प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्र सरकार पेंशन से जुड़े नियमों और प्रक्रियाओं में जरूरत के हिसाब से समय-समय पर बदलाव करती रहेगी। सरकार का मानना है कि समाज की जरूरतें और लोगों की परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं, इसलिए पेंशन व्यवस्था में भी उसी के अनुसार सुधार जरूरी है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि पेंशनभोगियों और इससे संबंधित लोगों से मिलने वाले सुझावों और प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए सरकार पेंशन नियमों की समीक्षा और उनमें सुधार के लिए तैयार है।
जितेंद्र सिंह ने यह बात नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 9वें राष्ट्रीय अनुभव पुरस्कार समारोह और 60वीं सेवानिवृत्ति-पूर्व परामर्श कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। इन दोनों कार्यक्रमों का आयोजन पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने किया था।
मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ सालों में पेंशन व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। इनमें फैमिली पेंशन से जुड़े नियमों में किए गए बदलाव भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों को फैमिली पेंशन का फायदा मिल सके, इसके लिए नियमों में बदलाव किया गया है।
इसके अलावा महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए भी फैमिली पेंशन के नियमों में कुछ मामलों में राहत दी गई है। तय परिस्थितियों में अब महिला कर्मचारी अपने पति की बजाय अपने बच्चों को फैमिली पेंशन के लिए नामित कर सकती हैं।
सरकार के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद परिवार और समाज में बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पेंशन से जुड़े नियमों को ज्यादा उपयोगी और आसान बनाना है।
जितेंद्र सिंह ने सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मौत होने पर परिवार को मिलने वाली बढ़ी हुई फैमिली पेंशन का भी जिक्र किया। केंद्रीय सरकारी पेंशन नियमों के तहत पात्र मामलों में 10 साल तक बढ़ी हुई फैमिली पेंशन आखिरी वेतन की 50 प्रतिशत होती है।
उन्होंने बताया कि पहले यह पेंशन पाने के लिए कर्मचारी का कम से कम सात साल की सेवा पूरी करना जरूरी था। अब सरकार ने यह शर्त हटा दी है। इसका फायदा उन परिवारों को मिलेगा, जिनके कर्मचारी की कम उम्र में या नौकरी के शुरुआती वर्षों में ही सेवा के दौरान मौत हो जाती है।
मंत्री ने कहा कि इस नियम की समीक्षा इसलिए की गई, क्योंकि कम उम्र में कर्मचारी की मौत होने पर परिवार को आर्थिक मदद की ज्यादा जरूरत हो सकती है। सात साल की न्यूनतम सेवा की शर्त हटने के बाद पात्र परिवारों को बढ़ी हुई फैमिली पेंशन पाने के लिए अब यह अवधि पूरी करने की जरूरत नहीं होगी।
Also Read: EPS Pension: 12 महीने में एक बार जरूर करें ये काम, वरना अगले महीने से बंद हो सकता है पेंशन भुगतान
सरकार पेंशन से जुड़े कामकाज को आसान बनाने की दिशा में भी लगातार काम कर रही है। जितेंद्र सिंह के मुताबिक, पेंशन के फॉर्म और पूरी प्रक्रिया को सरल किया गया है, ताकि पेंशनभोगियों को बेवजह की कागजी कार्रवाई न करनी पड़े।
सरकार की कोशिश है कि पेंशन से जुड़ी सेवाएं लोगों के लिए आसान और बेहतर हों। खासकर बुजुर्ग पेंशनभोगियों को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए ज्यादा परेशानी न हो, इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पेंशन से जुड़ी सेवाओं में तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। मंत्री ने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र और चेहरे से पहचान जैसी सुविधाओं का जिक्र किया। इनका मकसद बुजुर्ग पेंशनभोगियों के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को आसान बनाना है।
तकनीक की मदद से पेंशन से जुड़े सरकारी कामों को भी ज्यादा आसान और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे पेंशनभोगियों को राहत मिलने के साथ सरकारी व्यवस्था पर काम का अतिरिक्त बोझ भी कम हो सकता है।
कार्यक्रम के दौरान ‘पेंशन मित्र’ पुस्तिका भी जारी की गई। इसके साथ ही देशभर में चलाए जाने वाले डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र अभियान-5 के दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में बुजुर्ग नागरिकों की कुल संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि भारत की 70 प्रतिशत से ज्यादा आबादी 40 साल से कम उम्र की है, लेकिन इसके बावजूद बुजुर्गों की वास्तविक संख्या भी बढ़ रही है।
ऐसे में बुजुर्गों के कल्याण और उन्हें जरूरी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज में अपना योगदान देते रहें और उन्हें ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े, जिन्हें सरकारी स्तर पर आसानी से दूर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पेंशनभोगियों और दूसरे संबंधित लोगों से मिलने वाले सुझावों और प्रतिक्रिया के आधार पर पेंशन के नियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा आगे भी जारी रहेगी।