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स्पूतनिक वी के लिए मैनकाइंड की रूसी कंपनी के साथ साझेदारी!

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Last Updated- December 12, 2022 | 6:02 AM IST

रूस का कोविड-19 टीका स्पूतनिक वी भारतीय बाजार में प्रवेश की राह तलाश रहा है। देश की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक मैनकाइंड फार्मास्यूटिकल्स भारत में टीके के वितरण के लिए रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) के साथ साझेदारी कर सकती है। सूत्रों ने संकेत दिया है कि भारत में निजी बाजार में व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने पर स्पूतनिक वी की कीमत 500 रुपये प्रति खुराक हो सकती है। हालांकि, भारत सरकार और आरडीआईएफ  कीमतों के मुद्दों पर बात करेंगे जिस कीमत पर देश के कोविड-19 टीकाकरण अभियान के लिए टीके की खरीद की जाएगी। कई सूत्रों के अनुसार देश में टीके के वितरण के लिए मैनकाइंड फार्मा और आरडीआईएफ  के बीच साझेदारी से जुड़ी बातचीत अंतिम चरण में है। हालांकि मैनकाइंड फार्मा ने इस खबर के लिए कोई टिप्पणी नहीं की है और आरडीआईएफ  को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला है। एक सूत्र ने बताया, ‘देश के दूरदराज के कोनों में टीका ले जाने के लिए वितरण से जुड़ी साझेदारी की जाएगी। मैनकाइंड का देश के सुदूर इलाकों में एक मजबूत वितरण नेटवर्क है।’ फिलहाल देश में दवा नियामक ने दो टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सीन को ‘सीमित आपातकालीन इस्तेमाल’ का अधिकार दिया गया है और टीका निर्माताओं को इन टीकों को व्यावसायिक रूप से बेचने की अनुमति नहीं है। सरकार इन टीका निर्माताओं से टीका खरीदती है। टीकों की वाणिज्यिक बिक्री की अनुमति मिलने के बाद देश में टीके के व्यापक वितरण को सुनिश्चित करने के लिए टीका निर्माता विपणन और वितरण से जुड़ी साझेदारी करेंगे।
फिलहाल आरडीआईएफ  ने भारत में ब्रिजिंग क्लीनिकल अध्ययन (जो खत्म हो गया है) के लिए हैदराबाद की डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) के साथ गठजोड़ किया है और यह भारत में टीके का वितरण और विपणन कर रही है। डीआरएल भारत में अपने टीके के लिए भारतीय नियामक से मंजूरी हासिल करने के लिए आरडीआईएफ  की भी मदद कर रही है। यह पहले से ही केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) के पास आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन दे चुकी है। एसईसी ने प्रतिरोधक क्षमता (टीके की वजह से शुरू होने वाली वांछित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया), टीकाकरण के बाद होने वाली गंभीर प्रतिकूल घटनाओं, कोल्ड चेन प्रबंधन योजना के अलावा भारतीय और रूस के परीक्षणों के बीच प्रतिरोधक क्षमता के डेटा की तुलना के लिए व्यापक राय मांगी है।
एसईसी सोमवार को बैठक कर डीआरएल आवेदन की समीक्षा करेगी और दी गई जानकारी पर विचार कररेगी। स्पूतनिक वी को वैश्विक स्तर पर 59 देशों में पंजीकृत किया गया है जिसमें कुल आबादी 1.5 अरब से अधिक है। स्पूतनिक वी का असर 91.6 प्रतिशत है।
आरडीआईएफ  ने भारत और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों के लिए बड़े पैमाने पर टीके का उत्पादन करने के लिए भारत में कई विनिर्माण भागीदारों के साथ करार किया है। डीआरएल ने पहले संकेत दिया था कि भारत के लिए 25 करोड़ खुराक तैयार करने की योजना है। भारत में कई भागीदारों के साथ टीके की कुल विनिर्माण क्षमता सालाना 85.90 करोड़ खुराक से अधिक है। इसमें हेटेरो, ग्लैंड फार्मा, विर्को ग्रुप, स्टेलिस फार्मा, पैनेसिया बायोटेक आदि शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ  इंडिया और शिल्पा मेडिकेयर सहित और भी संभावित विनिर्माण साझेदार हैं और बातचीत जारी है। भारत में स्पूतनिक वी बनाने की कुल क्षमता अन्य टीका उम्मीदवारों से कहीं अधिक है और यह सालाना एक अरब खुराक के स्तर को पार कर सकती है।
स्पूतनिक वी को स्थिर रहने के लिए माइनस 18-20 डिग्री सेल्सियस कोल्ड चेन की जरूरत होती है। टीके के एक अन्य संस्करण लाइफि लाइज्ड (फ्रीज करके रखना) पर काम जारी है जिससे यह 2-8 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रह पाएगा।

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First Published - April 11, 2021 | 11:48 PM IST

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