निजी इक्विटी कंपनी सिल्वर लेक रिलायंस रिटेल वेंचर्स (आरआरवीएल) में 7,500 करोड़ रुपये निवेश करेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने बुधवार को बताया कि सिल्वर लेक इस निवेश के बदले आरआवीएल में 1.75 प्रतिशत हिस्सा खरीदेगी। पीई कंपनी ने आरआरवीएल का मूल्यांकन 4.2 लाख करोड़ रुपये मानते हुए यह निवेश करने की घोषणा की है।
आरआईएल समूह में सिल्वर लेक का यह दूसरा निवेश है। यह पीई कंपनी जियो प्लेटफॉम्र्स मेंं 10,202 करोड़ रुपये निवेश कर चुकी है। सोमवार को इस पीई कंपनी ने शिक्षा-तकनीकी क्षेत्र की कंपनी बैजूज में भी निवेश किया था। रिलायंस रिटेल में सिल्वर लेक के निवेश के बाद एक अन्य पीई कंपनी केकेआर सहित दूसरी कंपनियां भी आरआईएल की खुदरा कंपनी में निवेश कर चुकी हैं। केकेआर ने जियो प्लेटफॉर्म में भी निवेश किया है। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि केकेआर देश की सबसे बड़ी खुदरा कंपनी रिलायंस रिटेल में हिस्सेदारी खरीदना चाहती है और इसके लिए वह 11,250 करोड़ रुपये तक का दांव लगा सकती है।
फ्यूचर समूह के अधिग्रहण के बाद रिलायंस रिटेल ने जियो प्लेटफॉम्र्स के निवेशकों को भी निवेश का विकल्प दिया था। इस पूरे मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा कि रिलायंस रिटेल अपना मूल्यांकन बढ़ाने के लिए दूसरे निवेशकों को भी साथ लाना चाहती है। आबु धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और मुबाडाला भी कंपनी में निवेश कर सकती है। हालांकि रिलायंस के प्रवक्ता ने इसे कयास बता कुछ कहने से इनकार कर दिया।
प्रवक्ता ने कहा,’हम मीडिया एवं बाजार में लगने वाली अटकलों पर टिप्पणी नहीं करते हैं। हमारी कंपनी विभिन्न अवसरों की तलाश करती रहती है। सेबी की शर्तों के तहत हमने सभी बातें साझा की हैं और आगे भी आवश्यक जानकारियां देते रहेंगे।’ हालांकि सूत्रों नेे यह भी बताया कि रिलायंस रिटेल करीब 25 से 30 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट इक्विटी कंपनियों और फेसबुक, गूगल और इंटेल जैसी तकनीक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को बेच सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज दूरसंचार और खुदरा क्षेत्र को भारत में निवेश के लिए प्रमुख क्षेत्रों के तौर पर पेश कर रही है।
आरआईएल के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जुलाई में कंपनी की सालाना आम बैठक में कहा था कि जियो और खुदरा कारोबार आरआईएल के समेकित कर एवं ब्याज पूर्व आय में 35 प्रतिशत तक योगदान देते हैं। रिलायंस अप्रैल और जून के बीच जियो प्लेटफॉम्र्स में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी 1.2 लाख करोड़ रुपये में 14 निवेशकों को बेच चुकी है। इस तरह, लॉकडाउन जैसे प्रतिकूल हालात में भी कंपनी इतने बड़े पैमाने पर रकम जुटाने वाली अकेली कंपनी रही। अंबानी ने सालाना आम बैठक में कहा था, ‘अगली कुछ तिमाहियों में हम रिलायंस रिटेल में वैश्विक साझेदारों और निवेशकों को शामिल करेंगे।’ उन्होंने यह भी कहा था कि उनकी कंपनी जियोमार्ट को भी आगे बढ़ा रही है।