दिल्ली स्थित ऋणदाता आईएफसीआई ने फ्यूचर रिटेल और फ्यूचर कंज्यूमर में किशोर बियाणी के शेयरों का इस्तेमाल किया है। इन कंपनियों द्वारा ऋणदाता को समय पर ऋण नहीं चुकाए जाने की वजह से इनके शेयरों का इस्तेमाल किया गया है।
आईएफसीआई ने फ्यूचर समूह से ऋणों के भुगतान में तेजी लाने को कहा था, क्योंकि वह उन बैंकों के कंसोर्टियम में शामिल था जिन्होंने इस साल के शुरू में एकबारगी पुनर्गठन (ओटीआर) पर सहमति जताई थी। एक बैंकिंग सूत्र ने कहा कि फ्यूचर समूह द्वारा ओटीआर के तहत कोई पुनर्भुगतान नहीं कर पाने के बाद ऋणदाता ने उसके शेयरों पर कब्जा कर लिया और उन्हें बाजार में बेच दिया। स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी के अनुसार, इस शेयर बिक्री के बाद, समूह कंपनी में एफआरएल में प्रर्वतक हिस्सेदारी घटकर 19.44 प्रतिशत रह जाएगी, जो सितंबर के अंत तक 19.86 प्रतिशत थी। वहीं आईएफसीआई द्वारा शेयर बेच दिए जाने के बाद फ्यूचर कंज्यूमर में, प्रवर्तक हिस्सेदारी घटकर 14.02 प्रतिशत रह गई है। सितंबर के अंत में फ्यूचर कंज्यूमर में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 14.47 प्रतिशत थी।
फ्यूचर समूह के एक अधिकारी ने इस संबंध में ईमेल पर भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है।
अन्य सूचीबद्घ कंपनियों में भी प्रवर्तक हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। फ्यूचर इंजीनियरिंग में, प्रवर्तक हिस्सेदारी घटकर 20.61 प्रतिशत और फ्यूचर मार्केट नेटवक्र्स में 17.33 प्रतिशत रह गई है। फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशंस में, प्रवर्तक हिस्सेदारी अब 20.39 प्रतिशत और फ्यूचर सप्लाई चेन सॉल्युशंस में 23.09 प्रतिशत है। समूह की सभी कंपनियों में प्रवर्तक हिस्सेदारी पिछले दो साल में लगातार घटी है।
समूह पिछले साल अगस्त में अमेजॉन द्वारा रिलायंस रिटेल को 24,700 करोड़ रुपये में अपने व्यवसाय की बिक्री की घोषणा के बाद से कानूनी विवाद में फंसा हुआ है। फ्यूचर रिटेल की प्रवर्तक इकाई फ्यूचर कूपन लिमिटेड में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली एमेजॉन ने आरआरएल सौदे पर आपत्ति प्रकट करते हुए कहा है कि इस सौदे से बियाणी परिवार के साथ उसके ‘नो-कम्पीट एग्रीमेंट’ का उल्लंघन होगा। यह मामला मौजूदा समय में सिंगापुर इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन सेंटर और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है।
समूह को पिछले साल मार्च में उस वक्त ऋण चुकाने में विफलताओं की शुरुआत का सामना करना पड़ा था, कोविड महामारी ने दश को अपनी चपेट में लिया था। आरबीआई द्वारा पिछले साल अगस्त में कोविड प्रभावित कंपनियों के लिए ऋण पुनर्गठन पैकेज की पेशकश के बाद, समूह कंपनियों के ऋणदाताओं ने 29 अक्टूबर 2020 को समूह कंपनियों द्वारा हासिल की गई ऋण सुविधाओं के संदर्भ में वन टाइम रीस्ट्रक्चरिंग (ओटीआर) का सहारा लिया। कंपनी और पात्र ऋणदाताओं द्वारा इस साल 26 अप्रैल को दस्तावेजों के क्रियान्वयन के साथ ओटीआर पर अमल किया गया।
उसके अनुसार, ओटीआर की शर्तों को ध्यान में रखते हुए कर्ज का कार्यकाल बढ़ाया गया और बकाया कार्यशील पूंजी सीमा कार्यशील पूंजी मियामी ऋण में तब्दील की गई और विभिन्न देनदारियों पर सितंबर 2021 तक देय ब्याज फंडेड इंटरेस्ट टर्म लोन (‘एफआईटीएल’) में तब्दील किया गया था।