ऐसे वक्त में जब भारत अपने राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण अभियान को जारी रखने के लिए टीके की पर्याप्त आपूर्ति के संकट से जूझ रहा है, ठीक उसी वक्त अमेरिका की एक प्रमुख कंपनी जॉनसन ऐंड जॉनसन (जेऐंडजे) ने अपने एकल शॉट वाले कोविड-19 टीके का क्लीनिकल परीक्षण भारत में शुरू करने के लिए केंद्र के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
जेएंडजे इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, ‘जॉनसन ऐंड जॉनसन में हम दुनिया भर के लोगों को एक सुरक्षित और प्रभावी कोविड-19 टीका लाने पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि इसे स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिल जाए। हम भारत सरकार के साथ भी इस मकसद से विचार-विमर्श कर रहे हैं ताकि हम स्थानीय नियामकीय मंजूरी के जरिये भारत में अपने जैनसेन कोविड-19 टीके का क्लीनिकल अध्ययन शुरू कर दें।’
इस टीके की जानकारी रखने वाले करीबी सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है कि अब तक क्लीनिकल परीक्षण (ब्रिजिंग स्टडीज) शुरू करने के लिए कंपनी को कोई मंजूरी नहीं मिली है। भारत में जेएंडजे की विनिर्माण साझेदार कंपनी हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई है। बायोलॉजिकल ई की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) महिमा दातला ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को पहले बताया था कि जेऐंडजे इस कंपनी के संयंत्र में 50 करोड़ खुराक का उत्पादन करना चाह रही है।
जेऐंडजे ने कहा है कि इसका टीका तीन महीने तक 2.8 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रह सकता है और कंपनी कैंसर, प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी दिक्कतों के इलाज के लिए दवाएं के साथ-साथ जो अन्य दवाएं भेजने के लिए जिस कोल्ड चेन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करती है उसका ही इस्तेमाल करके कोविड-19 के टीके भी भेजे जाएंगे।
जेऐंडजे के अलावा रूस की स्पूतनिक वी भी भारतीय औषधि नियामक से मंजूरी लेने की एक और दावेदार हैं। स्पूतनिक वी ने ब्रिजिंग परीक्षण पूरा कर लिया है और अब आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी पाने के लिए इंतजार कर रहा है। इसने भारत के लिए 25 करोड़ से अधिक खुराकें तैयार की हैं और भारतीय विनिर्माण संयंत्रों में घरेलू खपत और निर्यात दोनों के लिए 85 करोड़ से अधिक खुराक तैयार किए जाएंगे।
जेऐंडजे की सहायक कंपनी जैनसेन द्वारा विकसित एड26-कोव2-एस इस टीके को इस साल फरवरी में अमेरिका के खाद्य और दवा विनियामक (यूएसएफडीए) की ओर से आपातकालीन उपयोग का अधिकार प्राप्त हुआ था, जो तीसरे चरण के सामूहिक अध्ययन के आंकड़ों के आधार पर था। इसमें यह दिखाया गया था कि गंभीर रोगों की रोकथाम में यह टीका 85 प्रतिशत कारगर रहा है।
जेऐंडजे ने कहा था कि टीकाकरण के 28 दिन बाद इसने कोविड-19 से संबंधित अस्पताल में भर्ती और मौत से सुरक्षा का प्रदर्शन किया है। जेऐंडजे ने अमेरिका समेत विभिन्न देशों में 43,783 प्रतिभागियों पर क्लीनिकल परीक्षण किया था। यूएसएफडीए ने कहा है कि ‘टीकाकरण के कम से कम 14 दिन बाद यह टीका कोविड-19 के गंभीर/जोखिमपूर्ण लक्षणों को रोकने में करीब 77 प्रतिशत कारगर था और टीकाकरण के कम से कम 28 दिन बाद कोविड के गंभीर/जोखिमपूर्ण लक्षणों को रोकने में 85 प्रतिशत कारगर था।’ यूरोपीयन मेडिकल एजेंसी (ईएमए) ने भी मार्च में इस टीके को मंजूरी दे दी थी।
अमेरिका की इस दिग्गज दवा कंपनी ने कहा है कि वह अपने कोविड-19 टीके को आपातकालीन महामारी के उपयोग के लिए गैर-लाभकारी आधार पर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। जेऐंडजे ने अपने टीके की खेप भेजनी शुरू कर दी है और उम्मीद है कि वह वर्ष 2021 की पहली छमाही के दौरान अमेरिका को एक इंजेक्शन वाले 10 करोड़ टीके डिलिवर कर देगी।
अमेरिका की राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी, यूनाइटेड स्टेट्स सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कहा है कि रोग ग्रस्त लोगों के अस्पताल में भर्ती होने और उनकी मौत रोकने में यह टीका काफी कारगर है। सीडीसी ने यह भी यह भी कहा है कि प्रयोगशाला में उन लोगों में इस बात की पुष्टि की जा चुकी कोविड-19 बीमारी की रोकथाम में जैनसेन टीका क्लीनिकल परीक्षणों में 66.3 प्रतिशत कारगर रहा है जिनमें पहले से कोई संक्रमण का सबूत नहीं था।