वैश्विक आर्थिक मंदी के इस दौर में अब जबकि ज्यादातर जगह छंटनी की तलवार चल रही है, कुछ क्षेत्रों में उम्मीद की किरण भी दिख रही है। मंदी के इस तूफान में भी यह क्षेत्र नई बुलंदियां छू रहा है।
जी हां, बीमा क्षेत्र मंदी को धता बताते हुए अपनी विभिन्न योजनाओं को नए सिरे से अमली जामा पहनाने जा रहा है। इस उद्योग से जुड़े कुछ कंपनियों ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ अपनी विस्तार और नए कर्मचारियों की भर्ती की योजनाओं के बारे में खुलासा किया।
उन्होंने कहा कि अधिकांश नौकरियां सेवा और बिक्री क्षेत्र में पैदा की जाएंगी। कहा जा रहा है कि बीमा उद्योग वर्ष 2010 में 52 अरब डॉलर का कारोबार छू सकता है। यह वर्ष 2007-08 के मुकाबले काफी अधिक है। इस उद्योग से जुड़े लोग बीमा उद्योग की संभावनाओं को लेकर काफी उत्साहित हैं।
देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की देश भर में वर्ष 2009 में करीब 10,000 कर्मचारियों और 250,000 बीमा एजेंट नियुक्त करने की योजना है। इसी तरह एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस अपने बीमा एजेंटों की मौजूदा संख्या को बढ़ाकर एक लाख तक करने की योजना बना रही है।
कंपनी का वर्ष 2009 में अपनी शाखाओं की संख्या में भी इजाफा करने का इरादा है। उसकी योजना है कि शाखाओं की संख्या 250 कर ली जाए। इस दौड़ में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल भी पीछे नहीं रहना चाहती है।
कंपनी के कार्यकारी निदेशक भार्गव दासगुप्ता ने कहा कि पिछले दो सालों में उनकी कंपनी ने अपनी वितरण प्रणाली में खासा विस्तार किया है और इसके लिए देश भर में कई नई शाखाएं खोली हैं।
दासगुप्ता ने कहा कि इस वर्ष हमारा जोर अपने मौजूदा संसाधनों का उपयोग कर अपनी क्षमता और उत्पादकता में बढ़ोतरी करने पर है।
इसके अलावा कंपनी के ढाई लाख से अधिक बीमा सलाहकार भी हैं। एगॉन रेलिगेयर लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी राजीव जमखेदकर ने कहा कि कंपनी अपने परिचालन के दौरान पहले साल करीब 6,000 एजेंटों की नियुक्ति करेगी जबकि अगले तीन साल में इसे 30,000 हजार तक किया जाएगा।
कंपनी अपने परिचालन के पहले साल में 51 शाखाएं खोल रही हैं। ये शाखाएं 39 शहरों में होंगी। मैक्स न्यूयार्क लाइफ इंश्योरेंस भी हर साल कम से कम 250 कार्यालय खोल रही है।
अभी कंपनी के 47 हजार एजेंट हैं जिनकी संख्या बढ़ाकर तीन लाख की जाएगी। वर्ष 2011-12 तक कंपनी का 900 एजेंसी कार्यालय खोलने और 700 ग्रामीण दफ्तर शुरू करने का इरादा है।