मुंबई की कंपनी सुरक्षा एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी ने जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई है। जेआईएल जयप्रकाश एसोसिएट्स की खास उद्देश्य वाली कंपनी (एसपीवी) है, जिसे यमुना एक्सप्रेसवे बनाने के लिए गठित किया गया था। मगर यह कंपनी अपना कर्ज नहीं चुका सकी।
कंपनी जब 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुका पाई और घर खरीदारों के लिए समय पर मकान भी नहीं बना पाई तो 2017 में इसे ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता 2016 के तहत कर्ज समाधान के लिए भेजा गया। तब से कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया मुकदमेबाजी में अटकी हुई है।
बैंकिंग क्षेत्र के एक सूत्र के मुताबिक बोली के चौथे चरण में सुरक्षा एआरसी ने ऋणदाताओं को 6,984 करोड़ रुपये की पेशकश की है, जबकि सरकार के स्वामित्व वाली एनबीसीसी ने 4,873 करोड़ रुपये की पेशकश की। इससे पलड़ा सुरक्षा की तरफ झुक गया है।
मुंबई के उद्यमी और सन फार्मास्यूटिकल्स के कार्यकारी निदेशक सुधीर वालिया द्वारा प्रवर्तित सुरक्षा एआरसी ने 125 करोड़ रुपये पेशगी देने का भी प्रस्ताव रखा है। इस रकम का इस्तेमाल निर्माणाधीन रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा करने में किया जाएगा। समाधान योजना के मुताबिक सुरक्षा पेशकश मंजूर होने के 90 दिन के भीतर 3,000 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी लगाएगी, जिससे अटकी हुई रियल्टी परियोजनाएं पूरी की जाएंगी।