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‘कीमतों में बढ़ोतरी जरूरी’

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:54 PM IST

भले ही प्यूमा देश में स्पोट्र्सं लाइफस्टाइल के खुदरा कारोबार में देर से (2006 में) उतरी हो, लेकिन वह तेजी से अपना कारोबार बढ़ाती जा रही है।
प्यूमा स्पोट्र्स इंडिया के सीईओ राजीव मेहता से बात की सुवि डोगरा ने। प्रस्तुत है, बातचीत के संक्षिप्त अंश :
प्यूमा खुदरा कारोबार में काफी देर से उतरी। वैसे भी खुदरा कारोबार के लिए तो 2008 का साल काफी कठिन था। इसके चलते आपको किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
कंपनी की बिक्री पहले काफी अच्छी रही है। इस चलते 2008 का हमारा लक्ष्य वास्तविक ही था। हालांकि, पिछले तीन महीने कंपनी के लिए काफी कठिन रहे। इस दौरान कंपनी की बिक्री करीब 30 फीसदी नीचे गिर गई। इसके बावजूद हम अच्छी विकास दर पाने में कामयाब रहे हैं।
मौजूदा दौर में घट चुके मुनाफे की भरपाई के लिए क्या कंपनी की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना है?
मेरा मानना है कि मंदी में कीमतें हमेशा बढ़ती हैं। इस वजह से एक ओर जहां ग्राहकों की संख्या में कुछ कमी होती है, वहीं कई खरीदार इस बढ़ोतरी को नजरअंदाज कर देते हैं। वैसे भी कंपनी को टिकाए रखने के लिए कीमतों में थोड़ी-बहुत वृद्धि जायज है। पिछले सीजन में हमने कीमतें नहीं बढ़ाई थीं पर इस सीजन में कीमतों में 5-10 फीसदी की बढ़ोतरी करने जा रहे हैं।
उद्योग के मौजूदा रुख को देखते हुए प्यूमा क्या 2009 में किड्सवियर कैटेगरी में उतरेगी?
नहीं, प्यूमा ने अपनी यह योजना 2010 तक बढ़ा दी है। इस साल हमारा लक्ष्य मौजूदा कारोबार को मजबूत करना और कीमतों में कमी करना है। हालांकि किड्सवियर सेगमेंट में बहुत अधिक निवेश की जरूरत नहीं है, पर इसमें खतरे बहुत हैं। क्योंकि यह क्षेत्र कीमत के लिहाज से बहुत संवेदनशील है। अब हमारी योजना केवल इसके लिए स्टोर खोलने की बजाय किड्सवियर रिटेलरों की मदद लेने का है।
स्टोरों की संख्या बढ़ाने की योजना भी अब बदल चुकी है?
अभी पूरे देश में हमारे 36 स्टोर हैं। फिलहाल खर्चे घटाने के लिए किराए कम कराने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही ऐसी जगहें ढूंढी जा रही हैं, जहां स्टोरों को मुनाफे की स्थिति में लाया जाए। स्टोरों की संख्या बताना मुश्किल है।

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First Published - March 12, 2009 | 11:40 PM IST

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