घरेलू दूरसंचार उपकरण एवं फाइबर ऑप्टिक कंपनी एचएफसीएल ने दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पादों के विनिर्माण के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) में भाग लेने का निर्णय लिया है।
दूरसंचार विभाग अगले कुछ दिनों में दूरसंचार क्षेत्र के लिए 12,195 करोड़ रुपये की पीएलआई योजना के अंतिम विवरण जारी कर सकता है। इसके तहत पात्र कंपनियों को 5 साल के लिए 4 से 6 फीसदी के दायरे में प्रोत्साहन की पेशकश की जाएगी। एचएफसीएल के चेयरमैन महेंद्र नाहटा ने इस खबर की पुष्टिï करते हुए कहा, ‘हम निश्चित तौर पर दूरसंचार उपकरणों पर पीएलआई योजना के लिए पात्रता में भाग लेंगे। पीएलआई योजना से इस क्षेत्र में मेक इन इंडिया अभियान को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा, विशेषकर आगामी 5जी प्रौद्योगिकी के लिए।’
एचएफसीएल इस योजना का लाभ उठाने वाली दूसरी घरेलू कंपनी होगी। पहली कंपनी डिक्सन टेक्नोलॉजिज है जिसने दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल के साथ एक संयुक्त उद्यम स्थापित किया है। इस संयुक्त उद्यम में भारती एयरटेल की 24 फीसदी हिस्सेदारी होगी। समझौते के तहत संयुक्त उद्यम अपने अधिकतर उत्पादों की बिक्री एयरटेल को करेगा जो उसका सबसे बड़ा ग्राहक भी होगी।
एचएफसीएल फिलहाल अधिकतर मौजूदा भारतीय दूरसंचार ऑपरेटरों को दूरसंचार उपकरण एवं फाइबर ऑप्टिक्स की आपूर्ति करती है। इनमें रिलायंस जियो (उदाहरण के लिए, फाइबर टु होम), बीएसएनएल एवं अन्य सरकारी दूरसंचार बुनियादी ढ़ांचा कंपनियां शामिल हैं जो ग्रामीण भारत को जोडऩे के लिए भारत नेट फाइबर ब्रॉडबैंड नेटवर्क पर काम कर रही हैं। फिलहाल एचएफसीएल करीब एक चौथाई राजस्व फाइबर कारोबार से हासिल करती है। घरेलू दूरसंचार उपकरण बाजार के भी खुलने के आसार हैं क्योंकि रिलायंस जियो जैसी कंपनियां अब अपने स्वदेशी 5जी नेटवर्क का परीक्षण कर रही हैं। रिलायंस जियो ने यह स्पष्टï कर दिया है कि वह किसी भी स्वदेशी प्रौद्योगिकी का समर्थन करेगी बशर्ते उसकी गुणवत्ता समान हो।
सरकार के फीडबैक के अनुसार, दूरसंचार क्षेत्र के लिए पीएलआई योजना ने वैश्विक कंपनियों, ईएमएस कंपनियों और घरेलू कंपनियों का ध्यान आकर्षित किया है। इनमें गियर बनाने वाली यूरोप की कंपनी नोकिया और एरिक्सन शामिल हैं जिनका भारत में पहले से ही कुछ विनिर्माण कारोबार मौजूद हैं। इसके अलावा अमेरिका की कंपनी सिस्को एवं सिएना और जेबिल, फॉक्सकॉन एवं फ्लेक्स जैसी ईएमएस कंपनियां भी शामिल हैं।
घरेलू स्तर पर एचएफसीएल और डिक्सन के अलावा स्टरलाइट टेक्नोलॉजिज जैसी अन्य कंपनियां भी पीएलआई योजना में भागीदारी कर सकती हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में दूरसंचार उपकरणों के भारी आयात बिल को कम करना है।