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एचडीआईएल ने नहीं छोड़ी हैं उम्मीदें

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Last Updated- December 10, 2022 | 7:34 PM IST

मुंबई स्थित डेवलपर हॉउसिंग डेवलपमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (एचडीआईएल) ने भले 15 हजार करोड़ रुपये की धारावी पुनर्विकास योजना से अपने हाथ खींच लिए हैं, लेकिन इसे लेकर उसकी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं।
वह अब इस प्रोजेक्ट को हासिल करने वाली नई कंपनी के साथ काम करना चाहती है। कंपनी के उप महाप्रबंधक (फाइनैंस) हरि पांडे ने बताया कि, ‘आज यह परियोजना वित्तीय रूप से आकर्षक नहीं रह गई है। हम यह भी बता सकते हैं कि हम कब इस पर काम शुरू कर सकेंगे। साथ ही, नीलामी की प्रक्रिया और सरकार जो रकम मांग रही है, उन पर भी अनिश्चितता का माहौल है।
हम नहीं चाहते कि हमारी परियोजनाओं की अवधि 4-5 साल से आगे खींच जाए। आज पूंजी हासिल करना कोई आसान काम नहीं रह गया है। इसलिए हम किसी घाटे के सौदे में एक रुपया तक नहीं लगाना चाहते हैं।’
एचडीआईएल, कंपनियों के उन पांच समूहों में एक है, जिसने मुंबई शहर के बीचोंबीच 535 एकड़ इलाके में बसी इस झुग्गी के पुनर्विकास की परियोजना से अपने हाथ खींच लिया है। इस परियोजना के लिए कंपनी को लीमैन ब्रदर्स का साथ मिला था। लिमिटलेस एलआईसी, रिलायंस इंजीनियरिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लि.- अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर वेंचर कैपिटल, लार्सन ऐंड टूर्बो- गोदरेज प्रॉपर्टीज ने भी इस परियोजना से अपने हाथ खींच लिए हैं।
इस परियोजना के तहत धारावी को एक फाइनैंशियल सेंटर के रूप में बदलने की योजना बनाई गई थी। इससे फिलहाल दफ्तरों और घरों के लिए 50 लाख वर्ग फुट की जमीन हासिल होती। साथ ही, अगले सात सालों में 40 लाख वर्ग फुट का ऑफिस स्पेस हासिल होता।
योजना के तहत तो काम दिसंबर, 2007 में ही शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन यह परियोजना कई तरह की विवादों में फंस गई। पांडे का कहना है कि, ‘हम भले ही सीधे तौर पर इसमें हिस्सा न लें, लेकिन दूसरे रास्ते भी तो हैं। हम कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर परियोजना को हासिल करने वाली कंपनी के साथ तो काम कर ही सकते हैं।’

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First Published - March 12, 2009 | 11:38 AM IST

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