सुपर ऐप की सफलता पर कंपनियों की राय जुदा-जुदा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 8:06 PM IST

ग्राहकों तक पहुंचने का सबसे बेहतर तरीका कौन सा है, इस पर कंपनी जगत की राय बंटी हुई है। मतभेद इस पर कि विभिन्न श्रेणियों को एक साथ लाने वाले सुपर ऐप बनाए जाएं या अलग-अलग सेवाओं तथा सुविधाओं के लिए अलग-अलग ऐप रखते हुए इस्तेमाल में सहूलियत पर जोर दिया जाए।
टाटा समूह ने अपना सुपर ऐप टाटा न्यू कल पेश किया था। पेटीएम ने भी यही तरीका अपनाया था, लेकिन देश की दिग्गज दूरसंचार कंपनी एयरटेल ने अलग-अलग ऐप का मॉडल अपनाया है। टाटा न्यू यात्रा और किराना से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल में ठहरने, आभूषण, वित्तीय सेवाएं आदि बहुत सी सेवाएं मुहैया कराएगा। इसके पास 12 करोड़ ग्राहक होंगे और सभी डिजिटल परिसंपत्तियों में 8 करोड़ ऐप डाउनलोड होंगे।
दूसरी तरफ भारती एयरटेल के तीन डिजिटल प्लेटफॉर्म- विंक म्यूजिक, एयरटेल थैंक्स और एयरटेल एक्सट्रीम पर पहले ही 18.4 करोड़ सक्रिय मासिक उपयोगकर्ता हैं। एयरटेल थैंक्स का इस्तेमाल मोबाइल एवं ब्रॉडबैंड कनेक्शन के प्रबंधन एवं भुगतान में किया जाता है। एयरटेल एक्सट्रीम ओटीटी प्लेटफॉर्म है, जो फिल्म एवं अन्य सामग्री मुहैया कराता है। इसके प्रीमियम वर्जन को अपनी शुरुआत के पहले ही महीने में 6 लाख भुगतान वाले ग्राहक मिल चुके हैं।
चीन में मैसेंजर सेवा वीचैट की भारी सफलता के बाद सुपर ऐप पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं। चीन की 83 फीसदी आबादी हवाई टिकट खरीदने, बिल भुगतान, राइड शेयरिंग जैसी सेवाओं में वीचैट का इस्तेमाल कर रही है। सुपर ऐप एशिया में लोकप्रिय हैं। उदाहरण के लिए चीन में अलीपे, सिंगापुर में कार हेलिंग कंपनी ग्रैब या दक्षिण कोरिया में सर्च इंजन नेवर। लेकिन पश्चिम में सुपरऐप लोकप्रिय नहीं हुए हैं।
एयरटेल के अधिकारियों ने कहा कि सुपरऐप चीन जैसे अत्यधिक नियंत्रित बाजारों में काम करते हैं, जहां वैश्विक कंपनियों को आने की मंजूरी नहीं है और ग्राहकों के पास सीमित विकल्प हैं। उनका कहना है कि इन्हें भारत जैसे देश में सफल बनाना मुश्किल है। कंपनी के अधिकारी ने कहा था कि मार्केटिंग का एक तर्क सुपर ऐप के खिलाफ काम करता है। उन्होंने कहा था, ‘मार्केटिंग गुरु जैक ट्रोट ने अपनी पुस्तक ‘पोजिशनिंग’ में कहा था कि कोई ब्रांड एक चीज के लिए ग्राहक के दिमाग में रहता है। इसलिए स्पॉटीफाई का मतलब संगीत है। अगर ये मैसेजिंग या भुगतान में भी होते तो ये इस मुकाम पर नहीं होते।’ सलाहकार कंपनी टेक्नोपैक में उपभोक्ता, खाद्य एवं खुदरा कारोबार के अगुआ वरिष्ठ साझेदार अंकुर बिसेन ने कहा, ‘इस बारे में दुनिया में कोई नजीर नहीं है कि सुपरऐप सफल होंगे या नहीं। केवल चीन अपवाद है, जो बंद बाजार है। लेकिन यह बड़ी कंपनियों का क्लब होगा और इसे निवेश में सक्षम टाटा एवं रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियां सफल बना सकती हैं।’

First Published : April 8, 2022 | 11:15 PM IST