कंपनियों के मार्जिन पर और पड़ेगी चोट!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:07 PM IST

प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले रुपये के मूल्य में गिरावट और पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दर में अचानक बढ़ोतरी के दोहरे झटकों से आगामी तिमाहियों में भारतीय कंपनियों के परिचालन मार्जिन और लाभ में कमी आने की आशंका है।
विश्लेेषकों का कहना है कि रुपये के अवमूल्यन से तेल, कोयला, औद्योगिक धातुओं, बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाले रसायनों, कृषि जिंसों जैसी औद्योगिक लागतों और विनिर्माण कंपनियों के आयातित कलपुर्जों की भारतीय रुपये में लागत बढ़ जाएगी। रुपया सोमवार को डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड स्तर तक लुढ़क गया। दर में बढ़ोतरी और उससे बॉन्ड प्रतिफल में इजाफे तथा बैंकों के कर्ज की दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों की वित्त की लागत बढ़ेगी।
जेएम इंस्टीट््यूशनल फाइनैंस के  प्रबंध निदेशक और मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतों का पहले ही कंपनियों के लाभ पर असर पडऩे लगा है। ज्यादातर गैर-वित्तीय कंपनियों ने पिछली दो तिमाहियों के दौरान मार्जिन में संकुचन दर्ज किया है और स्थितियां वित्त वर्ष 2023 में और बिगड़ सकती हैं।’ उनका अनुमान है कि ऊंची परिचालन लागत और न्यून आय वृद्धि की दोहरी चुनौतियों के कारण वित्त वर्ष 2023 में निफ्टी 50 कंपनियों की अग्रिम आय के अनुमानों में 20 फीसदी तक की कटौती होगी।
सूचीबद्ध गैर-वित्तीय कंपनियों की कच्चे माल और बिजली एवं ईंधन की लागतों में मार्च 2022 तिमाही (वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही) में लगातार पांचवीं तिमाही मेंं शुद्ध बिक्री की तुलना में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनके परिचालन मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है।
सूचीबद्ध गैर-वित्तीय कंपनियों की संयुक्त रूप से कच्चे माल की लागत वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 42.4 फीसदी बढ़ी, जबकि चौथी तिमाही में उनकी बिजली एवं र्ईंधन की लागत सालाना आधार पर 30.2 फीसदी बढ़ीं। इसकी तुलना में कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 27.8 फीसदी बढ़ी।
इनपुट लागतों में तेजी से वृद्धि के कारण कंपनियां मार्जिन पर चोट खाने को मजबूर हैं। कंपनियों का एबिटा मार्जिन वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही में गिरकर राजस्व का 21.1 फीसदी रहा, जो सात तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है। यह मार्जिन एक साल पहले 21.5 फीसदी था और सिंतबर 2020 तिमाही (वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही) में 23.2 फीसदी के सर्वोच्च स्तर पर था। कंपनियों का कोर परिचालन मार्जिन और तेजी से फिसला है। यह अन्य लाभ एवं असामान्य लाभ या हानि को घटाने से प्राप्त होने वाला परिचालन लाभ है।

First Published : May 10, 2022 | 11:19 PM IST