स्पाइसजेट जमा कराए 243 करोड़ रुपये

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 2:31 AM IST

नकदी संकट का सामना कर रही विमानन कंपनी स्पाइसजेट को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने सन समूह के मालिक और कंपनी के पूर्व प्रवर्तक कलानिधि मारन को शेयर हस्तांतरण विवाद से जुड़े मामले में विमानन कंपनी को छह हफ्ते के अंदर अतिरिक्त 243 करोड़ रुपये जमा कराने का आज आदेश दिया।
अगर तय समयसीमा में रकम जमा नहीं कराई जाती है तो मारन के पास स्पाइसजेट की शेयरधारिता पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग का अधिकार होगा। इसका मतलब यह है कि कंपनी ताजा शेयर जारी कर या शेयर की बिक्री कर बाजार से पूंजी नहीं जुटा सकती है। आदेश में कहा गया है, ‘ऋणी को (इस मामले में स्पाइसजेट और प्रवर्तक अजय सिंह) छह हफ्ते के अंदर 243.93 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया जाता है। अगर रकम जमा नहीं कराई जाती है तो डिक्री धारक (कलानिधि मारन और उनकी फर्म कल एयरवेज) को यह अधिकार होगा कि वह स्पाइसजेट और अजय सिंह को शेयरधारिता पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए निर्देश ले सकते हैं।’
यह रकम 579 करोड़ रुपये पर ब्याज देनदारी है जिसे अदालत ने विवाद पर सुनवाई के दौरान 2017 में स्पाइसजेट को जमा कराने को कहा था। विमानन कंपनी ने बैंक गारंटी के तौर पर 329 करोड़ रुपये दिए थे और 250 करोड़ रुपये जमा कराए थे।
कोविड महामारी के कारण विमानन कंपनी की आय पर व्यापक असर पड़ा है, ऐसे में स्पाइसजेट के लिए इस आदेश का पालन करना चुनौतीपूर्ण होगा। मार्च के अंत में कंपनी की नेटवर्थ 1,680 करोड़ रुपये और नकदी महज 42 करोड़ रुपये रह गई थी। दूसरी ओर स्पाइसजेट पर पट्टा किराया, आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान आदि की देनदारी भी बढ़ रही है। स्पाइसजेट का शेयर बीएसई पर 2.52 फीसदी की गिरावट पर बंद हुआ।
स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अदालत के आदेश का अध्ययन कर रही है। कंपनी के एक एक अन्य अधिकारी ने कहा कि स्पाइसजेट अदालत से रकम जमा कराने के लिए मोहलत मांगेगी। स्पाइसजेट का स्वामित्व अजय सिंह को हस्तांतरित करने के बाद मारन के पक्ष में वारंट जारी नहीं करने को लेकर विवाद है। वित्तीय संकट के कारण परिचालन प्रभावित होने के बाद मारन ने कंपनी में अपनी 58.46 फीसदी की पूरी हिस्सेदारी 2015 में 2 रुपये के सांकेतिक मूल्य पर बेच दिया था। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। मारन ने कंपनी में 579 करोड़ रुपये निवेश करने के बावजूद स्पाइसजेट और अजय सिंह द्वारा उन्हें 18.9 करोड़ शेयर वारंट और तरजीही शेयर जारी नहीं पर करार के उल्लंघन का आरोप लगाया है। मारन ने स्पाइसजेट और अजय सिंह पर 1,300 करोड़ रुपये का दावा किया है।
वारंट को शेयर में बदला जाता है तो स्पाइसजेट में मारन और कल एयरवेज के पास 24 फीसदी हिस्सेदारी होगी। स्पाइसजेट ने कहा कि एक्सचेंज से मंजूरी नहीं मिलने की वजह से इसे जारी नहींं किया गया था। जुलाई, 2018 में मध्यस्थता पंचाट ने स्पाइसजेट के पक्ष में फैसला सुनाया था।

First Published : September 7, 2020 | 11:11 PM IST