रेमडेसिविर की उत्पादन क्षमता तिगुना बढ़ी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 2:06 AM IST

कोविड-19 के उपचार में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख एंटीवायरल इंजेक्टेबल दवा रेमडेसिविर की उत्पादन क्षमता पिछले कुछ महीनों के दौरान तीन गुना से अधिक बढ़कर जून में 1.22 करोड़ शीशी प्रति महीना तक पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर एक इन्वेंट्री अथवा बफर स्टॉक तैयार करने की भी कोशिश कर रही है। अप्रैल से मई की अवधि में वैश्विक महामारी की दूसरी लहर के दौरान इस दवा की भारी किल्लत हो गई थी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राज्य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि भारतीय औषधि महानियंत्रक ने रेमडेसिविर के उत्पादन के लिए लाइसेंस प्राप्त विनिर्माताओं की 40 नई विनिर्माण इकाइयों को त्वरित मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा, ‘इससे रेमडेसिविर की विनिर्माण इकाइयों की संख्या बढ़कर 62 हो चुकी है जो मध्य अप्रैल में 22 थी। रेमडेसिविर की घरेलू उत्पादन क्षमता मध्य अप्रैल में 38 लाख शीशी प्रति महीना थी जो बढ़कर जून में 1.22 करोड़ शीशी प्रति महीना से अधिक हो चुकी है।’
मंत्री ने राज्य सभा में कहा कि देश में विनिर्मित दवाओं की घरेलू उपलब्धता के पूरक के तौर पर 11 अप्रैल से रेमडेसिविर इंजेक्शन और रेमडेसिविर एपीआई के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। औषधि विभाग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को रेमडेसिविर का स्टॉक उपलब्ध कराने के लिए एक संयुक्त अभ्यास किया।
मंडाविया ने कहा कि राज्यों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की 98 लाख शीशियां आवंटित की गई हैं। इनमें से 97 लाख शीशियों की आपूर्ति 18 जुलाई तक की जा चुकी है। मंत्री ने कहा कि राज्यों को वाणिज्यिक आपूर्ति के अलावा करीब 29 लाख रेमडेसिविर शीशियों की मुफ्त आपूर्ति की गई है।
तीसरी लहर की आशंका से पहले भारत कोविड संबंधी आवश्यक दवाओं की एक सूची बनाने की कोशिश कर रहा है। इसमें रेमडेसिविर और फैविपिराविर के अलावा  पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, विटामिन इत्यादि जैसी सामान्य दवाएं भी शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अचानक संक्रमण के मामलों में तेजी आने पर दवाओं की किल्लत न होने पाए।
उद्योग सूत्रों ने संकेत दिया है कि रेमडेसिविर जैसी प्रमुख दवाओं के लिए कम से कम 30 दिनों की इन्वेंट्री तैयार करने की योजना है। कोविड की दूसरी लहर के दौरान इसकी भारी किल्लत हो गई थी।

सिप्ला का करोपरांत लाभ 25 फीसदी बढ़ा
मुंबई में मुख्यालय वाली दवा कंपनी सिप्ला ने जून तिमाही में 24 प्रतिशत की वृद्घि के साथ 715 करोड़ रुपये का करोपरांत लाभ (पीएटी) दर्ज किया। भारतीय व्यवसाय में मजबूत राजस्व वृद्घि के साथ साथ ऐक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रिडिएंट्स (एपीआई) व्यवसायों में तेजी की वजह से कंपनी को मुनाफा वृद्घि में मदद मिली है। तिमाही के दौरान परिचालन से कंपनी की आय सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़कर 5,504 करोड़ रुपये रही। एबिटा सालाना आधार पर 28 प्रतिशत तक बढ़कर 1,346 करोड़ रुपये रहा। भारत में कंपनी का व्यवसाय 68 प्रतिशत तक बढ़कर 2,8710 करोड़ रुपये पर पहुंच गया और उसे क्रोनिक थेरेपी खंड में वृद्घि के साथ सिप्ला के कोविड-19 पोर्टफोलियो से मदद मिली।
सिप्ला ने कहा है कि कंपनी के ट्रेड जेनेरिक्स व्यवसाय ने भी मजबूत ऑर्डर प्रवाह दर्ज किया और उसे कोविड संबंधित उत्पादों के लिए बढ़ती मांग का लाभ मिला। सिप्ला के प्रबंध निदेशक एवं वैश्विक मुख्य कार्याधिकारी उमंग वोहरा ने प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘अपने सभी ब्रांडेड बाजारों में कोर थेरेपीज में अच्छी मांग और लगातार लागत नियंत्रण उपायों को देखते हुए मैं बेहद उत्साहित हूं, क्योंकि इससे जून तिमाही में राजस्व वृद्घि को मदद मिली।’     बीएस

कोवैक्सीन को हंगरी में प्रमाण पत्र
भारत बायोटेक के कोविड-19 टीके को हंगरी में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (जीएमपी) अनुपालन प्रमाण पत्र मिला है। टीका विनिर्माता ने ेगुरुवार को ट्विटर पर यह जानकारी दी। कंपनी ने एक ट्वीट में कहा, हमने एक और मुकाम हासिल किया है, कोवैक्सीन को हंगरी में जीएमपी प्रमाण पत्र दिया गया। यह यूरोपीय नियामकों से भारत बायोटेक को मिला पहला अनुपालन प्रमाणपत्र है। एक नोट में कहा गया कि हंगरी के नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी ऐंड न्यूट्रिशन ने कोवैक्सीन के विनिर्माण के लिए जीएमपी प्रमाणपत्र दिया है।     भाषा

First Published : August 6, 2021 | 12:24 AM IST