मैडिसन ऐंड पाइक के सह-संस्थापक नितिन चड्ढा ने बढ़ते कमीशन से थककर जोमैटो और स्विगी के साथ करार खत्म कर दिया। जब गुरुग्राम के इस कैफे ने पांच साल पहले इन फूड एग्रीगेटर के साथ करार किया था तब ये करीब 12 फीसदी कमीशन लेती थीं। चड्ढा ने बताया, ‘2019 में कमीशन बढ़कर 20 फीसदी से अधिक हो गया और उसके अगले साल 25 फीसदी। तब हमने करार तोड़ने का फैसला किया क्योंकि इतना कमीशन चुकाकर कारोबार करना संभव नहीं था।’
इसके बजाय मैडिसन ऐंड पाइक ने मुंबई की स्टार्टअप थ्राइव का रुख किया, जो रेस्तरां को महज 3 से 5 फीसदी कमीशन पर थर्ड पार्टी डिलिवरी सेवा मुहैया कराती है। यह कमीशन स्विगी और जोमैटो से बहुत ही कम है। गुरुग्राम की डॉटपे ने भी ऐसा ही किया। डॉटपे भी फूड एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म है, जिस पर स्विगी और जोमैटो के ऊंचे कमीशन से नाखुश रेस्तरां आ रहे हैं।
एक और बात इन थ्राइव और डॉटपे के पक्ष में काम कर रही है। वह है – अपने ग्राहकों का विवरण और डिलिवरी पहुंचाने की लागत रेस्तरां के साथ साझा करती हैं। इसके अलावा वे रेस्तरां को यह चुनने का विकल्प भी देती हैं कि वे भोजन खुद पहुंचाना चाहेंगे या थर्ड पार्टी के जरिये भिजवाएंगे।
थ्राइव की शुरुआत 2020 में हुई थी। कंपनी का कहना है कि उसने 12,000 से अधिक रेस्तरां अपने साथ जोड़ लिए हैं और वह 95 शहरों में काम कर रही है। मगर वह जोमैटो से काफी पीछे है, जिसने वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में 2.08 लाख रेस्तरां अपने साथ होने का दावा किया था। डॉटपे ने लिंक्डइन पर ब्योरा दिया है कि 2020 में अपनी शुरुआत के एक साल के भीतर यह 30,000 से अधिक रेस्तरां एवं फूड कोर्ट को सेवा दे रही थी। डॉटपे डिजिटल ऑर्डर, भुगतान और खाने की डिलिवरी के क्षेत्र में काम करती है।
थ्राइव का परिचालन करने वाली हैशटैग लॉयल्टी के सह-संस्थापक ध्रुव दीवान ने कहा, ‘अगर कोई रेस्तरां अपने प्रचार के लिए विज्ञापन देता है तो स्विगी और जोमैटो ऊंची फीस वसूलते हैं।’ इस नए एग्रीगेटर के साथ जुबिलैंट फूडवर्क्स है, जो भारत में डॉमिनोज पिज्जा चलाती है। जुबिलैंट ने जुलाई में भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग को भेजे एक पत्र में कहा कि अगर स्विगी और जोमैटो अपना कमीशन बढ़ाती हैं तो वह अपना कुछ कारोबार इन प्लेटफॉर्मों से हटा सकती है। जुबिलैंट फूडवर्क्स के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य वित्त अधिकारी आशीष गोयनका ने पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित करते समय कहा था कि इस कार्यक्रम के दोहरे फायदे हैं- ग्राहक बार-बार खरीदेंगे और नए ग्राहक भी आकर्षित होंगे। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जोमैट और स्विगी को नए प्लेटफॉर्मों से मिल रही टक्कर और सीसीआई की जांच के बारे में सवाल भेजे मगर खबर लिखने तक उनका जवाब नहीं मिला।