सरकारी तेल रिफाइनरियां 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली पाक्षिक अवधि में उम्मीद है कि पेट्रोल, डीजल, कुकिंग गैस और मिट्टी के तेल की रोजाना बिक्री पर मुनाफा दर्ज करें।
इस महीने के पहले 15 दिनों के मुकाबले कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 3 प्रतिशत कम हुई है और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में 3.2 प्रतिशत के इजाफे का असर रिफाइनियों को होने वाले नुकसान पर जरूर देखने को मिलेगा।
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) 31 दिसंबर, 2008 को समाप्त होने वाली तीसरी तिमाही में कुल मुनाफे में कमी दर्ज कर सकती हैं ।
क्योंकि उनकी रिफाइनरियों के मार्जिनों में कमी आई है और कच्चे तेल की उतार-चढ़ाव से भरी कीमतों के कारण उन्हें अधिक स्टॉक इकट्ठा होने की वजह से नुकसान हो रहा है।
दिसंबर के अंतिम 15 दिनों में इन तीन कंपनियों को पेट्रोल और डीजल में अधिक मुनाफा होने की उम्मीद है और कुकिंग गैस और मिट्टी के तेल पर नुकसान में कमी हो सकती है।
इंडियन ऑयल को दिसंबर की पहली पाक्षिक अवधि में रोजाना 6 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था जो 5 दिसंबर को ईंधन की कीमतों में कटौती से पहले 25 करोड़ रुपये था।
दिसंबर के शुरुआती 15 दिनों में कंपनी को हर लीटर पेट्रोल की बिक्री पर 11.48 रुपये और डीजल की बिक्री पर 2.92 रुपये का मुनाफा हुआ है। कंपनी को इस अवधि में हर लीटर मिट्टी के तेल पर 17.26 रुपये और कुकिंग गैस के सिलेंडर पर 148 रुपये का नुकसान हुआ है।
तीनों कंपनियों को मिलाकर दिसंबर की पहली पाक्षिक अवधि में उसे ईंधन की बिक्री पर लगभग 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आईओसी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है, ‘शुध्द आधार पर मिट्टी के तेल और डीजल पर होने वाले नुकसान के मुकाबले पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर अधिक फायदे होने पर हमारे रोज मुनाफा कमाने की उम्मीद है।’
कीमतों के लगभग 70 प्रतिशत तक घटने के बाद से इन तीन कपंनियों का घाटा कम हो कर इस साल के लिए 1,10,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। मुंबई के एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘तेल कीमतें गिरी हैं, लेकिन रुपये की कीमत में गिरावट जारी है, जिससे तेल की कम कीमतों का असर काफी कम हो जाता है।’
आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल की तेल कीमतों में गिरावट के बावजूद मिट्टी के तेल और कुकिंग गैस की बिक्री पर आगे भी नुकसान होने की उम्मीद है।
आईओसी के एक अन्य अधिकारी का कहना है, ‘दुनियाभर में कोई भी 9 रुपये प्रति लीटर की दर पर कोई भी मिट्टी का तेल नहीं बेच रहा। इस पर हमें मुनाफा हो, इसके लिए तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट जरूरी है।’
एचपीसीएल के एक अधिकारी का कहना है, ‘चौथी तिमाही कुछ बेहतर रहेगी, लेकिन तीसरी तिमाही में हमें नुकसान हो सकता है।’ इस साल अप्रैल से सितंबर अवधि के बीच तीनों कंपनियों का नुकसान लगभग 14,431 करोड़ रुपये था।