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टाटा समूह के नए कारोबार मांग रहे बड़ी पूंजी, सेमीकंडक्टर से एयर इंडिया तक कई लाख करोड़ के निवेश पर नजर

सेमीकंडक्टर, एयर इंडिया और बैटरी जैसे घाटे वाले नए कारोबारों के बड़े विस्तार के लिए टाटा संस अपनी मजबूत नकदी क्षमता पर भरोसा कर रहा है

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सोहिनी दास   
शिवानी शिंदे   
Last Updated- August 17, 2026 | 10:48 PM IST

टाटा समूह भारी पूंजी निवेश वाले एक ऐसे चक्र में प्रवेश कर रहा है जिसका दायरा सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, विमानन, बैटरी, वाहन, स्टील, बिजली, होटल और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) बुनियादी ढांचे तक फैला हुआ है।

यह निवेश कई लाख करोड़ रुपये में है लेकिन घोषित आंकड़ों को सीधे तौर पर जोड़ा नहीं जा सकता। दरअसल इनकी निवेश अवधि अलग-अलग है और कुछ मामलों में सरकारी सब्सिडी, बाहरी इक्विटी एवं ऋण भी शामिल हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि इन सब निवेश के लिए पूंजी कहां से आएगी।

इसका जवाब समूह के भीतर एक स्पष्ट विभाजन को दर्शाता है। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और इंडियन होटल्स जैसी स्थापित सूचीबद्ध कंपनियां मुख्य रूप से आंतरिक नकदी प्रवाह, ऋण, प्रोजेक्ट फाइनैंस और बाहरी निवेशकों के जरिये अपनी विस्तार योजनाओं के लिए रकम जुटाने की तैयारी कर रही हैं।

मगर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया, बैटरी विनिर्माता एग्रेटास और टाटा डिजिटल जैसे समूह के नए कारोबार या तो घाटे में चल रहे हैं या अभी भी अपनी प्रमुख परिसंपत्तियों का निर्माण कर रहे हैं। भले ही सरकारी प्रोत्साहन, सह-निवेशक या परिसंपत्ति के जरिये वित्तपोषण से प्रवर्तक को कुछ राहत मिले लेकिन ये कंपनियां इक्विटी पूंजी के लिए काफी हद तक टाटा संस पर निर्भर रहेंगी।

टाटा संस के पास पर्याप्त वित्तीय क्षमता दिखती है। नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, होल्डिंग कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 को 21,841 करोड़ रुपये की शुद्ध नकदी और बिना किसी ऋण बोझ के अलविदा किया। एक साल पहले उसने 7,137 करोड़ रुपये की शुद्ध नकदी के साथ वित्त वर्ष को अलविदा किया था। सूचीबद्ध कंपनियों में उसका निवेश मार्च 2026 के आखिर में लगभग 11.68 लाख करोड़ रुपये था।

टाटा संस ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान 25,544 करोड़ रुपये का परिचालन नकदी प्रवाह सृजित किया जिसे मुख्य तौर पर 32,528 करोड़ रुपये की लाभांश आय से बल मिला। उसने साल के दौरान सहायक इकाइयों में 15,089 करोड़ रुपये और सहायक कंपनियों एवं संयुक्त उद्यमों में 867 करोड़ रुपये का निवेश किया।

वित्त वर्ष 2025 में टाटा संस ने सहायक इकाइयों में 18,828 करोड़ रुपये और सहायक कंपनियों एवं संयुक्त उद्यमों में 2,779 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इन कारोबार में उसका कुल इक्विटी निवेश दो वर्षों में 37,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया।

इस बीच लाभांश आय में गिरावट दर्ज की गई जो वित्त वर्ष 2025 में 36,149 करोड़ रुपये थी। ऐसे में निवेश से पैसे जुटाने, बाहरी निवेशकों को आकर्षित करने और चरणबद्ध तरीके से पूंजी निवेश की क्षमता काफी अहम हो जाती है क्योंकि कई नए कारोबार को एक साथ पूंजी की दरकार है।

नए कारोबार को घाटा

टाटा संस की चुनौती का अंदाजा उसके चार प्रमुख नए कारोबारों के प्रदर्शन से लगाया जा सकता है। टाटा संस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को वित्त वर्ष 2026 में 1,611 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। इसी प्रकार एयर इंडिया ने 22,238 करोड़ रुपये, टाटा डिजिटल ने 4,974 करोड़ रुपये और एग्रेटास ने 1,101 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया।

इन कंपनियों का एकीकृत घाटा लगभग 30,000 करोड़ रुपये का था। इन कारोबारों को मदद करने की टाटा संस की क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे किस रफ्तार से नकदी की खपत करते हैं, उनके निवेश का समय क्या है और सरकार, रणनीतिक भागीदारों एवं ऋणदाताओं से कितनी पूंजी जुटाई जा सकती है।

सेमीकंडक्टर पर सबसे बड़ा दांव

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स समूह की सबसे बड़ी नई औद्योगिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी गुजरात के धोलेरा में करीब 91,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन कारखाना और 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से असम में एक सेमीकंडक्टर असेंबली एवं परीक्षण इकाई स्थापित कर रही है।

इन परियोजनाओं को सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के तहत केंद्र और राज्य सरकारों से प्रोत्साहन का लाभ मिलेगा। इससे टाटा की परियोजना लागत प्रभावी तौर पर कमी आएगी। मगर इस प्रकार के प्रोत्साहन वास्तव में निवेश एवं परियोजना के पड़ावों से जुड़े होते हैं।

टाटा संस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में उसका निवेश वित्त वर्ष 2026 के अंत में 9,961 करोड़ रुपये था जो एक साल पहले के 6,961 करोड़ रुपये से अधिक है।

समूह ने दोनों सेमीकंडक्टर परियोजनाओं के लिए टाटा संस के कुल इक्विटी निवेश या ऋण-इक्विटी ढांचे का खुलासा नहीं किया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का राजस्व वित्त वर्ष 2025 में 66,601 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 1.31 लाख करोड़ रुपये हो गया। मगर उसने 1,611 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया।

एयर इंडिया को चाहिए लंबी अवधि की पूंजी

प्रवर्तक पूंजी के लिए एयर इंडिया प्रमुख दावेदार बनी रह सकती है। इस विमानन कंपनी ने एयरबस और बोइंग को कुल मिलाकर 600 विमानों के ऑर्डर दिए हैं। साथ ही वह अपने पुराने बेड़े का नवीनीकरण भी कर रही है। टाटा संस की वित्त वर्ष 2026 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मार्गों के लिए नैरो-बॉडी विमानों का नवीनीकरण किया जा चुका है जबकि वाइड-बॉडी बेड़े का नवीनीकरण वित्त वर्ष 2028 के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है।

विमानन कंपनी प्रशिक्षण, सेवा में बदलाव, नेटवर्क विस्तार और पुरानी प्रणालियों को दुरुस्त करने के लिए भी निवेश कर रही है। मगर कंपनी ने न तो विमान ऑर्डर के कुल मूल्य का और न ही पट्टे, उधारी एवं शेयरधारकों के निवेश के प्रस्तावित ढांचे का खुलासा किया है। टाटा संस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एयर इंडिया ने वित्त वर्ष 2026 में 71,870 करोड़ रुपये के राजस्व पर 22,238 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया।

इस विमानन कंपनी में टाटा संस का निवेश मार्च के आखिर में 22,618 करोड़ रुपये दर्ज किया गया जो एक साल पहले के लगभग बराबर था। विस्तारा से विलय के बाद एयर इंडिया में टाटा संस की हिस्सेदारी 73.82 फीसदी और शेष हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस की है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि एयर इंडिया के कायापलट को 5 से 10 साल के सफर के तौर पर देखा जाना चाहिए।

एग्रेटास को पूंजी की दरकार

एग्रेटास भारत और ब्रिटेन में बैटरी-सेल कारखानों का निर्माण कर रही है। टाटा संस ने 2023 में 40 गीगावॉट प्रति घंटा क्षमता के सोमरसेट कारखाने के लिए के लिए 4 अरब पाउंड से अधिक के निवेश की घोषणा की थी। इसके लिए जेएलआर और टाटा मोटर्स को प्रमुख ग्राहक के रूप में पहचान की गई थी।

ब्रिटेन सरकार ने अप्रैल 2026 में सोमरसेट परियोजना के लिए 38 करोड़ पाउंड तक की सब्सिडी देने की घोषणा की। इससे प्रभावी तौर पर पूंजी जरूरत में कमी आएगी। मगर एग्रेटास ने सरकारी मदद के बाद परियोजना की अंतिम लागत या प्रवर्तकों की पूंजी या ऋण का खुलासा नहीं किया है। टाटा संस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एग्रेटास एनर्जी स्टोरेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड में टाटा समूह की 88 फीसदी हिस्सेदारी है। यह एग्रेटास की प्रमुख भारतीय बैटरी कंपनी है।

इसके अलावा ब्रिटेन के एग्रेटास लिमिटेड में 100 फीसदी हिस्सेदारी टाटा समूह की है। वित्त वर्ष 2026 के अंत में भारतीय इकाई में टाटा संस का निवेश 3,464 करोड़ रुपये दर्ज किया गया जो एक साल पहले 1,999 करोड़ रुपये से अधिक है। एग्रेटास ने वित्त वर्ष 2026 में 45 करोड़ रुपये के कुल राजस्व पर 1,101 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। समूह ने फिलहाल यह खुलासा नहीं किया है कि टाटा संस कितना मदद करेगी अथवा कितने ऋण की जरूरत होगी।

डिजिटल कारोबार में निवेश

साल 2019 में स्थापित टाटा डिजिटल ने 2022 में समूह के उपभोक्ता कारोबार को साथ लाने के उद्देश्य से टाटा न्यू को लॉन्च किया। इसमें क्रोमा, बिगबास्केट और टाटा 1एमजी जैसे कारोबार एवं ब्रांड शामिल हैं। साथ ही टाइटन, ट्रेंट और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे सूचीबद्ध कारोबार को भी इसमें शामिल किया गया है।

हालांकि स्थापित ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए डिजिटल कारोबार को लगातार निवेश करने की आवश्यकता है। टाटा संस का टाटा डिजिटल में इक्विटी निवेश वित्त वर्ष 2026 के अंत में 22,902.66 करोड़ रुपये था जो एक साल पहले जैसा ही है। उसने अलग से 2,970 करोड़ रुपये शेयर-ऐप्लिकेशन राशि के रूप में दर्ज किया जिससे मार्च के अंत में इसका जोखिम लगभग 25,872.66 करोड़ रुपये हो गया।

वित्त वर्ष 2026 में टाटा डिजिटल का राजस्व पिछले वर्ष के 32,188 करोड़ रुपये से लगभग 12 फीसदी बढ़कर 35,990 करोड़ रुपये हो गया। उसका घाटा 4,610 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,974 करोड़ रुपये हो गया। मामले से अवगत लोगों के अनुसार, समूह डिजिटल उपभोक्ता व्यवसाय में 6,000 से 7,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश पर विचार कर रहा है। अतिरिक्त रकम की जरूरत और कारोबार की स्थिरता टाटा ट्रस्ट्स द्वारा उठाए गए मुद्दों में शामिल रही है।

First Published : August 17, 2026 | 10:48 PM IST