नेस्ले, आईटीसी ने समान कीमत के लिए जताई सहमति

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 10:39 PM IST

नेस्ले इंडिया और आईटीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने समान मार्जिन के मुद्दे पर ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रिब्यूटर्स फेडरेशन (एआईसीपीडीएफ) के पदाधिकारियों के साथ बैठक की ताकि पारंपरिक वितरण चैनलों और संगठित बिजनेस टु बिजनेस (बी2बी) वितरकों के बीच कीमत में असमानता के मुद्दे को निपटाया जा सके। दोनों कंपनियों के अधिकरियों ने पारंपरिक वितरकों के शीर्ष संगठन को मौखिक तौर पर आश्वस्त किया है कि वे दोनों वितरण चैनलों के बीच कीमत में समानता लाएंगे। हालांकि वितरकों ने इस मुद्दे पर लिखित आश्वासन देने के लिए कहा है। बातचीत में शामिल लोगों के अनुसार, दोनों कंपनियों ने यह भी कहा है कि पारंपरिक वितरकों को कोई नुकसान नहीं होगा। कीमत में असमानता के मुद्दे को निपटाने के लिए किसी एफएमसीजी कंपनी द्वारा बुलाई गई यह पहली बैठक थी।
इस बाबत जानकारी के लिए नेस्ले इंडिया और आईटीसी को बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं आया।
फिलहाल जियोमार्ट, बुकर, मेट्रो कैश ऐंड कैरी जैसे संगठित व्यापार और उड़ान एवं एलास्टिक रन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां खुदरा विक्रेताओं को पारंपरिक वितरकों के मुकाबले अधिक मार्जिन की पेशकश करती हैं। पारंपरिक वितरक खुदरा विक्रेताओं को 8 से 12 फीसदी के दायरे में मार्जिन की पेशकश करते हैं जबकि ऑनलाइन वितरकों और बड़े बी2बी स्टोर के मामले में यह आंकड़ा 15 से 20 फीसदी है। पिछले 20 दिनों में एआईसीपीडीएफ ने कीमत में असमानता के मुद्दों को निपटाने के लिए एफएमसीजी कंपनियों को दो पत्र लिखा है। पत्र में एफएमसीजी कंपनियों को बैठक कर इस मुद्दे को निपटाने की बात कही गई थी।
वितरकों के शीर्ष संगठन ने यह भी कहा कि यदि इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो वे 1 जनवरी से एफएमसीजी कंपनियों के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करेंगे। मांगों की अपनी सूची में वितरकों ने देश भर में सभी वितरण चैनलों के बीच एकसमान मूल्य निर्धारण एवं समान योजनाएं सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
वितरकों के संगठन ने अपने पहले पत्र में एफएमसीजी कंपनियों को मांगों की एक सूची दी थी जिसमें प्राथमिक आधार पर सभी योजनाओं की पेशकश (खुदरा विक्रेता के बजाय वितरक स्तर पर बिक्री) करने की बात कही गई थी। वितरकों ने थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर लागत में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मार्जिन को नए सिरे से निर्धारित करने की मांग की गई थी। इसके अलावा पत्र में सभी द्वितीयक योजनाओं को वित्तीय क्रेडिट नोट के रूप में पेश करने और क्षतिग्रस्त स्टॉक को कंपनियों द्वारा वापस लिए जाने की मांग भाी शामिल थी।

First Published : December 23, 2021 | 11:20 PM IST