सीमेंट की मांग में आई कमी और बढ़ते स्टॉक को देखते हुए राजस्थान की सीमेंट उत्पादन कंपनी श्री सीमेंट ने अपने माल को मुंबई के बाजारों में बेचने का मन बना लिया है।
शहर के विक्रेताओं के अनुसार उत्तर भारत की इस प्रमुख सीमेंट कंपनी के अलावा कच्छ की सांघी इंडस्ट्रीज ने भी अपने माल को बेचने के लिए कुछ ऐसी ही योजनाएं बनाई हैं। लंबी दूरी के कारण आमतौर पर श्री जैसी कंपनियां मुंबई जैसे बाजारों में अपने उत्पाद नहीं बेचती हैं।
आमतौर पर सीमेंट को उतपादन इकाइयों से 400 किमी की दूरी तक ले जाकर ही बेचा जाता है क्योंकि इससे अधिक दूरी होने पर ढुलाई का खर्चा बहुत अधिक बढ़ जाता है।
श्री सीमेंट के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एच एम बांगुर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमनें मुंबई के लिए 3-3 हजार टन वाले दो रैक भेजे हैं। यह स्टॉक बहुत अधिक नहीं है और मुंबई में कारोबार की हमारी कोई योजना नहीं है।’
बांगुर से जब पूछा गया कि उन्होंने कंपनी के माल को बेचने के लिए मुंबई के बाजारों को क्यों चुना तो उन्होंने ऐसा कदम इसलिए उठाया ताकि उत्तर भारतीय इलाकों में बहुत अधिक स्टॉक जमा न हो जाए। कंपनी ने पिछली दफा करीब 10 साल पहले मुंबई में अपना माल बेचा था।
उद्योग जगत के विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम चौंकाने वाला नहीं है क्योंकि फिलाहल मांग, बिक्री और खपत के लिहाज से उत्तरी भारत के बाजार सबसे मंद हैं।
एजेंल ब्रोकिंग के विश्लेषक पवन बुडर् ने कहा, ‘उत्तरी इलाकों की सीमेंट कंपनियां चाहती हैं कि वे जल्द से जल्द अपने स्टॉक को खाली करें। मांग में कमी से बिक्री तो घटी ही है, साथ ही कीमतों पर भी असर पड़ रहा है।’
हाल ही में एसीसी ने 24 लाख टन वाली हिमाचल इकाई को बंद किया था और इंडिया सीमेंट्स अपनी हिमाचल इकाई को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं कर पाई है। अप्रैल और अक्टूबर के बीच उत्तर भारत के बाजारों में सीमेंट की खपत महज 1 फीसदी ही बढ़ी है।
देश के किसी भी दूसरे हिस्से की तुलना में मुंबई के बाजारों में सीमेंट सबसे अधिक महंगा बिकता है। फिलहाल शहर के थोक बाजारों में 50 किलो के सीमेंट की बोरी की कीमत करीब 238 रुपये है। कुछ समय पहले तक तो मुंबई में एक बोरी सीमेंट का दाम 258 रुपये के करीब था।
अगर कर को छोड़ दिया जाए तो श्री सीमेंट की एक बोरी 160 रुपये की होती है। बांगुर ने बताया, ‘मुंबई में सीमेंट की बोरियों में अधिकतम खुदरा मूल्य 235 रुपये लिखा होता है जबकि, उत्तरी भारत के बाजारों में हर बोरी की एमआरपी 210 से 220 रुपये के बीच होती है।’
उन्होंने यह भी साफ किया कि कंपनी मुंबई में केवल एक या दो जगहों पर ही सीमेंट बेच रही है। चूंकि श्री की मुंबई में कोई विक्रता नेटवर्क तैयार करने की नहीं है, इस वजह से विश्लेषकों का मनना है कि कंपनी को अपना माल बेचने के लिए संस्थागत खरीदरों की तलाश करनी होगी।
मौजूदा समय में रिटले बिक्री के भरोसे रहना आसान नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि माल ढुलाई पर अधिक खर्च करने के बाद भी कंपनियां मुंबई के बाजारों में मुनाफा कमा सकेंगी और यही वजह है कि वे इन बाजारों में आई हैं।