किया है। कोरस (अब टाटा स्टील यूरोप) के अधिग्रहण के कारण भारी ऋण बोझ तले दबी कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान पहली बार अपनी देनदारियों के मुकाबले राजस्व में अधिक वृद्धि दर्ज की है। इससे कंपनी के बहीखाते और शेयर के प्रदर्शन में सुधाार की रफ्तार बरकरार रहने की उम्मीद बढ़ गई है।
इसी साल मार्च के अंत में कंपनी का सकल ऋण बोझ सालाना आधार पर 24 फीसदी घटकर 88,500 करोड़ रुपये रह गया जबकि वित्त वर्ष 2021 में समेकित राजस्व 5 फीसदी बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के ऋण बोझ में कमी के कारण उसके ऋण अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ। कंपनी का ऋण बनाम इक्विटी अनुपात घटकर 1.4 गुना रह गया जो 2007 में कोरस के अधिग्रहण के बाद सबसे कम है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 में करीब 7,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया जबकि एक साल पहले उसने 1,556 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था।
इस्पात कीमतों में तेजी से राजस्व को रफ्तार मिली और ऋण बोझ के हल्का होने से कंपनी की परिसंपत्ति उपयोगिता अनुपात में सुधार हुआ। वित्त वर्ष 2021 में प्रत्येक 100 रुपये मूल्य की सृजित परिसंपत्ति पर 86 रुपये की शुद्ध बिक्री हुई जो एक साल पहले के 74 रुपये से अधिक है। हालांकि यह वित्त वर्ष 2009 में 166 रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई के मुकाबले अभी भी आधा है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों का कहना है कि इस्पात कीमतों में तेजी से टाटा स्टील को काफी फायदा मिला है। उसने उम्मीद के मुताबिक ही मार्च 2020 तिमाही में ऊंची कीमतों के बल पर अपना अब तक का सर्वाधिक समेकित परिचालन मुनाफा दर्ज किया था। शुद्ध ऋण बोझ घटकर मार्च 2018 के बाद सबसे निचले स्तर पर रह गया। कंपनी ने आंतरिक संसाधनों के जरिये ऋण बोझ में कमी की। कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 में परिचालन से 44,300 करोड़ रुपये का नकदी प्रवाह सृजित किया जो एक साल पहले के 20,000 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग दोगुना है। इसमें से अधिकांश नकदी का उपयोग ऋण अदायगी में किया गया और महज एक तिहाई रकम का उपयोग पूंजीगत खर्च में किया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भी टाटा स्टील अपने ऋण बोझ में कमी करेगी। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2022 में कंपनी के समेकित शुद्ध ऋण में 18,800 करोड़ की गिरावट आएगी। कलिंगनगर संयंत्र में 5 एमटीपीए के लिए विस्तार पर पूंजीगत खर्च किए जाने के बावजूद कंपनी के ऋण बोझ में कमी आएगी। इससे पहले कंपनी की उधारी में राजस्व के मुकाबले कहीं तेजी से वृद्धि हो रही थी। ऐसे में कंपनी के लिए लगातार मुनाफा दर्शाना मुश्किल हो रहा था।
वित्त वर्ष 2009 और वित्त वर्ष 2020 के दौरान कंपनी का सकल ऋण बोझ 59,000 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2020 के अंत में 1.16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस अवधि के दौरान समेकित शुद्ध बिक्री 1.48 लाख करोड़ रुपये पर लगभग स्थिर रही थी। हालांकि कुछ विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2022 में इस्पात विनिर्माताओं के लिए अधिक मार्जिन को लेकर आशंका जताई है।
जेएम फाइनैंस इंस्टीट्यूशनल इक्विटी के एमडी एवं मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021 में बड़ी इस्पात कंपनियों को वित्तीय लाभ काफी हद तक धातु कीमतों में तेजी के कारण हुआ न कि अधिक मात्रात्मक बिक्री के कारण। हालांकि चीन सहित विकसित देशों में मौद्रिक प्रोत्साहन में नरमी और भारत में मौजूदा मांग परिदृश्य को देखते हुए मूल्य आधारित आय वृद्धि में स्थिरता के आसार कम दिख रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि आय और शेयर मूल्य में स्थायी वृद्धि के लिए उचित मूल्य और मात्रात्मक वृद्धि दोनों की आवश्यकता  होती है जो फिलहाल नहीं दिख रही है।

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First Published - June 13, 2021 | 11:55 PM IST

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