महंगाई के समय में भी सब्सिडी पर तेल बेचने के कारण लगातार तीन तिमाहियों से जबरदस्त नुकसान झेल रही तेल मार्केटिंग कंपनियों को सरकार से अधिक तेल बॉन्ड्स की दरकार है।
अधिकारियों ने बताया कि सब्सिडी पर पेट्रोल और डीजल बेचने के कारण इन कंपनियों को लगभग 110,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। अगर सरकार इन कंपनियों को और बॉन्ड जारी किए बगैर कीमतों में और कटौती करने को कहेगी तो इन कंपनियों का घाटा कई गुना बढ़ सकता है।
फिलहाल पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और एलपीजी पर दी जा रही सब्सिडी से होने वाले घाटे को तेल उत्खनन, तेल मार्के टिंग कंपनी और सरकार तेल बॉन्ड्स के जरिए बांटते हैं। हाल ही में वित्त मंत्री पी चिदंबरम्ब ने घोषणा की थी कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम घटते-बढ़ते रहे तो सरकार कंपनियों को और बॉन्ड जारी नहीं करेगी।
पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव आर एस पांडेय ने बताया, ‘अभी तक इस घाटे में सरकार की हिस्सेदारी 50 फीसदी, तेल उत्खनन कंपनी की हिस्सेदारी 30 फीसदी है और बाकी का घाटा तेल मार्केटिंग कंपनियां झेलती हैं। हो सकता है इस साल यह गणित बदल जाए। हम इस बारे में विचार कर रहे हैं।’
तेल बॉन्ड्स की कमी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल मार्केटिंग और ओएनजीसी, ऑयल इंडिया लिमिटेड और गेल इंडिया जैसी उत्खनन कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
देश की सबसे बड़ी तेल मार्के टिंग कंपनी आईओसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सार्थक बेहुरिया ने क हा, ‘इस साल हम सब्सिडी का बोझ ढोने की हालत में नहीं है।’ जुलाई-सितंबर को समाप्त हुई तिमाही में आईओसी को लगभग 7,047 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही के दौरान कंपनी को 3,818 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। चालू वर्ष की पहली छमाही में कंपनी को लगभग 6,632 करोड़ रुपये का घाटा हुआ जबकि पिछले साल की पहली छमाही में कंपनी को 5,286 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।
हालांकि इस महीने की शुरुआत में सरकार ने तीनों तेल मार्केटिंग कंपनियों को लगभग 22,000 करोड़ रुपये के तेल बॉन्ड जारी किए थे। इसमें से आईओसी को ही करीब 11,976 करोड़ रुपये के बॉन्ड मिले थे।
उत्खनन कंपनियों का दर्द
अगर तेल उत्खनन क रने वाली कंपनियों की बात करें तो सब्सिडी से होने वाले नुकसान का 85 फीसदी भार ओएनजीसी अकेले ही उठाती है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद भी कंपनी का शुद्ध मुनाफा 4,808 करोड़ रुपये ही रहा था, जबकि पिछले साल इसी समयावधि में कंपनी का शुद्ध मुनाफा 5,097 करोड़ रुपये था।