facebookmetapixel
Advertisement
मई में IIP ग्रोथ 5 महीने के हाई पर, बिजली क्षेत्र की तेजी से औद्योगिक उत्पादन को मिला सहाराSBI ने डॉलर बॉन्ड से जुटाए 30 करोड़ डॉलर, RBI की स्वैप सुविधा का उठाया लाभकोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ अशोक वासवानी दिसंबर में छोड़ेंगे पद, शेयर 3% से ज्यादा टूटाIFSCA का बड़ा प्रस्ताव: GIFT City में हर ग्राहक को मिलेगा यूनिक KYC आईडी!मॉनसून और पश्चिम एशिया तनाव से शेयर बाजार लुढ़का, सेंसेक्स 372 अंक टूटाभारत फिर बना दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा शेयर बाजार, ताइवान और दक्षिण कोरिया को छोड़ा पीछे14 साल पुराने मामले में दवा कंपनियों को CCI की क्लीन चिट, प्रतिस्पर्धा उल्लंघन के आरोप खारिजपश्चिम एशिया संकट का असर, देश के बड़े शहरों में घरों की बिक्री 6% घटीMaruti Suzuki ने 5 स्टार्टअप्स से मिलाया हाथ, EV बैटरी रीसाइक्लिंग और AI समाधानों पर फोकस 2030 तक 10 GW क्षमता का लक्ष्य, पंप स्टोरेज और हाइब्रिड एनर्जी पर हिंदुजा रिन्यूएबल्स का बड़ा दांव 

नाल्को ने खर्च में कटौती की

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 10:46 AM IST

अंतरराष्ट्रीय एल्युमीनियम की कीमतें लंदन मेटल एक्सचेंज पर घट कर 1,430 डॉलर प्रति टन के न्यूनतम स्तर पर आ गई हैं।
आर्थिक मंदी के इस दौर में कीमतों में होने वाली गिरावट से निपटने के लिए नवरत्न कंपनियों में शामिल नाल्को ने कमर कस ली है।
लगातार कीमतों में आ रही गिरावट से बाध्य होकर कंपनी ने एल्युमीनियम की घरेलू कीमतें घटा कर 10,000 रुपये प्रति टन कर दी है।
तीन महीनों में पांचवीं बार नाल्को ने एल्युमीनियम की कीमतों में कटौती की है। इस साल जुलाई में लंदन मेटल एक्सचेंज पर एल्युमीनियम की कीमतें 3,000 डॉलर प्रति टन थी।
अपने सहारे के लिए नाल्को ने मितव्ययिता के कई उपाय किए हैं जिनमें विभिन्न खर्चों में कटौती और अपने पावर प्लांट में आयातित कोयले के इस्तेमाल से परहेज कर उत्पादन लागत को कम करना शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, कीमतों में गिरावट के कारण नाल्को अंगुल स्मेल्टर संयंत्र के एल्युमीनियम उत्पादन में किसी तरह की कटौती करने की योजना नहीं बना रही है।
यह संयंत्र रोजाना 1,000 टन एल्युमीनियम का उत्पादन करता है। सूत्र कहते हैं कि कंपनी ने केवल उन्हीं खर्चों में कटौती की है जो ज्यादा जरुरी नहीं थे। इसमें मनोरंजन, प्रशासनिक और अन्य खर्चे शामिल हैं।
इसके अलावा, चूंकि एल्युमीनियम उत्पादन में बिजली के खर्च की हिस्सेदारी 33 से 35 प्रतिशत की होती है इसलिए नाल्को के अधिकारियों ने तय किया है कि वे महंगे आयातित कोयले की जगह तालचेर कोलफील्ड्स के कोयले का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए करेंगे।
नाल्को के भंडार में 76,000 टन आयातित कोयला पड़ा हुआ है लेकिन कंपनी ने इसका इस्तेमाल बंद कर दिया है। उल्लेखनीय है कि आयाातित कोयले की कीमत 8,500 रुपये प्रति टन है जबकि घरेलू कोयले की कीमत 850 रुपये प्रति टन है।
नाल्को के पास वर्तमान में 1.60 लाख टन घरेलू कोयले का भंडार है और इसके साथ-साथ तालचेर कोलफील्ड्स से वह लगभग 15,000 टन कोयला लेने वाली है।

Advertisement
First Published - December 23, 2008 | 12:18 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement