होटल उद्योग के लिए वर्ष का आगाज धमाकेदार रहा और 2008 का अंत मायूसी भरा रहा, जिसके लिए मात्र वैश्विक मंदी जिम्मेदार नहीं है बल्कि मुंबई पर हुए आतंकी हमले ने इस उद्योग के जख्मों को नासूर बना दिया है।
पिछले दिनों को याद किया जाय तो वर्ष की शुरुआत ठीक-ठाक रही, जिसमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अपने बजटीय भाषण में घोषणा की थी कि दो, तीन और चार सितारा होटलों के निर्माण में पांच वर्षों तक करों में रियायत दी जायेगी।
चिदंबरम की इस घोषणा के बाद 25 कंपनियों द्वारा 34,000 करोड़ का निवेश किया गया। निवेश करने वालों में होटल समूहों के अलावा नए रियल इस्टेट कंपनियों का भी समावेश रहा। उल्लेखनीय है कि साल भर न केवल छोटे होटलों के निर्माण में कंपनियों की रुचि रही, बल्कि पांच सितारा होटलों के साथ-साथ लक्जरी होटलों के निर्माण में भी कंपनियां आगे आईं।
इस उद्योग के लिए सबसे खुशगवार बात यह भी रही कि भारत में इस दौरान विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहा। पर्यटन मंत्रालय के आंकडों के मुताबिक विदेशी पर्यटकों के आंकडे में जनवरी में 10.4 फीसदी बढ़ोतरी रही, फरवरी में 11.9 फीसदी बढ़ोतरी रही और मार्च में 14.6 फीसदी बढ़ोतरी रही।
हालांकि, वैश्विक वित्तीय संकट की छाया इस उद्योग पर पड़ी और आंकडे बताते है कि अप्रैल में विदेशी सैलानियों की संख्या घटकर 9.6 फीसदी पर आ गई, और तो और अक्टूबर महीने में सारे रिकार्ड तोड़ते हुए आंकड़ा वर्ष के निचले स्तर 1.8 फीसदी पर आ गया, जबकि नवंबर में थोड़ा सुधार रहा और विदेशी सैलानियों की तादाद 2.1 फीसदी पर पहुंच गई।
मुंबई के तीन महत्वपूर्ण होटलों — ताज महल पैलेस एवं टॉवर्स, द ओबेरॉय और द ट्राइडेंड में आतकंवादियों द्वारा 60 घंटे तक चलाये गये कृत्य ने इस उद्योग के बुरे दिनों में आग में घी डालने का काम किया। जिसके बाद कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल और अमरीका द्वारा अपने नागरिकों के लिए भारत यात्रा टालने के फरमान ने भी इस उद्योग पर काफी बुरा असर डाला।