देश में ठेके पर दवा तैयार करने वाली कंपनियां (सीडीएमओ) क्षमता और तकनीक संबंधी निवेश में विस्तार कर रहे हैं क्योंकि वैश्विक फार्मास्युटिकल कंपनियां कॉम्प्लेक्स दवाओं के विकास और विनिर्माण के काम को तेजी से आउटसोर्स कर रही हैं। साई लाइफ साइंसेज, वनसोर्स स्पेशलिटी फार्मा और एकम्स ड्रग्स ऐंड फार्मास्युटिकल्स जैसी कंपनियों के अधिकारियों का कहना है कि उनके निवेश का मकसद विनिर्माण के बुनियादी ढांचे को बढ़ाना, अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना तथा ड्रग-डिवाइस कॉम्बिनेशन, पेप्टाइड्स और स्टेराइल इंजेक्शन जैसे क्षेत्रों में उभरते मौकों के लिए तैयारी करना है।
हैदराबाद की साई लाइफ साइंसेज अगले पांच साल के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में अपनी मौजूदगी में खासा इजाफा करने की योजना बना रही है। प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी कृष्ण कनुमुरी ने कहा कि कंपनी का इरादा अपनी क्षमता को मौजूदा लगभग 700 घन मीटर की तुलना में तीन गुना करके 2,000 घन मीटर से ज्यादा करना है।
कनुमुरी ने कहा, ‘हम अगले 12 महीने में लगभग 500 घन मीटर क्षमता जोड़ रहे हैं और एक नया कार्यस्थल बना रहे हैं जिसे लगभग 1,300 घन मीटर तक बढ़ाया जा सकता है।’ उन्होंने कहा कि यह विस्तार केवल वॉल्यूम तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि पेप्टाइड्स, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स (एडीसी) और ओलिगोन्यूक्लियोटाइड्स जैसी ज्यादा जटिलता वाली तकनीकों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
साई लाइफ साइंसेज ने वित्त वर्ष 20 से अनुसंधान और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, बोस्टन और मैनचेस्टर में लैब बनाने, गुणवत्ता प्रणाली मजबूत करने और विकास की समयसीमा तेज करने के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म जोड़ने में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
कनुमुरी ने कहा कि कंपनी की रणनीति दवा की खोज, विकास और वाणिज्यिक विनिर्माण को शामिल करते हुए सीडीएमओ का शुरु से आखिर तक का प्लेटफॉर्म बनाना है। उन्होंने कहा, ‘हम शायद अकेली ऐसी कंपनी हैं, जो बड़े स्तर पर निवेशकों के लिए वाणिज्यिक स्तर वाले विनिर्माण के जरिये खोज की भी पेशकश कर रही है।’
वनसोर्स स्पेशलिटी फार्मा में ड्रग-डिवाइस कॉम्बिनेशन और स्टेराइल विनिर्माण में क्षमता बढ़ाने पर जोर है। मुख्य कार्य अधिकारी और प्रबंध निदेशक नीरज शर्मा ने कहा कि कंपनी ने अपने पहले घोषित 10 करोड़ डॉलर के पूंजीगत व्यय कार्यक्रम में से 7.5 करोड़ डॉलर से ज्यादा देने का वादा किया है।
शर्मा ने कहा, ‘ये निवेश मुख्य रूप से हमारी ड्रग-डिवाइस कॉम्बिनेशन क्षमताओं को बढ़ाने और हमारे स्टेराइल फिल-फिनिश के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए हैं।’
इन निवेशों का मकसद कंपनी के शुरु से आखिर तक के प्लेटफॉर्म को मजबूत करना और जीएलपी-1 उपचार की आने वाली वैश्विक पेशकशों की तैयारी कर रहे ग्राहकों की मदद करना है। कंपनी ने कहा कि क्षमता बढ़ाने का काम ग्राहक की मांग के अनुमानों के अनुरूप चरणबद्ध रूप से किया जा रहा है।
इस बीच एकम्स ड्रग्स ऐंड फार्मास्युटिकल्स अपना विनिर्माण नेटवर्क मजबूत करने के लिए कई डोज फॉर्मेट और क्षमता में निवेश कर रही है। कंपनी की निदेशक आरुषि जैन के मुताबिक एकम्स रखरखाव और विकास के पूंजीगत व्यय पर सालाना लगभग 250 से 300 करोड़ रुपये खर्च करती है। कंपनी ने हाल में अपनी बद्दी इकाई में लगभग 150 करोड़ रुपये के निवेश से चार नए विनिर्माण खंड जोड़े हैं।