पंजाब के मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से राज्य पर ज्यादा बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
लेकिन इस दावे के विपरीत न सिर्फ निर्यात आधारित उद्योग को मौजूदा हालात से तगड़ा झटका लगा है बल्कि इससे जुड़े श्रमिक भी इस मंदी की तपिश में झुलस रहे हैं। जालंधर जिले में इस उद्योग के 40 हजार से अधिक श्रमिक उत्पादन में भारी कटौती के कारण अपनी नौकरियां खो चुके हैं।
इस शहर में मुख्यत: दो तरह के उद्योग हैं। एक खेल उद्योग और दूसरा हैंड टूल जैसे इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्माण से जुड़ा उद्योग। सूत्रों का कहना है कि हालांकि खेल उत्पाद निर्माण उद्योग कुटीर उद्योग के तहत पड़ता है और इसमें 1.25 लाख से अधिक श्रमिक काम करते हैं,
लेकिन अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार दोनों से मिलने वाले ठेकों में आई भारी कमी से तकरीबन 25,000 मजदूर बेरोजगार हो चुके हैं। हालांकि खेल उत्पादों के एक बड़े हिस्से का निर्यात किया जाता रहा है, लेकिन वैश्विक मंदी ने इस पर ग्रहण लगा दिया है।
खेल उत्पादों के एक प्रमुख निर्यातक ने कहा, ‘निर्यातकों ने मई और जून में जो ऑर्डर बुक किए थे, उन्हें जनवरी तक के लिए टाल दिया गया और अब इन्हें रोक दिया गया है। इस वजह से निर्माताओं या निर्यातकों के पास बड़ी मात्रा में उत्पादों का अंबार लगा हुआ है और नए ठेकों के नहीं मिलने के कारण उन्हें उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है।’
स्पोट्र्स गुड्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के क्षेत्रीय निदेशक राणा रघुनाघ सिंह कहते हैं, ‘मई में जालंधर से खेल उत्पादों का निर्यात घट कर 49.1 करोड़ रुपये, जून में 46.7 करोड़ रुपये, जुलाई में 44.6 करोड़ रुपये और अगस्त में यह घट कर 36.4 करोड़ रुपये रह गया। अगस्त के बाद के महीनों का आंकड़ा जुटाया जाना अभी बाकी है, लेकिन यह गिरावट तकरीबन 15-20 फीसदी होगी।’
इंजीनियरिंग उत्पाद निर्माण उद्योग में भी स्थिति इससे कुछ अलग नहीं है। इस साल अंतरराष्ट्रीय मेलों, जहां हैंड टूल निर्माता अंतरराष्ट्रीय ठेके हासिल करते हैं, से ज्यादातर उद्यमी खाली हाथ लौटे।
इस वजह से उन्हें उत्पादन में कमी लानी पड़ी और इसकी मार श्रमिकों पर पड़ी। उत्पादन में भारी कटौती किए जाने से तकरीबन 15,000 श्रमिक अपनी रोजी-रोटी गंवा चुके हैं।
इंजीनियरिंग गुड्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सहायक निदेशक ओपिंदर सिंह ने खुलासा किया कि मंदी के कारण इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात में 40-45 फीसदी की कमी आई है। उन्होंने कहा कि हैंड टूल उत्पादन, जो प्रमुख रोजगार प्रदाता उद्योग है, के निर्यात में 30-50 फीसदी तक की गिरावट आई है।
फेडरेशन ऑफ जालंधर इंडस्ट्रियल ऐंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरशरण सिंह कहते हैं कि पिछले कुछ दिनों में हैंड टूल्स में तकरीबन 10 हजार श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं।
अगर स्थिति कुछ अन्य कारकों की वजह से और अधिक खराब होती है तो और श्रमिकों को अपनी रोजी-रोटी से हाथ धोना पड़ेगा।
उद्योग के सूत्रों ने खुलासा किया है कि ऐसे कर्मचारियों की तादाद काफी अधिक है जिन्हें संयंत्र मालिकों की नामावली में नहीं रखा गया है और उनकी छंटनी को कागजों में नहीं दिखाया गया है।
उद्योग नगर मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन, गदईपुर के अध्यक्ष तेजिंदर सिंह भसीन ने बताया कि यहां पाइप फिटिंग, गन मेटल, स्कैफोल्डिंग से जुड़ी तकरीबन 200 इकाइयां मौजूद हैं।
इन इकाइयों में लगभग 5,000 से 7000 श्रमिक अपनी नौकरियां खो चुके हैं। ये श्रमिक इस इलाके में कुल कामगारों की संख्या का 50 फीसदी हैं।