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देरी से एजीआर भुगतान संबंधी वोडा आइडिया की मांग अवैध

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Last Updated- December 12, 2022 | 3:02 AM IST

एक गैर-लाभकारी इकाई टेलीकॉम वॉचडॉग ने वोडाफोन आइडिया की उस मांग को अवैध करार दिया है जिसके तहत दूरसंचार कंपनी ने अपने
एजीआर बकाये के किस्त के भुगतान के लिए मोहलत की अवधि बढ़ाने की मांग की थी।
संचार मंत्री को लिखे अपने पत्र में टेलीकॉम वॉचडॉग ने कहा है, ‘रकम जुटाने में असर्थता के कारण सरकारी बकाये के भुगतान को स्थगित करने संबंधी वोडाफोन आइडिया के अनुरोध से हम चकित हैं। यह स्पष्ट तौर पर परिचालन एवं वित्तीय प्रबंधन के मामले में उसके कुप्रबंधन को स्थापित करता है। वह अपनी इक्विटी को भुनाकर रकम जुटाने में विफल रही है। इसके अलावा वह लागत आदि घटाने के लिए नई प्रौद्योगिकी के साथ अपने नेटवर्क को अपग्रेड करने में भी विफल रही है।’
सौभाग्य से दूरसंचार क्षेत्र उन चुनिंदा क्षेत्रों में से शामिल है जो कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण प्रभावित नहीं है और डेटा सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण इस क्षेत्र के राजस्व में वास्तव में वृद्धि हुई है। ऐसे में इस तरह का अनुरोध इस उदारीकृत क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा घटाने के नाम पर सरकार को ब्लैकमेल कर रियायतें हासिल करने की आदत की ओर इशारा करता है। सरकारी बकाये के भुगतान में मोहलत की अवधि बढ़ाने की मांग गलत तथ्यों के साथ गुमराह करके और वित्तीय तौर पर दमदार प्रवर्तकों के बावजूद की गई है। टेलीकॉम वॉचडॉग ने कहा है कि शुल्क दर के मामले में किसी भी सरकारी समर्थन या हस्तक्षेप पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। इन कदमों से सरकार को नुकसान होगा और उपभोक्ताओं को परेशान किया जाएगा। साथ ही इससे कंपनी को अपना परिचालन जारी रखने में कोई खास मदद नहीं मिलेगी।
दूसरी ओर, वोडाफोन आइडिया को सलाह दी जानी चाहिए कि वे कंपनी में अतिरिक्त इक्विटी डालें या अपने नेटवर्क के उन्नयन में नए निवेश के लिए मौजूदा इक्विटी को बेचकर अतिरिक्त रकम जुटाने के लिए गंभीर प्रयास करें और परिचालन दक्षता बढ़ाने की कोशिश करें।
वोडाफोन आइडिया ने कहा, ‘उद्योग की कंपनियों ने दूरसंचार क्षेत्र में जबरदस्त दबाव की ओर इशारा किया है। सभी तीन निजी दूरसंचार ऑपरेटरों के प्रतिनिधि संगठन सीओएआई ने पिछले दो वर्षों से इस क्षेत्र के लिए मदद की आवश्यकता पर जोर दिया है और इस क्षेत्र के स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए सर्वसम्मति से आधार मूल्य निर्धारित करने की मांग की है। हम कयासबाजी अथवा गलत जानकारी वाले निष्कर्षों पर टिप्पणी नहीं करेंगे।’

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First Published - July 4, 2021 | 11:41 PM IST

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