अधिक महंगाई के साथ-साथ वित्त वर्ष 21 की तीसरी तिमाही, जब वृद्धि दर अधिक थी, के आधार के प्रभाव की वजह से पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही) में दैनिक उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) की ग्रामीण मांग कमजोर रही है। अनिश्चित मॉनसून, जिसने खरीफ फसल को प्रभावित किया है (कृषि आय पर संभावित असर) और कोरोनावायरस का संक्रमण भी कुछ अन्य कारणों में शामिल रहा है।
अदाणी विल्मर के मुख्य कार्याधिकारी अंगशु मलिक ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया ‘ग्रामीण क्षेत्रों में मांग धीमी रही है, क्योंकि शहर से गांव में धन का प्रत्यावर्तन नहीं हुआ है। इसके अलावा कोविड के मनोवैज्ञानिक प्रभाव ने भी ग्रामीण भारत में व्यय को नुकसान पहुंचाया है, जिससे वस्तुओं की अधिक कीमतों के साथ-साथ संभवत: ग्रामीण मांग पर भी असर पड़ा होगा।’
उनका अनुमान है कि ग्रामीण बिक्री पिछले साल की समान अवधि की तुलना में आठ से 10 प्रतिशत तक कम होगी। मलिक के विचार से खरीफ फसल की कटाई के बाद ग्रामीण मांग बेहतर रहती है, जो इस बार नहीं देखी गई।
इसी प्रकार एक वरिष्ठ बीमा अधिकारी ने कहा कि देश के पश्चिमी हिस्सों में बेमौसम बारिश के कारण इस खरीफ सीजन में फसल बीमा के दावों में इजाफा हुआ है। अधिकारी ने कहा कि दावों की राशि मूल्य-वार भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन मात्रा के लिहाज से निश्चित रूप से पिछले साल की तुलना में इसके प्रतिशत में खासा इजाफा रहा। उन्होंने यह भी कहा कि बेमोसमी बारिश की वजह से फसल क्षति हुई है। पारले प्रोडक्ट्स के श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा कि पिछले साल ग्रामीण मांग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई, जिसकी वजह से आधार ज्यादा रहा। शाह ने कहा कि ग्रामीण वृद्धि पिछले साल की तुलना में कम है।
खुदरा उद्योग पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी सीजन का भी असर पड़ा है। खुदरा सूचना प्लेटफॉर्म बिजोम के मुख्य अधिकारी (वृद्धि और अंतर्दृष्टि) अक्षय डिसूजा ने कहा कि अक्टूबर में एफएमसीजी की बिक्री में शहरी और ग्रामीण भारत दोनों में ही मासिक आधार पर स्थिर वृद्धि (मध्य-एकल अंक) देखी गई, क्योंकि दीवाली के लिए किराना का स्टॉक किया गया था। नवंबर में दीवाली के अधिक स्टॉक की वजह से ग्रामीण बिक्री में गिरावट आई।
हालांकि उन्होंने कहा कि अनिश्चित बारिश (विशेषकर सितंबर के बाद से) का संभावित प्रभाव एक बड़ी चिंता हो सकता है, जिससे फसल को नुकसान और आय (किसानों की) प्रभावित होती है।