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छात्रों को उद्यमी बनाने में मदद कर रहे हैं बिजनेस स्कूल

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Last Updated- December 10, 2022 | 8:13 PM IST

देश के कई बिजनेस स्कूल अपने छात्रों को खुद का उद्यम शुरू करने के लिए मदद पहुंचा रहे हैं। ये स्कूल छात्रों को आरंभिक कोष, परामर्श सहायता मुहैया कराने और अपने पुराने छात्रों के नेटवर्क के जरिये कोष जुटाए जाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
कुछ बिजनेस स्कूलों और आईआईटी ने डेफर्ड-प्लेसमेंट पॉलिसी तैयार की है जो अपना उद्यम शुरू करने के लिए छात्रों को अधिकतम दो साल की अवधि के लिए प्लेसमेंट से अलग रहने में सक्षम बनाती है और उद्यम शुरू नहीं हो पाने की स्थिति में पुन: इसमें शामिल होने का मौका देती है।
दूसरी तरफ कुछ संस्थानों और पुराने छात्रों के नेटवर्क द्वारा मुहैया कराए गए कोष से छात्र अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने में सफल होते दिख रहे हैं। हालांकि कई बिजनेस स्कूलों में फाइनल प्लेसमेंट सत्र अगले महीने भी जारी रहने की संभावना है, लेकिन कई छात्रों ने अपनी बिजनेस योजनाओं पर अमल पहले ही शुरू कर दिया है। एक्सएलआरआई जमशेदपुर अब तक इस मामले में अगुआ बना हुआ है। इसके छात्रों ने तीन व्यावसायिक योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
एक्सएलआरआई के प्रोफेसर मधुकर शुक्ला ने कहा, ‘एक्सएलआरआई ने हाल में ही अपने अलुमनी नेटवर्क और एक्सएलआरआई सोशल एंटरप्रेन्योरशिप ट्रस्ट के लिए अन्य अनुदानों से लगभग 14 लाख रुपये की रकम जुटाई है। इसकी सिंगापुर शाखा ने भी लगभग 500 एसजीडी की रकम जुटाई है। यह रकम छात्र उद्यमियों के लिए आरक्षित कोष में जमा की जाएगी।  छात्र विभिन्न कंपनियों से मिले ठेकों को पूरा करने के लिए अब और कोष जुटाए जाने की संभावना तलाश रहे हैं। इन छात्रों को कुछ कंपनियों ने ट्रायल के आधार पर ठेके दिए हैं।’
शुक्ला ने कहा, ‘लगभग 7 छात्र इस साल प्लेसमेंट से बाहर रह सकते हैं। प्रत्येक उद्यम को बड़ी रकम की जरूरत होती है। यदि छात्र इसे हासिल करने में सफल रहते हैं तो वे प्लेसमेंट से बाहर रहेंगे। अन्यथा टीम से एक सदस्य उद्यम से जुड़ा रहेगा और बाकी छात्र उद्यम की प्रगति पर नजर रखेंगे।’
एक्सएलआरआई के छात्रों द्वारा ‘परिचय’ नाम से एक ऐसा उद्यम चलाया जा रहा है जो ग्रामीण एवं आदिवासी कारीगरों और शिल्पकारों को मुख्यधारा के बाजारों से जोड़ता है। परिचय को चलाने वाले छात्रों के मुताबिक भारत की पारंपरिक ग्रामीण और आदिवासी कला काफी हद तक विलुप्त होती जा रही है, क्योंकि कारीगर बाजार से अलग होते जा रहे हैं। इस वजह से बाजार तक उनकी सीधी पहुंच नहीं है।
छात्रों ने कुछ डिजाइनरों की सेवा भी ली है जिन्होंने उनके लिए प्रोटोटाइप उत्पाद तैयार किए हैं। परिचय के सदस्यों ने ‘लर्निंग एंड डिजाइन सेंटर’ भी बनाया है जहां प्रोटोटाइप उत्पादों को विकसित करने के लिए ग्रामीण आदिवासी कारीगरों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। छात्र नाबार्ड के साथ भी बातचीत के शुरुआती दौर में हैं। नाबार्ड ने भी उद्यम में दिलचस्पी दिखाई है।
‘परिचय’ की टीम को एक्सएलआरआई से लगभग 3 लाख रुपये आरंभिक कोष के रूप में पहले ही मिल चुके हैं। इसके अलावा इस टीम ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में पुरस्कार राशि के जरिये भी कुछ कोष एकत्रित किया है। एक्सएलआरआई के छात्रों द्वारा चलाई जा रही एक अन्य पहल ‘स्वावलंबन’ है। यह एक ऐसा उद्यम है जिसका उद्देश्य झारखंड में गांवों के लिए बिजली मुहैया कराने के लिए ‘ऑक्स-ड्राइवन जेनरेटर’ का इस्तेमाल करना है। यह जेनरेटर बीआईटी मेसरा के प्रोफेसर द्वारा मान्यताप्राप्त प्रौद्योगिकी है।
अब तक स्वावलंबन टीम झारखंड रिन्यूएवल एजेंसी डेवलपमेंट एजेंसी (जेआरएडीए) से एक ऑर्डर हासिल कर चुकी है। इस टीम को ‘प्रूफ ऑफ कॉनसेप्ट’ कार्य के तौर पर एक गांव के विद्युतीकरण के लिए झारखंड के आदिवासी मामलों के मंत्री से मंजूरी भी मिल चुकी है। एक्सएलआरआई छात्रों की तीसरी परियोजना ‘ड्रीम 4 अदर्स’ है। इस उद्यम का उद्देश्य पंजीकृत गैर-सरकारी संगठनों के लिए फंड जुटाने के लिए ऑनलाइन मार्केट सर्वे करना है। यह परियोजना ए सी नीलसन के एक निदेशक की देखरेख में द्वारा चलाई जा रही है।
इसी तरह बेंगलुरु के जेवियर इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एक्सआईएमई) में भी दो छात्रों ने एक परियोजना को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से इस साल प्लेसमेंट से बाहर रहने का फैसला किया है। यह परियोजना पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों को सीएनजी वाहनों में तब्दील किए जाने से जुड़ी हुई है।
इनमें से एक छात्र निगेल जॉब ने बताया, ‘यह परियोजना वाहन चालकों के लिए तेल खर्च पर हर साल लगभग 6000 रुपये की बचत सुनिश्चित करेगी और यह पर्यावरण अनुकूल भी है। हमारी परियोजना में दोपहिया वाहनों को शामिल किया जाएगा।’
इस परियोजना से जुड़े अन्य छात्र रंजू जॉर्ज ने बताया, ‘इस परियोजना पर शुरुआती लागत लगभग 15 लाख रुपये आएगी। हम कोष जुटाने के लिए नेशनल एंटरप्रेन्योरशिप नेटवर्क (एनईएन) और कुछ पूंजीपतियों से बातचीत कर रहे हैं।’
आईआईएम-कलकत्ता में प्रथम वर्ष के दो छात्रों ने भी अपने उद्यम शुरू करने के लिए प्लेसमेंट से दूर रहने का फैसला किया है। इस संस्थान में प्रथम वर्ष के छात्र प्रणव कुमार ने मोबाइल मूल्यवर्धित सेवाओं पर एक उद्यम शुरू करने की योजना बनाई है। 6 अन्य सहयोगियों के साथ प्रणव ने मोबाइल पर एक सोशल नेटवर्किंग वेंचर ‘मोबमी’ शुरू किया है।

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First Published - March 15, 2009 | 10:04 PM IST

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