प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Commons
वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि पान मसाला बनाने वाली कंपनियों को 1 फरवरी 2026 से लागू होने वाले हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस कानून के तहत तुरंत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। मंत्रालय ने इस बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) की लिस्ट जारी की है, जिसमें सारी बातें विस्तार से बताई गई हैं।
अगर किसी कंपनी के अलग-अलग फैक्ट्री में पैकिंग मशीनें लगी हैं, तो हर फैक्ट्री के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा। इसके लिए कंपनियों को ऑटोमेशन ऑफ सेंट्रल एक्साइज एंड सर्विस टैक्स (ACES) पोर्टल पर आवेदन करना पड़ेगा। रजिस्ट्रेशन मिलने के सात दिन के अंदर कंपनियों को अपनी मशीनों की पूरी जानकारी देनी होगी। इसमें मशीन की अधिकतम स्पीड, पैक करने वाली चीजों का वजन जैसे पैरामीटर शामिल हैं, जो सेस के कैलकुलेशन के लिए जरूरी होते हैं।
टैक्स अधिकारी फैक्ट्री और मशीनों की फिजिकल जांच करेंगे। यह जांच शुरुआती जानकारी देने के 90 दिन के अंदर पूरी करनी होगी। मौजूदा पान मसाला बनाने वालों से पूछा गया कि उन्हें कब रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए, तो जवाब आया कि कानून और नियम लागू होते ही। यानी 1 फरवरी 2026 से यह शुरू हो जाएगा, क्योंकि इसी दिन से सेस देने की जिम्मेदारी शुरू हो जाएगी।
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट उस दिन से मान्य होगा, जब सेस देना शुरू करना पड़ता है। यानी पुरानी कंपनियों के लिए 1 फरवरी 2026 से। अच्छी बात यह है कि अगर अधिकारी सात कामकाजी दिनों में आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं करते, तो आवेदन अपने आप मंजूर मान लिया जाएगा। आवेदन सफलतापूर्वक जमा होते ही टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाता है, जिससे कंपनियां सेस का भुगतान कर सकती हैं।
नियम के मुताबिक, हर महीने की शुरुआत में सेस वसूल करना अनिवार्य है, और यह काम महीने के सातवें दिन तक पूरा करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कम से कम 10 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा। नए आवेदकों के लिए भी यही सुविधा है कि अगर 1 फरवरी 2026 को उनके पास पहले से मशीनें हैं, तो टेंपरेरी नंबर से ही सेस जमा कर सकते हैं, भले रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट अभी प्रोसेस में हो।
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सेस का कैलकुलेशन हर महीने होगा। यह पैकिंग मशीनों की संख्या और उनकी अधिकतम पैकिंग स्पीड के आधार पर तय की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने 1 जनवरी को हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस एक्ट के नियम नोटिफाई किए थे। इस कानून से पान मसाला पर सबसे ऊंची 40 फीसदी GST दर के ऊपर अतिरिक्त सेस लगेगा। कुल टैक्स बोझ मौजूदा 88 फीसदी के स्तर पर ही रहेगा। अभी पान मसाला पर 28 फीसदी GST के साथ कंपनसेशन सेस लगता है।
कंपनियों को हर पैकिंग मशीन और मैनुअल पैकिंग यूनिट को कवर करने वाली CCTV लगानी पड़ेगी। फुटेज को 24 महीने तक सुरक्षित रखना होगा और अधिकारी मांगें तो 48 घंटे के अंदर उपलब्ध करानी होगी।
अगर कोई कंपनी महीने के बीच में नई मशीन लगाती है या जोड़ती है, तो उस मशीन का पूरा महीने का सेस पांच दिन के अंदर जमा करना होगा। ये सारे नियम पान मसाला इंडस्ट्री के लिए उत्पादन क्षमता के आधार पर टैक्स सुनिश्चित करने के मकसद से लाए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि कंपनियां जल्द से जल्द पोर्टल पर आवेदन करें ताकि कोई दिक्कत न आए।
(PTI से इनपुट के साथ)