Puneet Chandok, President of Microsoft India and South Asia
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में बदलाव की रफ्तार बेहद तेज हो चुकी है और आने वाले तीन साल इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और साउथ एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंडोक ने सोमवार को कहा कि एआई मॉडल अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहे हैं और निकट भविष्य में इस क्षेत्र में 1000 गुना तक विस्तार देखने को मिल सकता है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक सत्र ‘एआई फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट: एंटिसिपेटरी, हाइपरलोकल, स्केलेबल’ को संबोधित करते हुए चंडोक ने कहा कि पिछले छह महीनों में एआई तकनीक में जो प्रगति हुई है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि तकनीक लगातार बेहतर और अधिक सक्षम बन रही है।
उन्होंने कहा कि इस बात पर बहस हो सकती है कि एआई वास्तव में कितना सुधार कर रहा है, लेकिन वास्तविक उदाहरण बताते हैं कि मॉडल पहले से कहीं अधिक सटीक और सक्षम बन चुके हैं। हाल के महीनों में तकनीक की कार्यक्षमता, निर्णय लेने की क्षमता और जटिल कार्यों को संभालने की योग्यता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। उनका मानना है कि अगले तीन वर्षों में एआई सेक्टर में बड़े पैमाने पर विस्तार होगा।
यह भी पढ़ें | AI Impact Summit 2026: टेक दिग्गज बोले- कई नई नौकरियां पैदा होंगी; शांत रहें, नई स्किल सीखें
चंडोक ने बताया कि फिलहाल एआई का सबसे बड़ा उपयोग सॉफ्टवेयर कोडिंग के क्षेत्र में हो रहा है। डेवलपर्स अब एआई टूल्स की मदद से तेजी से और कम त्रुटियों के साथ कोड लिख पा रहे हैं। इससे उत्पादकता में वृद्धि हो रही है और सॉफ्टवेयर विकास की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई अब केवल तकनीकी उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह व्यवसायों में ‘डिजिटल सहयोगी’ के रूप में शामिल हो रहा है। कंपनियों में एआई आधारित सिस्टम निर्णय लेने, डेटा विश्लेषण और दस्तावेज तैयार करने जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
चंडोक के अनुसार, पहले कंपनियां क्लाउड फर्स्ट रणनीति अपनाती थीं, लेकिन अब धीरे धीरे एआई फर्स्ट मॉडल की ओर बढ़ रही हैं। आने वाली पीढ़ी की कंपनियां अपने मूल ढांचे में एआई को शामिल करके ही आगे बढ़ेंगी। इसका अर्थ है कि एआई केवल सपोर्ट सिस्टम नहीं रहेगा, बल्कि व्यवसाय की रणनीति और संचालन का केंद्रीय हिस्सा बनेगा।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि एआई कानूनी दस्तावेज तैयार कर सकता है, तो पारंपरिक पेशों की संरचना बदल सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, बल्कि काम करने का तरीका बदलेगा।
एआई से रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव पर बोलते हुए चंडोक ने स्पष्ट किया कि तकनीक नौकरियों को खत्म नहीं करेगी, बल्कि उन्हें नए रूप में ढालेगी। उनका कहना था कि एआई कार्यों को अलग अलग हिस्सों में बांट देगा और लोगों को खुद को नए कौशलों के साथ तैयार करना होगा। जो लोग एआई सीख रहे हैं, वे भविष्य की अर्थव्यवस्था में आगे रहेंगे।
भारत की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश में एआई को लेकर उत्साह और संभावनाएं दोनों मौजूद हैं। यहां प्रतिभाशाली युवाओं की बड़ी संख्या है और नीतिगत स्तर पर भी सकारात्मक पहल हो रही हैं। उनके अनुसार, भारत में लगभग 59 प्रतिशत व्यवसाय एआई एजेंट्स का उपयोग कर रहे हैं, जो इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
नई दिल्ली में शुरू हुए एआई इम्पैक्ट समिट में 20 से अधिक देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई प्रमुख हस्तियां भाग ले रही हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो एआई अब केवल तकनीकी चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, रोजगार और शासन प्रणाली को प्रभावित करने वाली प्रमुख शक्ति बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।