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भारी बारिश-बाढ़ में कार या इलेक्ट्रिक गाड़ी खराब हो गई? जानें इंश्योरेंस कंपनी कब पैसा देगी और कब नहीं

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एक्सपर्ट के मुताबिक, मानसून में जलभराव से गाड़ी खराब होने पर इंश्योरेंस क्लेम के नियम जानना जरूरी है। पानी में बंद कार स्टार्ट करने जैसी गलतियों से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है

Last Updated- August 24, 2026 | 6:34 PM IST
motor insurance
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

मानसून आते ही सड़कों पर जलभराव और तेज बारिश के कारण गाड़ियों के खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। हर साल बड़ी संख्या में गाड़ियां पानी में डूबने, इंजन सीज होने या पानी अंदर जाने की वजह से बंद पड़ जाती हैं। ऐसे वक्त में गाड़ी मालिकों को सबसे ज्यादा उम्मीद अपने मोटर इंश्योरेंस से होती है। लेकिन कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम देने से मना कर देती है।

ऐसे में यह समझना जरूरी है कि बारिश या जलभराव से कार या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) को नुकसान होने पर इंश्योरेंस कब क्लेम देता है और किन लापरवाहियों की वजह से क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। मानसून में गाड़ी चलाने वालों के लिए इन नियमों की जानकारी होना काफी अहम है।

इंश्योरेंस में क्या कवर होता है और क्या नहीं?

आम तौर पर मानसून के दौरान बाढ़, जलभराव, चक्रवात, भूस्खलन या तेज बारिश में पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से कार को हुए नुकसान को ‘स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस’ में कवर किया जाता है। डिजिट इंश्योरेंस के मोटर अंडरराइटिंग हेड आदित्य कुमार बताते हैं कि कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी खराब मौसम की वजह से होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने में मदद करती है। इसमें पानी की वजह से इंटीरियर, वायरिंग, इलेक्ट्रिकल यूनिट्स और सेंसर्स को हुए नुकसान का कवर भी शामिल होता है।

हालांकि, इंजन को लेकर मामला थोड़ा अलग है। आदित्य कुमार के मुताबिक, स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में पानी घुसने से इंजन को होने वाला नुकसान कवर नहीं होता। इसके लिए ‘इंजन एंड गियरबॉक्स प्रोटेक्ट’ ऐड-ऑन लेना जरूरी है।

कुमारे के मुताबिक, अगर बाढ़ में कार पूरी तरह डूब जाती है और उसकी मरम्मत संभव नहीं रहती, तो इंश्योरेंस कंपनी कार की IDV यानी ‘इंश्योर्ड डिक्लेर्ड वैल्यू’ के आधार पर क्लेम का निपटारा करती है। ऐसे में सिर्फ कम प्रीमियम के लिए कम IDV चुनना नुकसान का सौदा हो सकता है।

आनंद राठी इंश्योरेंस ब्रोकर्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रदीप फुंडे के मुताबिक, अगर कार की मरम्मत का खर्च उसकी IDV के करीब 75% से ज्यादा हो जाता है, तो उसे ‘टोटल लॉस’ माना जाता है और पूरा क्लेम दिया जाता है।

Also Read: पोस्ट ऑफिस बीमा के नियमों में हुआ बड़ा बदलाव, कही भी रहने पर बंद नहीं होगा आपका लाइफ इंश्योरेंस अकाउंट!

पानी में बंद कार को स्टार्ट करने की गलती पड़ सकती है भारी

मानसून के दौरान इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने की सबसे बड़ी वजह कई बार चालक की अपनी लापरवाही होती है। लोग अक्सर जलभराव वाली सड़क पर जबरन गाड़ी चलाते हैं या पानी में कार बंद होने के बाद उसे दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश करते हैं।

प्रदीप फुंडे बताते हैं कि डूबी हुई गाड़ी को स्टार्ट करने पर इंजन के अंदर पानी जा सकता है। इसे ‘हाइड्रोस्टैटिक लॉक’ कहा जाता है। इंश्योरेंस कंपनियां इसे ‘कॉन्सिक्वेंशियल लॉस’ यानी परिणामी नुकसान मानती हैं। नियमों के मुताबिक, घटना के बाद चालक की गलती से हुए अतिरिक्त नुकसान की भरपाई इंश्योरेंस कंपनी नहीं करती और ऐसे में क्लेम खारिज हो सकता है।

आदित्य कुमार भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि जब पानी का स्तर टायरों से ऊपर हो, तो ऐसे जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना चाहिए। अगर पानी में कार बंद हो जाए, तो उसे दोबारा सेल्फ या क्रैंक करने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। इसे चालक की लापरवाही माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इंजन को बंद ही रहने दें। इसके बाद नुकसान की तस्वीरें और वीडियो तुरंत बना लें और इंश्योरेंस कंपनी की रोडसाइड असिस्टेंस (RSA) सेवा की मदद से गाड़ी को टो कराकर सीधे सर्विस सेंटर भेजें।

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए अलग हैं सुरक्षा नियम

आजकल सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन पानी के संपर्क में आने पर EV के लिए कुछ सावधानियां पेट्रोल-डीजल गाड़ियों से अलग होती हैं।

प्रदीप फुंडे के मुताबिक, अगर आपकी इलेक्ट्रिक कार पानी में डूब गई है, तो उसे स्टार्ट करने या चार्जिंग प्लग लगाने की गलती बिल्कुल न करें। ऐसा करने से कार की महंगी हाई-वोल्टेज बैटरी और इनवर्टर को बड़ा नुकसान हो सकता है। अगर डूबी हुई EV से सुसराहट की आवाज आए या धुआं निकलता दिखे, तो तुरंत फायर ब्रिगेड को बुलाएं। गाड़ी को बेसमेंट जैसी बंद जगह पर रखने के बजाय खुली जगह में पार्क करना चाहिए। EV की बैटरी की जांच भी हमेशा कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर से ही करानी चाहिए।

मानसून में गाड़ी को बारिश और जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सिर्फ बेसिक इंश्योरेंस पॉलिसी काफी नहीं हो सकती। दोनों एक्सपर्ट्स की सलाह है कि वाहन मालिक अपनी जरूरत के हिसाब से सही ऐड-ऑन कवर जरूर चुनें। पेट्रोल-डीजल गाड़ियों के लिए इंजन प्रोटेक्शन, जीरो डिप्रिसिएशन, कंज्यूमेबल्स कवर, रोडसाइड असिस्टेंस और रिटर्न टू इनवॉइस जैसे ऐड-ऑन उपयोगी हो सकते हैं।

वहीं, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए इन कवर के अलावा बैटरी प्रोटेक्ट, चार्जर और चार्जिंग केबल कवर लेना भी जरूरी हो सकता है। इससे भारी बारिश या जलभराव की स्थिति में गाड़ी को हुए नुकसान का बड़ा खर्च जेब पर अचानक नहीं पड़ता।

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First Published - August 24, 2026 | 6:34 PM IST

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