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रिटेलरों ने मोड़ा वस्त्र उद्योग से मुंह

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Last Updated- December 08, 2022 | 11:03 AM IST

मंदी का असर अब वस्त्र निर्माताओं के जी का जंजाल बन रहा है। क्रिसमस और नए साल जैसे मौकों पर भी रिटेलरों की ओर से वस्त्र निर्माताओं को आपूर्ति में कटौती करने की मांग की गई है।


मांग में मंदी की वजह से रिटेल कंपनियां बाजार में पहले के मुकाबले बिक्री को बरकरार नहीं रख पाई हैं, जिस वजह से कंपनियों ने वस्त्र निर्माताओं को 15 प्रतिशत तक आपूर्ति को कम करने के लिए कहा है।

वैश्विक मंदी ग्राहकों की जेब चट करने में लगी हुई हो और वस्त्रों के लिए मांग कम हो रही है, इसलिए वस्त्र निर्माताओं की ऑर्डर बुक में कमी बरकरार है।

करोना निटवेयर के निदेशक और दक्षिण भारत होजरी विनिर्माता संघ के अध्यक्ष स्वामीनाथन के मुताबिक अभी तक दिसंबर में वस्त्रों की आपूर्ति 50,000 वस्त्र रही है, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह 1 लाख थी।

इटली, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों को वस्त्रों की आपूर्ति करने वाले स्वामीनाथन का कहना है, ‘ग्राहकों की खरीद की क्षमता में कमी आने की वजह से हमें नमूनों की कोई मांग भी देखने को नहीं मिली है।’

भारत के वस्त्र निर्माता संघ (सीएमएआई) के सचिव पी चंद्रशेखर का कहना है कि देशभर में निर्माताओं ने रिटेलरों जैसे फ्यूचर समूह, शॉपर्स स्टॉप, ग्लोबस और रिलायंस को वस्त्रों की कुल आपूर्ति में 15 प्रतिशत की कमी कर दी है।

चंद्रशेखर का कहना है, ‘बड़ी-बड़ी रिटेल कंपनियों के पास स्टॉक इकट्ठा होना शुरू हो गया था, इसलिए हमारे सदस्यों को उनको की जाने वाली आपूर्ति में कटौती करनी पड़ी है। रिटेल बिक्री पर बाद में काफी ज्यादा असर पड़ने लगा था, इसलिए आपूर्ति में कटौती की गई है।’

क्रिसिल के सलाहकार सुनील पारेख का कहना है, ‘टेक्सटाइल उद्योग में घरेलू मांग 14 प्रतिशत तक कम हो गई है, जबकि निर्यात पर 40 प्रतिशत की तेज मार पड़ी है।

क्रिसमस का वक्त आमतौर पर रिटेलरों के लिए काफी जबरदस्त होता है, लेकिन यहां मांग में काफी कमी है। नवंबर में अमेरिका में ही लगभग 5,35,000 कर्मचारियों की छंटनी हो चुकी है, जिसका भारतीय निर्यात पर असर पड़ा है।’

गुजरात वस्त्र निर्माता संघ (जीजीएमए) के उपाध्यक्ष विजय पुरोहित का कहना है, ‘पैंटालून, विशाल मेगामार्ट और रिलायंस सरीखे रिटेलरों को की जाने वाली आपूर्ति में कमी आ गई है और इसलिए हमने गर्मियों के लिए बेहतर नमूने तैयार करने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।’

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First Published - December 24, 2008 | 11:31 PM IST

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