जोमैटो के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आईपीओ के सलाहकारों और मूल्यांकनकर्ताओं को कंपनी का मूल्यांकन 10 लाख करोड़ रुपये या इससे अधिक निर्धारित करने के लिए कहा है। हालांकि बेहतर प्रदर्शन के बावजूद जोमैटो 1 लाख करोड़ रुपये का ही मूल्यांकन हासिल कर पाई थी।
सरकार आईपीओ के जरिये एलआईसी में 10 फीसदी हिस्सेदारी का विनिवेश करने की योजना बना रही है। इस मूल्यांकन पर सरकार को प्रस्तावित आईपीओ से 1 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जिससे सरकार को चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस साल विनिवेश से अब तक महज 9,110 करोड़ रुपये मिल पाए हैं और एयर इंडिया की बिक्री पूरी होने पर 2,700 करोड़ रुपये और मिलेंगे।
फिलहाल मध्यस्थ देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी का निहित मूल्य तय करने में जुटे हैं, जिससे कंपनी के कुल मूल्य का पता लगाने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने मूल्यांकनकर्ताओं के साथ बातचीत में जोमैटो की सफल सूचीबद्घता और 1 लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण हासिल करने का तर्क देते हुए कहा कि एलआईसी के लिए संभावनाएं काफी उज्ज्वल हैं। एलआईसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी और प्रतिष्ठित ब्रांड है। ऐसे में इसका मूल्यांकन कम से कम 10 लाख करोड़ रुपये होना चाहिए।
एक अधिकारी ने कहा, ‘सरकार देश की सबसे मूल्यवान कंपनी का विनिवेश कर रही है और इसमें अपनी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए श्रेष्ठ मूल्यांकन और कीमत हासिल करने का प्रयास कर रही है।’
निहित मूल्य (ईवी) की गणना बीमा कंपनी के पूंजी और अधिशेष के सकल परिसंपत्ति मूल्य से भविष्य के मुनाफे का वर्तमान मूल्य वर्तमान जोड़कर की जाती है। निहित मूल्य को इस महीने के अंत तक अंतिम रूप दिया जा सकता है। उसके बाद एलआईसी के नए कारोबार का मूल्य, कारोबार की व्यापकता आदि के आधार पर मूल्यांकन की गणना की जाएगी। ईवी में दो घटक होते हैं- समायोजित शुद्घ मूल्य और वर्तमान कारोबार का मूल्य।
समायोजित नेटवर्थ शेयरधारकों के अधिशेष मूल्य को दर्शाता है। यह शेयरधारकों के इक्विटी और पार्टिसिपेटिंग, नॉन-पार्टिसिपेटिंग शेयरधारकों की अधिशेष राशि तथा यूनिट-लिंक्ड फंडों का मूल्य होता है। वर्तमान कारोबार का मूल्य कंपनी के कारोबार से शेयरधारकों को हस्तांतरित मूल्य होता है, जिसे सांविधिक तौर पर आरक्षित रखना होता है। आईपीओ मसौदा दाखिल करते समय ईवी को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के साथ साझा किया जाएगा।
सरकार चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में आईपीओ लाने की संभावना तलाश रही है। सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए जल्द ही रोडशो शुरू करेगी।