भारतीय कंपनी जगत के लिए शानदार रही तीसरी तिमाही

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 7:47 AM IST

दिसंबर 2020 में समाप्त तीसरी तिमाही में भारतीय कंपनी जगत का शुद्ध लाभ 1.64 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जिसकी वजह जिंस की ऊंची कीमतों से मिला फायदा और बैंक की आय में बड़ा बदलाव है। नतीजे घोषित करने वाली 3,323 सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 68.6 फीसदी ज्यादा रहा। इसकी तुलना में दूसरी तिमाही में आय छह गुना (534 फीसदी) बढ़ी थी और पिछले साल की समान अवधि में इसमें 6.5 फीसदी की उछाल आई थी।
कंपनियों को ज्यादातर फायदा परिचालन लागत में कमी, उत्पादों की ज्यादा कीमतें (खास तौर से औद्योगिक जिंस) और फंसे कर्ज के लिए बैंकों के प्रावधान में तेज गिरावट से मिला।
इन कंपनियों की संयुक्त शुद्ध बिक्री (लेनदारों की ब्याज आय समेत) तिमाही में सालाना आधार पर महज 1.2 फीसदी बढ़ी, जो जुलाई-सितंबर, 2020 की तिमाही में सालाना आधार पर आई 3.9 फीसदी की गिरावट के मुकाबले थोड़ा बेहतर है।
लगातार पांच तिमाही के बाद यह पहली तिमाही रही जब भारतीय कंपनी जगत के राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज हुई। क्षेत्रवार देखें तो आय में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी बैंक, धातु व खनन कंपनियों, सीमेंट निर्माताओं, तेल व गैस कंपनियों और मोबाइल ऑपरेटरों ने दर्ज की।
तीसरी तिमाही में रिकॉर्ड आय हालांकि भ्रम पैदा कर रहा है क्योंकि पिछले 12 महीने के आधार पर और प्रति शेयर आय पिछले उच्चस्तर से नीचे है। तीसरी तिमाही में कंपनियों ने पिछले 12 महीने के आधार पर 3.27 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया और मार्च 2017 की तिमाही में अब तक का सर्वोच्च लाभ 4.44 लाख करोड़ रुपये रहा था। यह अहम है क्योंकि पिछले 12 महीने के लाभ का इस्तेमाल प्रति शेयर आय और पीई गुणक की गणना में किया जाता है।
साथ ही कुल आय में वी-आकार की रिकवरी पूरे भारतीय जगत का प्रतिनिधित्व नहीं करता क्योंंकि तीसरी तिमाही में आय में होने वाली बढ़त मेंं कुछ ही कंपनियों की हिस्सेदारी ज्यादा है। उदाहरण के लिए अकेले येस बैंक ने तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी जगत की आय में करीब 18 फीसदी का योगदान किया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में येस बैंक ने 18,560 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान दर्ज किया था जबकि मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में उसने 151 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।
आय में बड़े बदलाव वाली अन्य कंपनियों मे रिलायंस कम्युनिकेशंस, इंडियन ओवरसीज बैंक, आईडीबीआई बैंक, जेपी पावर वेंचर्स, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ऑयल, वोडाफोन आइडिया और भारती एयरटेल शामिल है। बैंकों ने जहां फंसे कर्ज के लिए प्रावधान में तेज गिरावट दर्ज की, वहीं अन्य ने परिसंपत्ति बिक्री से एकमुश्त लाभ या इन्वेंट्री से मिला लाभ दर्ज किया।
इन्हें छोड़ दें तो तीसरी तिमाही में संयुक्त शुद्ध लाभ की रफ्तार महज 10 फीसदी बैठती है। भारतीय कंपनी जगत को कच्चे माल व ऊर्जा की लागत में तेज गिरावट का भी फायदा मिला, जिससे परिचालन मार्जिन में विस्तार हुआ।
मुख्य कंपनियों का परिचालन मार्जिन (बैंक व वित्तीय फर्मों को छोड़कर) तीसरी तिमाही में शुद्ध बिक्री की 19.7 फीसदी की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 400 आधार अंक ज्यादा है। मुनाफे को मजबूती ब्याज दर में गिरावट से भी मिली। भारतीय कंपनी जगत की संयुक्त ब्याज लागत तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर 2 फीसदी घटी और राजस्व पर ब्याज का भार भी सात तिमाही के निचले स्तर 12.4 फीसदी पर आ गया।

First Published : February 25, 2021 | 11:51 PM IST