हाल में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की उच्चतम अदालत अपीलीय प्राधिकरण ने चीन के आयातित ऑटो पुर्जों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने के खिलाफ अपना फैसला सुनाया है।
अपीलीय प्राधिकरण का कहना है कि यह शुल्क पेइंचिंग टैरिफ से मेल नहीं खाता। भारतीय ऑटो कल-पुर्जा निर्माताओं को डब्ल्यूटीओ के अपीलीय प्राधिकरण के इस फैसले से काफी उम्मीद दिखाई दी है, क्योंकि कल-पुर्जा निर्माता सरकार से देश में चीनी ऑटो पुर्जों पर शुल्क लगाने बढ़ाने की अपील कर चुके हैं।
अपने अंतिम फैसले में अपीलीय प्राधिकरण ने चीन की चुनौती को कई पहलुओं पर खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया कि पेइचिंग के उपाय वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
जहां चीन आयातित कारों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाता है, वहीं ‘जरूरत’ को देखते हुए आयातित ऑटो पुर्जों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है।
भारतीय ऑटोमोटिव कल-पुर्जा निर्माता संघ (एक्मा) के कार्यकारी निदेशक विष्णु माथुर का कहना है, ‘यह हमारी सरकार से चीनी ऑटो पुर्जों के देश में प्रवेश पर सीमा शुल्क बढ़ाने की अपील का समर्थन करता है।’
फिलहाल चीनी ऑटो पुर्जों जैसे रेडिएटर और गीयर बॉक्स के आयात पर देश में 10 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया जाता है, जबकि पेट्रोल इंजन और मोटरसाइकिल पर 7.5 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया जाता है।
लगभग 8 महीने पहले एक्मा की सरकार को दी गई प्रस्तुति में यह सलाह दी गई थी कि चीनी वस्तुओं पर सभी सीमा शुल्क को बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाए ताकि भारतीय ऑटो कल-पुर्जा बनाने वाली प्रमुख कंपनिं को बचाया जा सके, जो इतने कम दामों में उत्पादन नहीं बना सकतीं।
वाणिज्य विभाग के पास उपलब्ध आयात-निर्यात के आंकड़ों से इस बात का पता चलता है कि चीनी ऑटो पुर्जों का देश में आयात अन्य किसी भी देश से होने वाले आयात के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ रहा है।
चीनी ऑटो पुर्जों के कुल आयात में 90 प्रतिशत हिस्सा व्हील रिम और तीलियों का है, वहीं चीन का हिस्सा आयातित मोटरसाइकिल एक्सेसरीज के क्षेत्र में 2006 में 10 प्रतिशत के मुकाबले 2007 में बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया।
चीन की आयात कहानी यहीं खत्म नहीं होती। भारतीय टायर निर्माता कंपनियां पिछले कई साल से सस्ते ट्रक और बस रेडियल टायरों की स्थानीय बाजार में भरमार से परेशान है।
चीनी रेडियल टायर भारतीय टायरों के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत तक सस्ते हैं और इनका भारत में मरम्मत के बाजार में 15 फीसदी पर कब्जा भी है।
जे के टायर के प्रबंध निदेशक ए एस मेहता का कहना है, ‘पहले वे अपने उत्पादों को हमारे देश में उन कीमतों में बड़ी संख्या में लेकर आते हैं, जिन कीमतों पर स्थानीय निर्माता उत्पाद मुहैया नहीं करा सकते। और एक बार जब वे ऐसा करने में कामयाब होते हैं उसके बाद वे कीमतों में जबरदस्त इजाफा करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में खलबली मच जाती है।’
लगभग 2 साल पहले एक्मा की ओर से चीनी कंपनियों की प्रतिद्वंद्विता पर कराए गए अध्ययन से पता चलता है कि चीन में स्थापित चीनी कल-पुर्जा निर्माताओं को 15 से 20 प्रतिशत कम लागत का फायदा मिल रहा है।
चीन में सस्ती बिजली, सरकार की ओर से वाणिज्यिक ब्याज दर में कमी और सस्ते कच्चे माल के रूप में उन्हें यह फायदा होता है।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर नजर बनाए हुए एक सलाहकार का कहना है, ‘इसके अलावा भी चीनी कंपनियों को 20 प्रतिशत की ऐसी रियायतें दी जाती हैं जो चीन में स्थापित भारतीय ऑटो कंपनियों को उपलब्ध नहीं हैं।’
ऑटो कल-पुर्जों का कारोबार
वर्ष भारत से चीन को निर्यात चीन से भारत को निर्यात
2002-03 69 रुपये 47 रुपये
2003-04 126 रुपये 214 रुपये
2004-05 128 रुपये 371 रुपये
2005-06 158 रुपये 766 रुपये
2006-07 113 रुपये 1,376 रुपये
2007-08 177 रुपये 2,052 रुपये
स्रोत : एक्मा