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तेल संकट ने बढ़ाई भारत की टेंशन! क्या अब EV ही बचाएंगे देश?

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पश्चिम एशिया तनाव ने खोली भारत की कमजोरियां- कम तेल भंडार, LPG पर खतरा; समाधान के तौर पर EV सब्सिडी और रिन्यूएबल एनर्जी पर जोर जरूरी

Last Updated- March 31, 2026 | 8:09 AM IST
EV

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुनिया को तेल संकट की दहलीज पर ला खड़ा किया है। ऐसे माहौल में भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए खतरा और भी बड़ा हो जाता है। Emkay की रिपोर्ट के मुताबिक, यह संकट सिर्फ अस्थायी झटका नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा और कमजोर हो सकती है।

EV अपनाना अब विकल्प नहीं, जरूरत

रिपोर्ट साफ कहती है कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) भारत के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं। अगर सरकार फिर से EV पर सब्सिडी लागू करती है, तो 2035 तक तेल आयात में करीब 4.5% की कमी लाई जा सकती है। अभी जहां EV का हिस्सा लगभग 23% तक पहुंचने का अनुमान है, वहीं सब्सिडी मिलने पर यह 34% तक जा सकता है। इसका सीधा असर देश के खर्च पर पड़ेगा और करंट अकाउंट घाटा भी कम होगा। खास बात यह है कि इस पूरी योजना का खर्च सरकार के लिए ज्यादा भारी नहीं है।

EV की राह में चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि तस्वीर इतनी आसान नहीं है। भारत में अभी EV का इस्तेमाल करीब 7% ही है, जो दिखाता है कि यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है। चार्जिंग स्टेशन की कमी, बैटरी तकनीक की सीमाएं और ऊंची कीमतें अभी भी लोगों को रोकती हैं। फिर भी ऑटो (3-व्हीलर) सेगमेंट में EV तेजी से बढ़ रहे हैं और 2-व्हीलर में भी आने वाले समय में तेजी की उम्मीद है।

सरकार को क्या करना होगा?

अगर EV को सच में आगे बढ़ाना है, तो सिर्फ घोषणाएं नहीं, जमीनी बदलाव जरूरी होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को सब्सिडी दोबारा शुरू करनी होगी, चार्जिंग नेटवर्क को हर 25 किलोमीटर तक फैलाना होगा और बैटरी व कंपोनेंट्स का देश में उत्पादन बढ़ाना होगा। साथ ही सस्ते लोन देकर आम लोगों के लिए EV खरीदना आसान बनाना होगा।

रिन्यूएबल एनर्जी: ताकत है, लेकिन रास्ता कठिन

भारत ने 2030 तक 500GW रिन्यूएबल एनर्जी का बड़ा लक्ष्य रखा है, लेकिन इस राह में कई रुकावटें हैं। ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, जमीन अधिग्रहण की दिक्कतें और बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने में बाधाएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। रिपोर्ट बताती है कि यहां बड़े ऐलान से ज्यादा छोटे-छोटे स्तर पर सुधार की जरूरत है। बैटरी स्टोरेज तकनीक (BESS) को मजबूत करना भी बेहद जरूरी है।

तेल भंडार: हालत कितनी गंभीर?

भारत के पास अभी सिर्फ 5-6 दिन का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जो चिंता की बात है। हालांकि सरकारी कंपनियों के पास करीब 50 दिन का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है, जिससे थोड़ी राहत मिलती है। सरकार 2032 तक इसे 22 दिन और 2040 तक 30 दिन तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन यह प्रक्रिया धीमी है और तुरंत समाधान नहीं दे सकती।

LPG संकट: छुपा हुआ खतरा

जहां पेट्रोल-डीजल की स्थिति संभली हुई दिखती है, वहीं रसोई गैस यानी LPG पर खतरा ज्यादा है। भारत अपनी 55% जरूरत गल्फ देशों से पूरी करता है और स्टॉक भी सिर्फ 20-25 दिन का होता है। हाल के संकट में कमर्शियल उपयोग में भारी कटौती करनी पड़ी। इसका हल आसान नहीं है। नए स्टोरेज बनाना और PNG का इस्तेमाल बढ़ाना ही लंबे समय का रास्ता है।

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First Published - March 31, 2026 | 7:55 AM IST

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