आर्थिक मंदी के तूफान के बाद देश में इस्पात एवं एल्युमिनियम की मांग में आई गिरावट ने उड़ीसा में लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
राज्य की लघु इकाइयां पिछले दो महीनों में बिक्री में तकरीबन 30 फीसदी की गिरावट का गवाह रही हैं।
उड़ीसा एसेंबली ऑफ स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज के महासचिव गौरी शंकर दास ने कहा, ‘वैश्विक वित्तीय संकट के बाद इस्पात और एल्युमिनियम की मांग में कमी आ रही है और इन उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली इकाइयां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
दो महीनों के दौरान बिक्री में 30 फीसदी की गिरावट आई है, क्योंकि इन इकाइयों द्वारा घरेलू और विदेशों से हासिल किए गए नए ठेके बेहद नगण्य हैं।’
दास ने कहा कि राज्य में ज्यादातर एसएमई नकदी के संकट से जूझ रहे हैं और वे अपने कर्मचारियों को वेतन चुकाए जाने की भी स्थिति में नहीं हैं।
उन्होंने कहा, ‘यदि आर्थिक संकट और गहराता है एवं निकट भविष्य में मांग में इजाफा नहीं होता है तो ये एसएमई अपने कर्मचारियों की छंटनी के लिए बाध्य हो सकते हैं।’
उत्कल चैम्बर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष निरंजन मोहंती ने कहा, ‘सरकार को तेजी से घट रही मांग को पुनर्जीवित करने के लिए बुनियादी ढांचे पर और अधिक ध्यान देने की जरूरत है।’
उन्होंने कहा कि एसएमई को बैंकों को बकाया के निपटान के लिए अधिक समय दिए जाने की जरूरत है, क्योंकि नकदी आसानी से उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘फिलहाल, किसी एसएमई इकाई को बैंक द्वारा उस स्थिति में एनपीए (नन-परफॉर्मिंग एसेट) का दर्जा दे दिया जाता है जब वह तीन महीने के अंदर अपने बकाया को निपटाने में विफल रहती है। हम चाहते हैं कि एसएमई को उसके बकाया के भुगतान के लिए 6 महीने का समय दिया जाए।’
उद्योग के उद्योग विभाग के निदेशक हेमंत शर्मा ने कहा, ‘उड़ीसा के एसएमई को ऋण संकट की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बैंक अब एसएमई को ऋण देने को इच्छुक नहीं हैं और उन्होंने जांच और नियंत्रण के सख्त तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।’
ऐसे में कंपनियां उत्पादन में कटौती किए जाने पर विचार कर रही हैं। इन उद्योगों को एसएमई द्वारा की जा रही कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
मौजूदा मंदी की वजह से राज्य में टेक्स्टाइल क्षेत्र में लगी लघु एवं मझोली इकाइयों के वैश्विक बाजारों के लिए किए जाने वाले निर्यात में भी बड़ी गिरावट आई है।’