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मौसम विभाग की चेतावनी: जुलाई में सामान्य से कम बरसेंगे बादल, देश के कई हिस्सों में बढ़ सकता है जल संकट!

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दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के जून से सितंबर के चार महीनों के सीजन के दौरान 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर 280.4 मिमी एलपीए के साथ सबसे अ​धिक वर्षा जुलाई में ही होती है

Last Updated- June 30, 2026 | 10:17 PM IST
Rain
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश में जुलाई के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इस दौरान दीर्घाव​धि औसत (एलपीए) के 94 प्रतिशत से कम पानी बरसने का अनुमान है। मौसम विभाग ने मंगलवार को अपने मासिक बु​लेटिन में यह जानकारी दी।

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के जून से सितंबर के चार महीनों के सीजन के दौरान 1971-2020 के आंकड़ों के आधार पर 280.4 मिमी एलपीए के साथ सबसे अ​धिक वर्षा जुलाई में ही होती है। इससे पहले जून में भी बहुत कम बारिश दर्ज की गई है। मॉनसून के पहले महीने में केवल 99.5 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम है और यह 1901 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से छठा सबसे शुष्क जून बन गया है।

जून माह में पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में 197.5 मिमी वर्षा हुई, जो 1901 के बाद इस महीने के लिए सबसे कम है, जबकि मध्य भारत ने 84.4 मिमी पानी बरसा और यहां अपने रिकॉर्ड में सातवां सबसे शुष्क जून दर्ज किया गया।

मौसम विभाग के अनुसार जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर, मध्य-पूर्व और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है। कम वर्षा का असर सीधे तौर पर धान, दलहन और तिलहन जैसी वर्षा-आधारित फसलों की बोआई पर पड़ेगा।

मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जो मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में अपने निर्धारित समय से लगभग 10 दिन पीछे चल रहा है, अगले दो से तीन दिनों में दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और

हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पहुंचने की उम्मीद है। मॉनसून 4 जून को केरल में सामान्य आगमन की तारीख से तीन दिन बाद आया था।

महापात्र ने यह भी कहा कि बंगाल की खाड़ी पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बन रहा है, जिससे जुलाई के पहले सप्ताह में देश के कई हिस्सों, विशेष रूप से मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में बिजली गिरने और गरज के साथ भारी बारिश होने की संभावना है।

महापात्र ने कहा, ‘निम्न दबाव गतिवि​धि के कारण जुलाई के पहले सात दिनों तक अच्छी वर्षा होने की संभावना है और यह दस दिन तक भी बढ़ सकती है। पर्याप्त मात्रा में वर्षा धान जैसी फसलों के लिए फायदेमंद रहेगी। महीने का पहला भाग फसलों के लिए मददगार होगा, लेकिन दूसरे हिस्से में सामान्य से कम बारिश के कारण चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

अल नीनो की स्थिति, निम्न दबाव प्रणाली की कम संख्या जैसे कारकों के कारण जून में कम पानी बरसा है। महापात्र का कहना है कि अल नीनो की गतिविधि अगले साल के वसंत तक जारी रहने की संभावना है और समय के साथ और तेज होगी।

अधिकांश मॉडल कह रहे हैं कि अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को मॉनसून सीजन की दूसरी छमाही में एक सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव से कम किया जा सकता है, लेकिन इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा कि यह कितना प्रभावी साबित होगा।

महापात्र ने कहा कि सामान्य से कम वर्षा कुछ क्षेत्रों में जल संकट का कारण बन सकती है, इसलिए किसानों को जल संरक्षण उपाय अपनाने चाहिए और कम पानी की आवश्यकता वाली फसलें उगाने पर अ​धिक ध्यान देना होगा। मौसम विभाग ने जुलाई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर रहने का पूर्वानुमान लगाया है।

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First Published - June 30, 2026 | 10:17 PM IST

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