बीमा कंपनियों को न सिर्फ जोखिम पर ध्यान देने, बल्कि जोखिमों को रोकने पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। पिछले सप्ताह भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त हुए सुभाष चंद्र खुंटिया ने कहा कि इससे बीमा कराने वालों के दावों का समाधान का लाभ मिल सकेगा और उन्हें नुकसान से बचाया जा सकेगा।
आईआरडीएआई के चेयरमैन पद पर खुंटिया का कार्यकाल 6 मई 2021 को पूरा हो गया। वह इस पद पर मई 2019 से मई, 2021 तक 3 साल रहे। आईआरडीएआई ने खुंटिया के उत्तराधिकारी की तलाश शुरू कर दी है और चेयरमैन पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। नियामक की ओर सेजारी अधिसूचना के मुताबिक इस पद के लिए आवेदन करने वाले को जीवन बीमा, सामान्य बीमा, एक्चुरियल साइंस, वित्त, अर्थशास्त्र, कानून, एकाउंटेंसी और प्रशासन के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव होना चाहिए। इस पद पर नियुक्त व्यक्ति को मकान व कार की सुविधा के बगैर हर महीने 4.5 लाख रुपये मिलेंगे।
खुंटिया ने कहा, ‘इससे बीमाकर्ताओं और पॉलिसीधारकों के बीच भरोसा बढ़ेगा और दोनों को लंबे समय तक लाभ मिल सकेगा।’ बीमा कंपनियों को लिखे गए अपने आखिरी पत्र में खुंटिया ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के बावजूद 2020-21 में बीमा उद्योग ने 9.2 प्रतिशत और जीवन बीमा उद्योग ने 11.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है।