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JSW MG Motor 2026 में लॉन्च करेगी 4 नए मॉडल, भारत में ₹4,000 करोड़ तक निवेश की तैयारी

JSW एमजी मोटर इंडिया 2026 में चार नए मॉडल लाकर और 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये निवेश कर अपने ईवी, हाइब्रिड और एसयूवी सेगमेंट को मजबूत करेगी।

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दीपक पटेल   
Last Updated- February 16, 2026 | 2:40 PM IST

ऑटोमोबाइल सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के उद्देश्य से JSW एमजी मोटर इंडिया (JSW MG Motor India) ने 2026 के दौरान चार नए मॉडल बाजार में उतारने की घोषणा की है। कंपनी के प्रबंध निदेशक अनुराग मेहरोत्रा के अनुसार, कंपनी आने वाले कुछ वर्षों में भारत में 3,000 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये तक का निवेश करने की तैयारी कर रही है। यह निवेश उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और उत्पाद पोर्टफोलियो को मजबूत करने पर केंद्रित होगा।

चार नए मॉडल होंगे लॉन्च

कंपनी जिन चार मॉडलों को लॉन्च करने जा रही है, उनमें एक प्लग इन हाइब्रिड वाहन, एक पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार, एमजी मैजेस्टर एसयूवी और एक अन्य नया मॉडल शामिल है, जिसका खुलासा फिलहाल नहीं किया गया है। इन लॉन्च के जरिए कंपनी पारंपरिक ईंधन, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक तीनों सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।

हाल ही में 12 फरवरी को कंपनी ने एमजी मैजेस्टर को आधिकारिक रूप से प्रदर्शित किया। इससे पहले इसे भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो 2025 में भी पेश किया गया था। यह एक डी प्लस श्रेणी की 4×4 एसयूवी है। इसकी प्री बुकिंग शुरू हो चुकी है और कीमतों की घोषणा अप्रैल में लॉन्च के आसपास की जाएगी। भारतीय बाजार में इसका मुकाबला टोयोटा फॉर्च्यूनर, जीप मेरिडियन, स्कोडा कोडिएक और निसान एक्स ट्रेल जैसे मॉडलों से होगा।

निवेश के लिए सभी विकल्प खुले

अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि निवेश जुटाने के लिए कंपनी सभी संभावित विकल्पों पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि संयुक्त उद्यम के दोनों साझेदार, JSW समूह और SAIC मोटर, रणनीतिक फैसलों में सक्रिय रूप से शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच लगातार संवाद से निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है, जिससे कंपनी को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है।

JSW एमजी मोटर इंडिया एक संयुक्त उद्यम है, जिसमें JSW समूह की 35 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि चीन की SAIC मोटर के पास 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेष 16 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय निवेशकों के पास है, जिसमें वित्तीय संस्थान, डीलर और कर्मचारी शामिल हैं।

भारत चीन कारोबारी रिश्तों में सुधार

भारत और चीन के व्यावसायिक संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में मेहरोत्रा ने कहा कि हाल के वर्षों में स्थिति में सुधार देखने को मिला है। वीजा और उड़ानों की सुविधा बेहतर हुई है और दोनों देशों की कंपनियों के बीच तकनीकी सहयोग बढ़ा है। विशेष रूप से ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में तकनीकी लाइसेंसिंग समझौतों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को आधुनिक तकनीक तक पहुंच मिल रही है।

तकनीक हस्तांतरण और जोखिम प्रबंधन

SAIC से तकनीक हस्तांतरण को लेकर उठने वाली चिंताओं पर उन्होंने कहा कि व्यवसाय में जोखिम स्वाभाविक होता है, लेकिन इसे संतुलित तरीके से प्रबंधित करना जरूरी है। उनका मानना है कि जोखिम के डर से अवसरों से दूर नहीं हुआ जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीयकरण को बढ़ावा देने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं का असर कम किया जा सकता है।

उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि समुद्री माल ढुलाई की लागत में पिछले वर्ष भारी उतार चढ़ाव देखने को मिला। कंटेनर शिपिंग की दरें कभी 2,400 डॉलर तक पहुंच गईं, फिर घटकर लगभग 700 डॉलर हो गईं और बाद में दोबारा 1,500 डॉलर के आसपास आ गईं। ऐसे उतार चढ़ाव से बचने के लिए घरेलू आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाना आवश्यक है।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर दीर्घकालिक भरोसा

इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग पर बात करते हुए मेहरोत्रा ने स्वीकार किया कि पिछले साल सितंबर में जीएसटी दरों में बदलाव के बाद पेट्रोल और डीजल कारें तुलनात्मक रूप से सस्ती हो गईं, जिससे ईवी की वृद्धि दर कुछ धीमी पड़ी। हालांकि उनका कहना है कि लंबी अवधि में इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत प्रभावशीलता मजबूत बनी हुई है। ईंधन की बचत और कम रखरखाव खर्च उपभोक्ताओं के लिए बड़ा आकर्षण हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईवी की मांग केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर टू और टियर थ्री शहरों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता बढ़ रही है। कुछ छोटे बाजारों में तो ईवी की हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से भी अधिक दर्ज की गई है।

कंपनी का मानना है कि विभिन्न निर्माताओं द्वारा आने वाले समय में पेश किए जाने वाले नए इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल बाजार में नई ऊर्जा भरेंगे। अधिक विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और ईवी सेगमेंट में फिर से तेजी आ सकती है।

First Published : February 16, 2026 | 2:40 PM IST