प्रतिभूति अपील पंचाट (सैट) ने सोमवार को केतन पारिख की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने बाजार नियामक सेबी के उस फैसले को चुनौती दी थी। सेबी ने उन्हें कैपिटल ग्रुप के दो ट्रेडर से क्रॉस-एग्जामिनेशन यानी जिरह की इजाज़त देने से इनकार कर दिया था।
मामला जनवरी 2025 में सेबी के अंतरिम आदेश से जुड़ा है। आदेश में पारिख और सिंगापुर के ट्रेडर रोहित सालगावकर को प्रतिभूति बाजार में प्रवेश से रोक दिया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अमेरिका के एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक के ट्रेड में फ्रंट-रनिंग की थी। यह एफपीआई दुनिया भर में करीब 2.5 लाख करोड़ डॉलर के फंड का प्रबंधन करता है।
नियामक ने कथित स्कीम से हुई 65.77 करोड़ रुपये की गैर-कानूनी कमाई को वापस करने का निर्देश दिया था। सेबी का पिछला आदेश अंतरिम था और अंतिम आदेश का इंतजार है। सैट के पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति पीएस दिनेश कुमार ने मौखिक आदेश में कहा, हमारी राय में कानून की स्थिति स्पष्ट है कि एक बार सुनवाई पूरी हो जाने के बाद याची के पास केवल अंतिम आदेश को चुनौती देने का अधिकार बचता है। पंचाट ने कहा, इन परिस्थितियों में मामले की सुनवाई पूरी होने और उसके सुरक्षित हो जाने के बाद दो इकाइयों से जिरह करने की याची की मांग गलत है। इसलिए अपील खारिज की जाती है।
पारिख की ओर से दो ट्रेडर से जिरह की मांग को खारिज करते हुए सेबी ने कहा था कि ट्रेडरों के बयानों का इस्तेमाल उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकालने के लिए नहीं किया गया था क्योंकि ट्रेडरों ने साफ तौर पर कहा था कि वे पारिख को नहीं जानते। इसके अलावा, सेबी के जनवरी 2025 के आदेश में भी उन दो ट्रेडरों का नाम शामिल नहीं था।