टीवी, फ्रिज, एयर कंडीशनर जैसे उपकरण बनाने वाली कंज्यूमर डयूरेबल्स कंपनियों के लिए 2008 उतार चढ़ाव भरा रहा।
बस, फर्क यही रहा कि साल के शुरुआत में चढ़ाव आया और उसके बाद ऐसा उतार आया कि बिक्री के आंकड़े ही बिगड़ गए। डॉलर के सस्ते होने से फायदा उठाने वाली कंपनियों को मंदी की तगड़ी मार झेलनी पड़ी।
हालांकि इनमें से ज्यादातर कंपनियां अगले साल अच्छे कारोबार की उम्मीद लगा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत को वे भी स्वीकार कर रही हैं।
इस बाजार की दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, गोदरेज ऐंड बॉयस तथा फिलिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स ने बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में माना कि आने वाले साल में डगर मुश्किल है।
गोदरेज के मार्केटिंग प्रमुख कमल नंदी ने कहा, ‘बाजार नए तरीके से तलाशनी पड़ेगी और कीमत पर ध्यान देना होगा। यह तय है कि एयरकंडीशनर, माइक्रोवेव जैसे उपकरणों का बाजार ठंडा रहेगा। इसके अलावा पुराने उपकरण को बदलकर नया उपकरण लेने से भी ग्राहक बचेंगे।’
कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी जॉर्ज मेनेजेज के मुताबिक उत्पादन में कटौती का दौर लंबा चलेगा और यह अगले साल भी खिंचेगा।
फिलिप्स इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मुख्य मार्केटिंग अधिकारी विवेक शर्मा भी मानते हैं कि मांग कम होने की वजह से कंपनियां अगले साल उत्पादन धीमा रखेंगी। इसलिए कारोबार में इजाफे की दर भी सुस्त होगी।
अलबत्ता सैमसंग के उप प्रबंध निदेशक रवींद्र जुत्शी और एलजी के प्रबंध निदेशक मून बी शिन 2009 में उत्पादन में कटौती की संभावना से इनकार करते हैं। लेकिन ग्राहकों को बुलाना उन्हें भी चुनौती लगता है। उनका साफ मानना है कि ग्राहकों के लिए अगले साल छोटे शहरों का मोहताज होना पड़ेगा।
नंदी भी यही मानते हैं। उनके मुताबिक कंपनियों को नए बाजार तलाशने पड़ेंगे और प्रीमियम उत्पादों की मांग मंदी के चलते कम ही होगी।?कम कीमत वाले अच्छे उत्पादों का बोलबाला रहेगा।
मंदी, लागत और नकदी की कमी से सभी परेशान हैं, लेकिन छंटनी की संभावना पर कंपनियां फिलहाल कुछ नहीं बोल रहीं। मून के मुताबिक एलजी में निकट भविष्य में छंटनी नहीं होगी और सैमसंग की ओर से जुत्शी का भी यही मानना है कि कर्मचारियों की वजह से लागत का बोझ नहीं बढ़ रहा है।